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सरकार ने SC से कहा कि चार करोड़ Porn वेबसाइटस को ब्लॉक करना असम्भव..

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नई दिल्ली, पोर्न साइट्स पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने जवाब दिया ऐसा करने में परेशानियां आ रही है. सरकार ने कहा कि ऐसी लगभग चार करोड़ वेबसाइट हैं और जब हम एक को बंद करते हैं तो दूसरी खुल जाती है. सब पर प्रतिबंध नहीं लगा सकते हैं.’porno-2

यह जवाब केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब समय आ गया है कि ‘अगर इस तरह का कोई कानून बने, तो वह पूरी तरह लागू भी हो.’ कोर्ट ने कहा कि ‘टेक्नोलॉजी चमत्कार कर सकती है, वह विनाश भी कर सकती है. केंद्र सरकार पोर्न वेबसाइट्स, खासतौर से चाइल्ड पोर्न से जुड़ी वेबसाइट्स को ब्लॉक करने के लिए प्रभावी कदम उठाए.’ हालांकि सरकार ने कहा है कि इस पर काम जारी है.

सरकार ने कहा कि सर्वर्स विदेशों से पोर्न मुहैया करा रहे हैं इससे इन पर काबू पाना काफी मुश्किल है. इस समस्या का सामना करने के लिए कमिटी का गठन कर दिया गया है. सरकार के जवाब पर जज ने कहा कि छह हफ्ते बाद होने वाली अगली सुनवाई के दौरान वे कमिटी से अपडेट की उम्मीद करते हैं. मुख्य न्यायाधीश ने सरकार से कहा कि इंटरनेट पर प्रसारित होने वाली पोर्न सामग्री पर नियंत्रण के लिए कानून, तकनीक और शासन को एकजुट होना होगा.

गौर हो कि इस मामले में इसी साल जनवरी में इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि सरकार और कोर्ट के आदेशों के बिना पोर्न साइट्स पर प्रतिबंध लगाना उनके लिए तकनीकी और व्यावहारिक रूप से असंभव है. आपत्तिजनक कंटेट के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.

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About Author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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