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भाजपा को लगा उपचुनावों में झटका..

By   /  August 25, 2014  /  No Comments

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चार राज्यों में विधानसभा की 18 सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे सामने आ गए हैं. बिहार में लालू और नीतीश के महागठबंधन ने बीजेपी का खेल बिगाड़ दिया है और कुल 10 सीटों में से 6 सीटों पर जीत दर्ज की है. पंजाब और मध्यप्रदेश में कांग्रेस एक-एक सीट जीतने में सफल रही तो कर्नाटक में उसे दो सीटों पर जीत मिली. बीजेपी को मध्यप्रदेश में दो, बिहार में चार, कर्नाटक में एक सीट मिली.modi_lalu_110214

बिहार में भाजपा पिछड़ी 
बिहार में मोहिउद्दीनगर विधानसभा क्षेत्र से आरजेडी के अजय कुमार बुल्गानिन विजयी हुए हैं. उन्होंने बीजेपी के राजेश कुमार सिंह को 21 हजार वोटों से हराया. राजनगर से आरजेडी के उम्मीदवार आरजेडी के रामावतार पासवान ने बीजेपी के रामप्रीत पासवान को 3448 वोटों से पटखनी दी है. वहीं भागलपुर सीट पर कांग्रेस के अजित शर्मा को जीत मिली है. जबकि नरकटियागंज से बीजेपी की रश्मि वर्मा जीती हैं.
विधानसभा उपचुनाव के नतीजे पक्ष में आने के बाद आरजेडी कार्यकर्ताओं में उत्साह है. प्रदेश आरजेडी कार्यालय में जश्न का माहौल है. बात करें दरभंगा की तो जाले सीट पर जेडीयू के ऋषि मिश्रा ने जीत दर्ज की है. कैमूर जिले के मोहनियां विधानसभा सीट से बीजेपी के निरंजन राम ने जीत दर्ज की है. इस सीट पर सीधी टक्कर बीजेपी प्रत्याशी निरंजन राम और जेडीयू प्रत्याशी चन्द्रशेखर पासवान के बीच थी. खगड़िया के परबत्ता विधानसभा सीट से जेडीयू उम्मीदवार ने जीत हासिल की. बांका से बीजेपी के रामनारायण मंडल ने जीत दर्ज की है. छपरा सीट आरजेडी को मिली.

मध्यप्रदेश में 2-1 रहा चुनावी नतीजा
मध्य प्रदेश की तीन विधानसभा सीटों के लिए हुए उपचुनाव में कांग्रेस को एक तो बीजेपी को दो सीट मिली हैं. आगर व विजयराघवगढ़ में जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार जीते, वहीं बहोरीबंद में कांग्रेस को जीत मिली. विजयराघवगढ़ सीट पर भाजपा उम्मीदवार संजय पाठक तो आगर में भाजपा के गोपाल परमार जीते. इसके अलावा बहोरीबंद विधानसभा सीट पर कांग्रेस के सौरभ सिंह जीते.

राज्य में जिन तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए, उनमें से एक स्थान कांग्रेस व दो भाजपा के कब्जे में थे. विजयराघवगढ़ से कांग्रेस विधायक संजय पाठक पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए थे. भाजपा ने उन्हें अपना अधिकृत उम्मीदवार बनाया है.

पंजाब में कांग्रेस-अकाली दल के बीच 1-1
पंजाब में विधानसभा की दो सीटों के लिए हुए उपचुनाव में एक पर कांग्रेस और दूसरे पर राज्य में सत्तारूढ़ शिरोमणि अकाली दल ने जीत हासिल की. इस चुनावी जंग में हालांकि आम चुनाव में राज्य से चार लोकसभा सीटें जीतने वाली आम आदमी पार्टी (आप) का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा. पटियाला विधानसभा क्षेत्र में जहां आप की जमानत जब्त हो गई, वहीं तलवंडी साबो में भी पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा.

पटियाला विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार व पूर्व विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर ने जीत हासिल की. उन्होंने अपने निकटम प्रतिद्वंद्वी अकाली दल के उम्मीदवार भगवान दास जुनेजा को 23,200 मतों के अंतर से हराया.

यह सीट परनीत के पति व कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के कारण रिक्त हुई थी. अमरिंदर ने अमृतसर संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव में जीत के बाद पटियाला विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था, जबकि परनीत इस बार लोकसभा का चुनाव हार गई थीं. अमरिंदर ने अमृतसर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार अरुण जेटली को हराया था.

वहीं, तलवंडी साबो विधानसभा सीट पर अकाली दल के प्रत्याशी जीत मोहिंदर सिंह ने 46,600 मतों के अंतर से यहां जीत हासिल की. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के हरमिंदर सिंह जस्सी को हराया. जीत मोहिंदर ने इस साल की शुरुआत में ही कांग्रेस छोड़ दी थी और अकाली दल का दामन थाम लिया था. अकाली दल से जुड़ने से पहले उन्होंने इस संसदीय सीट से इस्तीफा दे दिया था. 29 साल के लंबे अंतराल के बाद यह सीट अकाली दल के खाते में गई है.

कर्नाटक में 2-1 से आगे रही कांग्रेस
कर्नाटक में तीन सीटों पर उपचुनाव हुए. बेल्लारी ग्रामीण से कांग्रेस उम्मीदवार एन वाई गोपालकृष्णा 33,104 वोट से चुनाव जीत गए हैं. इस सीट पर पहले बीजेपी का कब्जा था. कांग्रेस ने यहां चिक्कोडी-सदालगा सीट पर भी कब्जा किया जबकि शिकारीपुरा सीट से बीजेपी ने जीत दर्ज की है.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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