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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की तर्ज पर होते हैं बिट्स में छात्रसंघ चुनाव..

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-रमेश सर्राफ धमोरा||

झुंझुनू, राजस्थान के झुंझुनू जिले के पिलानी कस्बे के अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की बिरला तकनीकि प्रशिक्षण संस्थान (बिट्स) में छात्रसंघ चुनाव अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव की तर्ज पर होते हैं. चुनाव के दौरान यहां प्रत्याशियों को प्रचार के हो-हल्ले की जगह विद्यार्थियों के सामने स्वच्छ बहस करनी होती है. इसके बाद विद्यार्थी उनसे सवाल करते हैं. उसी के आधार पर वोटिंग होती है. जीत के बाद जुलूस तो दूर रिजल्ट भी ऑनलाइन और मोबाइल पर मैसेज के जरिए मिलता है.24-08-14 bhaskar bits यहां पर इस बार चुनाव प्रक्रिया दो अगस्त को शुरू हुई और नतीजा 20 अगस्त को आया. प्रनीथ अध्यक्ष और अजय मूंदड़ा महासचिव बने हैं. संस्थान में करीब चार हजार विद्यार्थी हैं. अध्यक्ष प्रनीथ महासचिव मून्दड़ा का कहना है कि यह चुनाव प्रक्रिया प्रणाली लीडरशिप सीखाती है. संदेश जाता है कि राजनीति में स्वच्छता आनी चाहिए.

बिट्स ने चुनाव करवाने के लिए एक चुनाव आयोग बना रखा है. इसमें सात सदस्य होते हैं. चुनाव प्रक्रिया अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव जैसी है. बिट्स में चुनाव अध्यक्ष महासचिव पद के लिए होता है. प्रत्याशी घोषणा पत्र बनाते हैं. इसके बाद आडिटोरियम में सभी विद्यार्थियों के सामने अपना घोषणा पत्र पढ़ते हुए काम के बारे में बताते हैं. प्रत्येक पद के प्रत्याशी एक-दूसरे से दो-दो प्रश्न करते हैं. बाद में विद्यार्थी भी इनसे सवाल करते हैं. यहीं से चुनाव प्रचार शुरू होता है.

चुनाव के दौरान प्रत्याशी कैंपस में मात्र एक बैनर लगा सकता है. कॉलेज समय के बाद प्रत्याशी हॉस्टल के कॉमन रूम में ही वोट मांग सकता है. चुनाव प्रचार के दौरान ना तो वह अपने समर्थको की भीड़ जुटा सकता है और ना ही नारेबाजी कर सकता है. चुनाव के बाद भी जीता हुआ प्रत्याशी ना तो जुलूस निकालता है ना ही हो-हल्ला कर सकता है ना गुलाल आदि भी नहीं उड़ा सकता है. 30 प्रतिशत से कम वोट आने पर प्रत्याशी की चुनाव के लिए जमा राशि जब्त कर ली जाती है. बिड़ला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान (बिट्स) भारतवर्ष के सबसे पुराने और अग्रणी प्रौद्योगिकी संस्थानों में से एक है . पिलानी के अलावा बिट्स के कैम्पस गोआ, हैदराबाद और दुबई में भी हैं .

यह संस्थान पूर्णत: स्ववित्तपोषित और आवासीय है. इस संस्थान को देश के सुप्रसिद्व उद्योगपति घनश्याम दास बिड़ला द्वारा 1929 में एक इंटर कॉलेज के रूप में स्थापित किया गया था. द्वितीय विश्व युद्ध के समय, भारत सरकार के रक्षा सेवाओं और उद्योग के लिए तकनीशियनों की आपूर्ति के लिए पिलानी में एक तकनीकी प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना की. 1946 में, यह बिड़ला इंजीनियरिंग कॉलेज में इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री कार्यक्रमों से परिवर्तित कर दिया गया . 1964 में बिड़ला कालेजों कला, वाणिज्य, इंजीनियरिंग, फार्मेसी और विज्ञान को बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और साइंस (बिट्स) के रूप में मिला दिया गया था. बिट्स पिलानी ने भारत  और विदेशों में में विस्तार करने के लिए 2000 के बाद से काम शुरू कर दिया. नए परिसरो दुबई में स्थापित किए गए थे, संयुक्त अरब अमीरात (2000), गोवा, भारत (2004) और हैदराबाद, भारत (2008). चौथा परिसर 2008 में जवाहरनगर में हैदराबाद, भारत हाकिमपेट एयर फोर्स स्टेशन, के पास खोला गया था.

बिट्स भी एक आभासी विश्वविद्यालय और बंगलौर में एक एक्सटेंशन सेंटर चलाता है. इन परिसरों में प्रवेश 2005 के बाद से राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा के माध्यम से एक ऑनलाइन परीक्षा ली जाती है जो 1 मई और 10 जून के बीच भारत भर के कई शहरों में आयोजित किया जाता है प्रत्येक एकल बोर्ड के उच्च माध्यमिक परीक्षाओं के सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थियों को बिट्स के किसी भी कैम्पस में सीधे प्रवेश की सुविधा है. प्रत्येक वर्ष पूरे भारतवर्ष से लगभग 25 बोर्ड टॉपर्स बिट्स में प्रवेश लेते हैं.

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