/..और इस लिए मंजुल भार्गव को मिला गणित का नोबल ..

..और इस लिए मंजुल भार्गव को मिला गणित का नोबल ..

मंजुल भार्गव, 40 वर्षीय भारतीय मूल के गणित के प्रोफेसर जिन्हें हाल ही में गणित के नोबल फील्ड मैडल के लिए चुना गया है, ने दो सौ साल पुराने  नंबर थ्योरी नियम को सरल करने में और बेहद लोकप्रिय रुबिक क्यूब को हल करने में सफलता प्राप्त की है.

प्रिन्सटन विश्वविद्यालय के इस प्रोफेसर ने एक बातचीत में बताया कि जर्मनी के महँ गणितज्ञ फ्रेडरिक गॉस ने दिखाया था कि दो नंबर- जिनमें दोनों ही दो पूर्ण वर्गों का योग हैं- को आपस में गुना करने पर एक पूर्ण वर्ग संख्या ही सामने आएगी. भार्गव, जिनके दादा राजस्थान में संस्कृत के प्रोफेसर थे, ने बताया कि उन्होंने एक बार संस्कृत की पांडुलिपियों का अध्ययन किया और उपरोक्त नियम को वहाँ भी लिखा देखा जिसका श्रेय आचार्य ब्रह्मगुप्त को जाता है.

इसलिए जब भार्गव के सामने अठारहवीं शताब्दी का प्रख्यात गॉस का बाइनरी द्विघातीय समिकरण का संघटक नियम आया तो उन्होंने उसे बीस पेज के में सिद्ध करने की जगह  सरलीकृत करने की सोची.mqdefault

इस प्रक्रिया में ये बताया जाता है कि अगर दो द्विघातीय समीकरणों को आपस में गुना किया जायेगा तो किस प्रकार का द्विघात प्रकट होगा. भार्गव बताते हैं कि तमाम कोशिशों के बाद सफलता रुबिक के नौ की जगह चार वर्ग प्रति फेस वाले क्यूब की सहायता से मिली.

भार्गव ने देखा कि यदि क्यूब के चारों कोनों पर एक संख्या रखी जाये और क्यूब को आधा आधा कर दिया जाये तो सभी आठ कोनो की संख्या को जोड़ कर एक बाइनरी द्विघात रूप दिया जा सकता है.

यही नहीं, क्यूब को तीन बाइनरी द्विघात उत्पन्न करने के लिए प्रोयोग किया जा सकता था क्यों कि क्यूब को आधा करने के तीन तरीके थे – आगे से पीछे की तरफ, ऊपर से नीचे की तरफ और दायें से बाएँ की तरफ.

इन तीन द्विघतों को गॉस के नियम सम्बन्ध में शून्य तक जोड़ा गया. इस तरह क्यूब को काटने के विचार ने गॉस के सिद्धांत का पुनर्नियमिकरण कर दिया था. भार्गव ने ये भी देखा कि अगर वे रुबिक के डोमिनो पर इसी तरह संख्या रखते हैं तो वे घनात्म रूपों के लिए एक संघटक नियम. उनका जिनका घातांक तीन है.

इसी तरह उन्होंने बारह अन्य संघटक खोज निकाले, जो कि उनकी पीएचडी थीसिस का हिस्सा बने. हार्वर्ड के गनियाग्य बेनेडिक्ट ग्रॉस कहते हैं, “गॉस के सिद्धांत के बाद से ये उस दिश में पहला बड़ा योगदान है.”

 

प्रोफेसर भार्गव ने दिखाया कि सिर्फ द्विघातीय समीकरण ही इस रूप में नहीं हो सकते, बल्कि घनात्मक समीकरण भी इस रूप में हो सकते हैं. वो ये दिखने में सफल रहे कि गॉस का सिद्धांत ऐसे चौदह सिद्धांतों में से एक  है .

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