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फ्लिपकार्ट पर प्रवर्तन निदेशालय लगा सकता है हज़ार करोड़ का जुर्माना..

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दो साल की जांच के बाद प्रवर्तन निदेशालय फ्लिपकार्ट को कारण बताओ नोटिस जारी करने की तैयारी में है. निदेशालय के अधिकारीयों के अनुसार जांच पूरी हो चुकी है और बंगलौर की टीम ने फ्लिप्कार्ट को फेमा के उल्लंघन का दोषी पाया है. इसलिए जल्दी ही कारण बताओ नोटिस जारी किया जायेगा. सूत्रों के अनुसार भारत की बड़ी ई कॉमर्स कंपनियों में शुमार फ्लिपकार्ट ने ws retail के अंतर्गत फेमा के नियमों का उल्लंघन किया है और कंपनी ने विदेशों से पैसा निवेश करवाया है.flipkart-online-shopping-websites-in-india

भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नियम ई कॉमर्स , खास तौर से खुदरा व्यापर से जुडी कंपनियों में सीधे निवेश की इजाज़त नहीं देते हैं. 2013 में प्रवर्तन निदेशालय की जांच तब शुरू हुयी जब फ्लिपकार्ट ने अपने व्यापर मॉडल को बदल कर विक्रेताओं और खरीदारों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने वाली व्यवस्था लागू कर दी थी.

प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों का कहना है कि हम उनके व्यापार की पद्धति से वाकिफ ज़रूर थे, लेकिन उन्हें 2013 से उल्लंघन के दायरे में लिया जायेगा. यही नहीं, फेमा के नियमों के मुताबिक विदेशी निवेश की पुष्टि होने की स्थिति में प्रवर्तन निदेशालय निवेश की राशि का तीन गुना जुर्माना भी लगा सकता है. निदेशालय फ़िलहाल जवाब न देने की सूरत में एक हज़ार करोड़ के परिणाम भुगतने का नॉटिस जारी कर सकता है.

इस मामले में जांच पूरी होनेके बाद निर्णय लेने की ज़िम्मेदारी एक विशेष निदेशक के पद पर नियुक्त अधिकारी की होगी जिसे अब यह निर्णय लेना है कि जुरमाना कितना लगाया जायेगा. हालाँकि निदेशालय चाहे तो रिज़र्व बैंक के सामने भी पेशी करवा सकता है. फेमा नियमों के उल्लंघन के ज़्यादातर मामलों में न्यायिक प्रक्रिया बेहद लम्भी और खिचाव भरी होती है. इस जांच की शुरुआत साल 2012 में हुयी जब तत्कालीन वाणिज्य और उद्योग मंत्री आनंद कुमार ने इसकी जानकारी सरकार को दी थी. हालाँकि सिर्फ फ्लिपकार्ट पर ही जांच नहीं हो रही है, myntra  पर भी नज़र रखी जा रही है.

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