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कोलेजियम ख़त्म करने को राज्य सभा की मंज़ूरी..

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गुरूवार को राज्यसभा ने मील के पत्थर साबित हो सकने वाले राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति कमीशन बिल, 2014 को पास कर दिया. संविधान के 99वें संशोधन से जुड़े इस बिल को लोकसभा में बुधवार को पारित कर दिया गया था. इसे नरेन्द्र मोदी के लिए प्रधानमंत्री के रूप में एक बड़ी विजय के रूप में देखा जा रहा है. बिल को राज्यसभा में ध्वनि मत से पारित कर दिया गया. ये बिल अब तक जजों की नियुक्ति के लिए जारी कोलेजियम व्यवस्था को ख़ारिज करता है. संविधान में संशोधन के इस बिल को राज्य सभा में 179 वोट मिले.new-jpc-members-row-disrupts-rajya-sabha_290813064921

इस बिल के ज़रिये राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति कमीशन के लिए रास्ता साफ हो गया है जो कि सर्वोच्च न्यायलय और चौबीस अन्य उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्ति और स्थानांतरण करने का अधिकारी होगा. ये बिल राज्य विधान्मंदलों में कम से कम आधे द्वारा पारित किये जाने के बाद ही प्रभाव में आयेगा. इसमें आठ महीने तक का समय लग सकता है. इसके बाद इसे राष्ट्रपति की मजूरी के लिए भेजा जायेगा.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राज्य सभा में सरकार के इस कदम की ज़ोरदार पैरवी करते हुए इस बिल को बेहद ज़रुरी और न्यायसंगत बताते हुए कहा कि इस बिल के ज़रिये भारतीय न्याय व्यवस्था में सुधार की शुरुआत की जा रही है और उस प्रथा को ख़त्म किया जा रहा है जिसमें अब तक न्यायमूर्ति को एक विशेषाधिकारी द्वारा नियुक्त  किया जाता था. जेटली ने संविधान के अनुच्छेद 124 का ज़िक्र किया जिसमें न्यायाधीशों की नियुक्ति का प्रावधान है. इस  अनुच्छेद में साफ़ लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट के जज की नियुक्ति सरकार की संस्तुति पपर राष्ट्रपति के द्वारा होगी. इस बिल के पारित होने के बाद देश में 266 न्यायाधीशों के रिक्त स्थान भरने का अधिकार सरकार को मिल जायेगा. हालाँकि सुप्रीम कोर्ट में 31 में से सिर्फ एक स्थान रिक्त है. उम्मीद की जा रही है कि इन नियुक्तियों के बाद देश भर में लंबित पड़े मुकदमों की सुनवाई पर असर पड़ेगा और न्याय प्रक्रिया में तेज़ी आएगी.

सरकार ने सोमवार को संविधान में संशोधन का बिल पेश किया था जिसके बाद छः सदस्यीय न्यायाधीश नियुक्ति कमेटी के लिए मंज़ूरी मिल  गयी. इस कमेटी के अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायलय के न्यायमूर्ति होंगे. इसके अतिरिक्त इसमें सर्वोच्च न्यायलय के ही दो वरिष्ठ जज, देश के दो गणमान्य नागरिक और कानून मंत्री होंगे. जहां इनमें से कोई भी दो सदस्य वीटो अधिकार के ज़रिये किसी की नियुक्ति पर मुहर लगा सकते हैं, वहीँ सरकार कपास अंतिम निर्णय का अधिकार सुरक्षित रहेगा.

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