/डीडीए की नई आवासीय योजना के फॉर्म 9 सितंबर तक मिलेंगे..

डीडीए की नई आवासीय योजना के फॉर्म 9 सितंबर तक मिलेंगे..

नई दिल्ली, राजधानी में अपना आशियाना बनाने वालों के एक बड़ी खुशखबरी. डीडीए ने अपनी हाउसिंग स्कीम 2014 लॉन्च कर दी है. इस स्कीम के तहत अलग-अलग कैटिगरी के कुल 25,034 फ्लैट्स होंगे. फॉर्म 1 से 9 सितंबर तक मिलेंगे. ड्रॉ 29 अक्टूबर को होंगे. दिल्ली के उपराज्यपाल और डीडीए के अध्यक्ष नजीब जंग की अध्यक्षता में हुई बैठक में ये फैसला लिया गया.DDA offers 25000 new flats in 2014 housing scheme

बैठक के बाद डीडीए ने फैसला किया है कि जसोला, वसंत विहार में पुराने फ्लैट हैं, जिसे मरम्मत के बाद दिया जाएगा. इनकी संख्या 811 हैं. सबसे ज्यादा 10,875 फ्लैट रोहिणी के सेक्टर 34 और 35 में होंगे. इसके बाद नरेला में सबसे ज्यादा 6,422 फ्लैट होंगे. इसके अलावा द्वारका, सिरसपुर और रोहिणी सेक्टर 4 में भी फ्लैट होंगे. इस बार ईडब्ल्यूएस के लिए बड़ी संख्या में फ्लैट हैं. ईडब्ल्यूएस फ्लैट के लिए 1.5 लाख रुपये तक का सालाना आय प्रमाण-पत्र देना होगा. बता दें कि इस बार फ्लैट्स ग्रीन बिल्डिंग नॉर्म के तहत बनाए गए हैं.

डीडीए ने ईडब्ल्यूएस फैल्ट्स की कीमत 6.7 लाख रुपये से 11 लाख के बीच रखी है. वहीं 1 बीएचके फ्लैट्स की कीमत 14.9 लाख रुपये से लेकर 22 लाख रुपये के बीच रखी गई है. इसके अलावा मोतियाखान इलाके में कुछ फ्लैट्स हैं जिनकी कीमत 1.2 करोड़ रुपये तक है.

एक कमरे वाले प्री फैब्रीकेटेड फ्लैट
द्वारका — 2360
रोहिणी — 11000
नरेला — 6400
कुल एरिया — 33 वर्ग मीटर
कवर्ड एरिया — 28 वर्ग मीटर
एक ड्राइंग रूम, एक लॉबी स्टाइल में कमरा, किचन, संयुक्त शौचालय व बाथरूम

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.