/अमिलिया में निष्पक्ष ग्राम सभा के लिए विदेश में भी हुए संगठन लामंबद..

अमिलिया में निष्पक्ष ग्राम सभा के लिए विदेश में भी हुए संगठन लामंबद..

सिंगरौली,  महान कोल ब्लॉक के आवंटन के लिए अमिलिया में प्रस्तावित ग्राम सभा को निष्पक्ष कराने की मांग को लेकर ग्रीनपीस इंटरनेशल ने आज ग्रीनपीस इंडिया के साथ खड़े होते हुए भारतीय सरकार से पारदर्शी ग्राम सभा करवाने की मांग की है.IMG_9048

सिंगरौली के स्थानीय प्रशासन ने इस महीने अमिलिया में विशेष ग्राम सभा करवाने की घोषणा की है, जिसमें वन समुदाय खदान के बारे में राय देंगे. ग्रीनपीस इंडिया और स्थानीय समुदाय के द्वारा पिछले साल हुए फर्जी ग्राम सभा के खुलासे के बाद यह दूसरी बार है जब प्रशासन ने दुबारा ग्राम सभा करवाने का निर्णय लिया है.
ग्राम सभा की घोषणा के बीच स्थानीय समुदायों को डराने-धमकाने की कोशिश भी की जा रही है. इसी के तहत ग्रीनपीस के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार और उनके सामान को जब्त भी किया गया है.

ग्रीनपीस इंडिया की प्रिया पिल्लई ने कहा कि महान कोयला खदान से सिर्फ पर्यावरण को ही भारी नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा बल्कि महान जंगल पर जीविका के लिए निर्भर हजारों लोगों का जीवन भी खतरे में पड़ जाएगा. इस बीच प्रशासन द्वारा जिस तरह से हमें दबाये जाने की कोशिश की जा रही है उससे हम और मजबूत होकर महान जंगल को बचाने की लड़ाई की तरफ केन्द्रित हो रहे हैं.

उन्होंने आगे कहा कि अगर हम भारतीय अपने देश को समावेशी विकास और लोकतंत्र वाले देश के रुप में दिखाना चाहते हैं तो ग्राम सभा को पर्दे के पीछे करवाने की साजिश को खत्म करना ही होगा. हम सरकार से मांग करते हैं कि सामुदायिक वनाधिकार को पहले लागू करवाने के बाद एक निष्पक्ष और स्वतंत्र ग्राम सभा का आयोजन करवाया जाय और यही प्रक्रिया परियोजना से प्रभावित होने वाले सभी 54 गांवों में लागू किया जाये.

महान जंगल सिंगरौली के बचे-खुचे जंगलों में से एक है, जिसमें हजारों आदिवासियों और जंगलवासियों की जीविका निर्भर है. यह जंगल दुर्लभ साल के वृक्षों के साथ-साथ कई तरह के वन्यजीवों से भी भरा हुआ है.

ग्रीनपीस इंडिया पिछले तीन सालों से स्थानीय समुदाय का समर्थन कर रही है जो अपने जंगल को खदान से बचाने के लिए और जंगल पर वनाधिकार पाने के लिए प्रयासरत हैं. ग्रीनपीस के इस प्रयास के बदले एस्सार ने उसपर 500 करोड़ के मानहानि का मुकदमा दर्ज कर रखा है.

ग्रीनपीस इंटरनेशलन के कार्यकारी निदेशक कुमी नायडू ने कहा कि यह कोयला खदान पर्यावरण और लोगों के लिए खतरनाक है. ग्रीनपीस महान के समुदाय के साथ खड़ी है और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रयासरत है. सरकार को अपने प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने वाले समुदायों की आवाज को सुनना चाहिए और एक निष्पक्ष तथा पारदर्शी प्रक्रिया अपनाकर ग्रामीणों की आवाज को सम्मान देना चाहिए.

नायडू ने आगे कहा कि ग्रीनपीस इंडिया वैश्विक समस्या से निपटने के लिए कुछ हिस्सा विदेशी चंदे का लेती है. इसके बावजूद पर्यावरण के मुद्दे पर अलार्म बचाने वाले सीविल सोसाइटी की आलोचना की बजाय सरकार को अक्षय ऊर्जा के बारे में सोचना चाहिए, जिससे देश के करोड़ों लोगों तक बिजली पहुंचाया जा सकता है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.