/विवादित बयान देकर घिरे विधायक मेश्राम..

विवादित बयान देकर घिरे विधायक मेश्राम..

मामला महान कोल ब्लॉक का.. विधायक ने ग्रामीणों से कहा ग्रीनपीस को लात मारकर भगाओ.. ग्रीनपीस की प्रिया पिल्लई ने एसपी से जांच करने की लगाई गुहार..

सिंगरौली, विवादित महान कोल ब्लॉक आवंटन के मुद्दे पर अब देवसर विधायक डा. राजेन्द्र मेश्राम भी घिरते नजर आ रहे हैं. कुछ दिन पहले अमिलिया ग्राम में हुए एक उद्घाटन समारोह में बीजेपी विधायक ने खुलकर कंपनी के पक्ष में भाषण दिया था और क्षेत्र में वनाधिकार कानून को लेकर काम कर रहे सामाजिक संगठनों के खिलाफ बोला था. आज ग्रीनपीस की कार्यकर्ता प्रिया पिल्लई ने सिंगरौली एसपी को मेल लिखकर पूरे मामले से अवगत कराया है.greenpeace

मेल में प्रिया पिल्लई ने आरोप लगाया है कि माननीय विधायक ने ग्रामीणों को भड़काने का प्रयास किया है, जिससे कभी भी अप्रिय घटना होने की आशंका बढ़ गयी है. पिल्लई ने एसपी से पूरे मामले की जांच की गुहार लगायी है. मेल में महान संघर्ष समिति तथा ग्रीनपीस के सदस्यों के सुरक्षा के प्रति चिंता भी जतायी गयी है.

अमिलिया गांव में राशन भंडार के लिये तैयार भवन के उद्घाटन अवसर पर बोलते हुए विधायक राजेन्द्र मेश्राम ने गांव वालों से गुमराह न होने की अपील करते हुए कहा था कि कंपनी के आने से 50 प्रतिशत स्थानीय लोगों को सबसे पहले रोजगार दिया जाएगा. साथ ही क्षेत्र का विकास भी होगा. विधायक के इस वादे पर सवाल उठाते हुए स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने कहा है कि सिंगरौली में कई कंपनियां आई हैं, जिन्होंने स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं दिया है. विधायक जी सबसे पहले वहां के लोगों को उनका अधिकार दिलाने के प्रयास क्यों नहीं करते हैं. प्रस्तावित कोल ब्लॉक की हिस्सेदार एस्सार के पावर प्लांट से पहले भी स्थानीय लोग विस्थापित हो चुके हैं लेकिन अभी तक लोगों को स्थायी नौकरी नहीं दी जा सकी है. इसी साल मार्च में महिलाओं द्वारा मुआवजे और नौकरी के सवाल पर एक महीने से अधिक अनशन भी किया जा चुका है, जहां कोई भी स्थानीय जनता के प्रतिनिधि नहीं आए थे और न ही विधायक डां. मेश्राम ने कभी उनके अधिकारों के लिए आवाज उठायी.

प्रिया पिल्लई ने एसपी सिंगरौली को लिखे मेल में कहा है कि हमारे पास विधायक के नफरत फैलाने वाले भाषण की रिकॉर्डिंग है जिसमें वो सीधे-सीधे हमारे कार्यकर्ताओं को लात मारने के लिए ग्रामीणों को उकसा रहे हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.