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अमेरिका ने सीरिया में अपने नागरिकों की रिहाई के लिए चलाया था असफल अभियान..

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अमेरिका ने सीरिया में आतंकवादी समूह आईएसआईएल द्वारा बंधक बनाकर रखे गए अमेरिकी नागरिकों की रिहाई के लिए हाल ही में एक असफल अभियान चलाया था। पेंटागन ने बताया कि यह अभियान इन गर्मियों में शुरू किया गया था।

डेमो चित्र

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यह रहस्योदघाटन इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड द लेवांत द्वारा एक वीडियो जारी किए जाने के एक दिन बाद आया है। इस वीडियो में चरमपंथी समूह का एक सदस्य अमेरिकी पत्रकार जेम्स फोले का सिर कलम करते हुए दिख रहा है। फोले को नवंबर 2012 में सीरिया में अगवा कर लिया गया था।

पेंटागन के प्रेस सचिव जॉन किर्बी ने कहा, अभियान में हवाई हमले और जमीनी हमले शामिल थे और यह विशेष तौर पर आईएसआईएल के बंधक बनाने वाले नेटवर्क पर केंद्रित था। दुर्भाग्यवश यह अभियान सफल नहीं हो पाया क्योंकि बंधक लक्षित स्थानों पर मौजूद नहीं थे।

होमलैंड सिक्योरिटी एंड काउंटर-टेररिज्म के अध्यक्ष की सहायक लीजा मोनाको ने बताया कि इसी गर्मियों में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने आईएसआईएल द्वारा अपहत और सीरिया में बंधक बनाए गए अमेरिकी नागरिकों की रिहाई के प्रयास के तहत एक अभियान अधिकृत किया था।

उन्होंने बताया कि ओबामा ने इस बार कार्रवाई करने के लिए अधिकत किया क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा दल का आकलन था कि जैसे जैसे दिन बीत रहे हैं आईएसआईएल के गिरफ्त में मौजूद बंधकों के जीवन पर खतरा बढ़ता जा रहा है।

मोनाको ने कहा, दुर्भाग्यवश अभियान अंतत: सफल नहीं रहा क्योंकि बंधक वहां मौजूद नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा कि अपनी सैन्य अभियानों की क्षमता की सुरक्षा की आवश्यकता को देखते हुए हम अभियान से जुड़ी जानकारी का खुलासा नहीं कर सकते। इस बीच किर्बी ने बताया कि अमेरिका अपने नागरिकों की सुरक्षा, विशेष तौर पर बंधक बनाए गए नागरिकों की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है।

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About Author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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