/एक बेहतरीन चैनल की स्थापना करके चल पड़े शैलेश अपनी अगली मंजिल पर..

एक बेहतरीन चैनल की स्थापना करके चल पड़े शैलेश अपनी अगली मंजिल पर..

-शेष नारायण सिंह||

न्यूज़ नेशन एक बेहतरीन चैनल है. बहुत कम समय में देश के गंभीर हिंदी चैनलों में उसका शुमार होने लगा है. न्यूज़ नेशन आज जहां है उसको वहाँ तक पंहुचाने में कुशाग्रबुद्धि पत्रकार शैलेश की भूमिका सबसे ज़्यादा रही है. बहुत कम समय में इस टी वी चैनल को एक ऐसे समाचार संगठन के रूप में पहचाना जाता है जिसकी विश्वसनीयता पर किसी तरह का सवाल नहीं उठाया जा सकता. इस ख्याति को हासिल करने के लिए शैलेश ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था. पत्रकारिता के अपने तीन दशक के अनुभव का एक एक सूत्र उन्होंने न्यूज़ नेशन में डाल दिया था. चैनल की योजना के समय से ही मेरी उनसे बात होती रही थी. पत्रकारिता की दुनिया के किसी सूरमा को वे बहुत भाव नहीं देने वाले थे. टेलीविज़न में कौन किस लायक है, उनको अच्छी तरह से मालूम था. शायद ऐसा इसलिए भी था कि वे आज तक न्यूज़ चैनल में संस्थापक सदस्य के रूप में शामिल थे. ज़्यादातर चैनलों में आजकल लोग वहीं से गए हैं. देश के बहुत सारे बड़े टी वी पत्रकार शैलेश के साथ काम कर चुके हैं. उनको सब मालूम है.shailesh-kumar

लेकिन लगता है कि न्यूज़ नेशन टी वी चैनल अब बुलंदी की अपनी पारी पूरी कर चुका है. खबर है कि शैलेश ने न्यूज़ नेशन से इस्तीफा दे दिया है और अब संपादकीय की मुख्य जिम्मेदारी मालिक के परिवार के संजय कुलश्रेष्ठ संभालेगे. हालांकि अभी लीपापोती वाली खबर भी चल रही है कि सम्बन्ध बना रहेगा. यह अजीब विडम्बना है कि समाचार संगठन चलाने वाला मालिक समझने लगता है कि उसके पैसे के कारण ही सब कुछ ठीक ठाक चल रहा है. पैसा दिया जाए तो कोई भी चला लेगा. दूसरी विडम्बना यह है कि उसको सच्चाई का पता तब चलता है जब उसकी अपनी कारगुजारियों के कारण सब कुछ तबाह हो जाता है.

शैलेश ने जिस तरह न्यूज़ नेशन को बहुत अच्छा समाचार सोर्स बनाया था, उस तरीके को मैंने विजिटर्स गैलरी की अगली सीट पर बैठकर देखा है. किस तरह से भांति भांति के लोगों को जोड़ा था, मुझे मालूम है. मुझसे एक बार कहा कि कुछ अच्छे लोगों को भेजो लेकिन ध्यान रखना कि नौकरी की तलाश वाले नहीं होने चाहिए. एक अच्छे एंकर को मैंने भेजा, उसने तनखाह बहुत ज्यादा मांग लिया. उसको उम्मीद थी कि भाव ताव करके कम कर दिया जाएगा लेकिन उसका मौका ही नहीं लगा. बाद में शैलेश जी ने मुझे बताया कि जो बहुत फंटास्टिक बात करता है, वह खबरों में भी फंटास्टिक रुख अपनाएगा. जाने दो. ज़ाहिर है कि कबीरपंथी ईमानदारी से उन्होंने काम शुरू किया और निभाया. लेकिन अब फ़कीर अलविदा कह चुका है.

अब संपादकीय कार्य की जिम्मेदारी संजय कुलश्रेष्ठ ने ली है. शैलेश ने संजय जी के बारे में मुझे जो बताया था , उसके आधार पर मैं बता सकता हूँ कि संजय कुलश्रेष्ठ एक अच्छे इंसान हैं लेकिन हिंदी टेलीविज़न पत्रकारिता की भूल भुलैया में वे कहाँ जाकर किनारे लगेगें, कोई नहीं बता सकता. लेकिन वक़्त सब की परीक्षा लेता है. शैलेश तो जस की तस चदरिया रख कर चल पड़े अपने अगले किले की तरफ लेकिन न्यूज़ नेशन जैसा बेहतरीन चैनल कैसे चलेगा ,उसपर नज़र रहेगी. मेरी इच्छा है कि संजय कुलश्रेष्ठ सफल हों लेकिन मेरी इच्छा की क्या औकात है जब शैलेश के अज्म की नहीं चली.

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