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दागी नेताओं पर लगाम की तैयारी, गंभीर अपराध करने वाले 13 साल नहीं लड़ पाएंगे चुनाव..

By   /  August 28, 2014  /  2 Comments

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नरेंद्र मोदी सरकार गंभीर अपराध करने वालों के लिए चुनाव का रास्ता बंद करने पर विचार कर रही है. इसके लिए वह जन प्रतिनिधित्व कानून में संशोधन करने का इरादा रखती है. अंग्रेजी अखबार टाइम्‍स ऑफ इंडिया ने यह खबर दी है.parliament

अखबार के मुताबिक प्रस्तावित संशोधन के अनुसार वे लोग जो गंभीर अपराध करते हैं, वे कम से कम 13 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे. इसके लिए संसद में एक बिल लाया जाएगा. इस बिल के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति पर ऐसा कोई आरोप है, जिसमें कम से कम छह साल की सजा है तो वह 13 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएगा. अभी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. अदालत की ओर से दोषी साबित होने के बाद अभी किसी भी उम्मीदवार को चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं रहता है.

बताया जाता है कि कानून मंत्रालय ने प्रस्तावित बिल तैयार कर लिया है. अब इस पर प्रधानमंत्री मोदी को मुहर लगाना है. उसके बाद यह संसद में रखा जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने भी बुधवार को कहा कि पीएम और सीएम अपराधियों को मंत्री न बनाएं. इस बारे में एक पीआईएल भी कोर्ट में लंबित है.

इस बिल में एक प्रावधान यह है कि इस तरह के अपराध के लिए चार्जशीट चुनाव की घोषणा होने के कम से कम 180 दिन पहले दाखिल होनी चाहिए.

इसके अलावा एक प्रावधान यह भी है कि चुनाव आयोग के सामने झूठा शपथ पत्र देने वाले उम्मीदवार को अयोग्य करार दिया जा सकता है. इसके बाद उसे छह साल तक चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं रहेगा.

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  • Published: 3 years ago on August 28, 2014
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  • Last Modified: August 28, 2014 @ 12:59 pm
  • Filed Under: राजनीति

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. सरकार की मंशा सही हो सकती है, पर राजनीतिक दलों की नही. संसद में जब पारित होने का समय आयेगा तब पता चलेगा लोकसभा में हंगामा होगा, और राज्यसभा में तो मुश्किल है ही. दस तरह के संशोधन पेश होंगे तलने के लिए समिति को देने पर जोर होगा और हरचंद रुकवाने की कोशिश होगी. यह कोई सांसदों के वेतन भत्ते बढ़ाने का बिल नहीं जो पांच मिनट में निर्विरोध पास हो जाये ,दलों का असली चेहरा हम तब ही देखेंगे

  2. सरकार की मंशा सही हो सकती है, पर राजनीतिक दलों की नही. संसद में जब पारित होने का समय आयेगा तब पता चलेगा लोकसभा में हंगामा होगा, और राज्यसभा में तो मुश्किल है ही. दस तरह के संशोधन पेश होंगे तलने के लिए समिति को देने पर जोर होगा और हरचंद रुकवाने की कोशिश होगी. यह कोई सांसदों के वेतन भत्ते बढ़ाने का बिल नहीं जो पांच मिनट में निर्विरोध पास हो जाये ,दलों का असली चेहरा हम तब ही देखेंगे

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