कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे [email protected] पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

सांई बाबा मुस्लिम नहीं बल्कि पुष्करणा ब्राह्मण थे..

6
Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

सांई बाबा उर्फ बागमल थानवी.. सांई बाबा राजस्थान के.. फलोदी के होने मिले प्रमाण..  उनका पूरा परिवार फलोदी शहर में रहता है..

-महेश सोनी||

इसे साईं बाबा का फलौदी स्थित मकान बताया जा रहा है..

फलोदी, पूरे भारत में जहां सांई बाबा की जाति पर धार्मिक अखाड़ों में विवाद पैदा हो रहा है तथा मंदिरों से साईं बाबा की मूर्तियाँ हटाने का सिलसिला शुरू हो चुका है, वहीं, इस मामले में एक नया मोड़ आ गया है.

सांई बाबा के धर्म और जाति पर उठ रहे सवालों को लेकर बड़ी ही चौंकाने वाली बात सामने आई है.

फलोदी के एक पुष्करणा ब्राहम्ण थानवी परिवार का कहना है कि सांई बाबा का सही नाम बागमल थानवी है और उनके पिता का नाम हरिराम थानवी है. यहीं नहीं फलोदी में रहने वाले सेवानिवृत न्यायाधीश को नेपाली बाबा ने भी सांई बाबा के फलोदी के थानवी परिवार होने की बात कही थी.

Saibabaन्यायाधीश देवनारायण थानवी का कहना है कि नेपाली बाबा ने उनको इस बात की जानकारी दी थी कि सांई बाबा फलोदी के थानवी परिवार से संबंध रखते है.

गौरतलब है कि थानवी परिवार के लोगों के अनुसार तो फलोदी में उनका मकान भी है जो उनके पूर्वजों का है और आज खण्डहर में तब्दील हो गया है.

अगर सांई बाबा की पूरी जीवनी की बात फलोदी के थानवी परिवार के अनुसार कहें तो उनका कहना है कि सांई बाबा पहले से ही अपनी मां को कहते थे कि वे साधु बनेंगे और करीब 20 वर्श की आयु में वे गुमशुदा हो गए जिसके चलते उनके परिवार वाले सन् 1885-86 में मुम्बई से बागमल उर्फ सांई बाबा को ढूंढते नासिक पंहुचे. परिवार वालों ने बागमल उर्फ सांई बाबा को पहचान तो लिया लेकिन सांई बाबा ने अपने परिवार वालों को पहचानने से इनकार कर दिया .

Facebook Comments
Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं
Share.

About Author

6 Comments

  1. jagannath derasari on

    pata nahi abb toh sai baba iss time koi chhamatkar karde tab hi logo mai fir see astha lotegi kyoki kalyug mai chhamatkar ko hi namashkar hai
    \

  2. एक और फर्जी और कोरी बकवास .. 16 साल की उम्र मैं तो इन्हें शिर्डी मैं देखा गया था .. और 19 साल की उम्र मैं वापिस चंद पाटिल के साथ बारात मैं वापिस शिर्डी ए थे |

    इतने साल यह परिवार नींद मै था क्या… ?? जो आज जाग खुली है |

    बस यह सब कोशिश कर रहे है की किसी तरह हिन्दू साबित कर दे साईं को …क्युकी शिर्डी संसथान को डर सता रहा है की अब इनकी दुकान बंद होने वाली है … जब सब मंदिरों से मूर्ति हट जाएगी ..तो ऐनी वाले 5 साल मैं साईं का भूत भी लोगो के सिर से उत्तर जायेगा ..जैसे आज पुत्तापति के सत्ये साईं का उत्तर गया है .. और उसके झूठे चमत्कार न्यूज़ वालो ने दुनिया के सामने दिखा दिए …

  3. mahendra gupta on

    कई जन्म कुण्डलियाँ आएँगी अब सामने, जब विवाद शुरू हुआ है तो मंथन में कुछ किस्से, कुछ भ्रांतियां, तो कुछ सच्चाइयाँ जानने व सुनने को मिलेंगी,पुख्ता आधार किसके पास है यह कोई नहीं बताता \, शंकराचार्य का भी तुक्का है तो तथाकथित भक्तों का भी, जो है उसे ही चलने दें तो बेहतर है

  4. कई जन्म कुण्डलियाँ आएँगी अब सामने, जब विवाद शुरू हुआ है तो मंथन में कुछ किस्से, कुछ भ्रांतियां, तो कुछ सच्चाइयाँ जानने व सुनने को मिलेंगी,पुख्ता आधार किसके पास है यह कोई नहीं बताता , शंकराचार्य का भी तुक्का है तो तथाकथित भक्तों का भी, जो है उसे ही चलने दें तो बेहतर है

  5. ek aadami jisaka ki poora jiwan kaal wiwadit raha jisane kabhi apane baare me such nahi bola jisane apane ghar ke baare me kuchh nahi bataaya poore jeewan muslimo ki tarah wyawhaar kiya poore jeewan hindu parampara ke wiroodh kary kiya poore jeewan maans khaya jisane sirf dharm ko nasht kiya aaj kuchh apane ko budhdhimaan samajhane waale usako hindu banaane par tule hai aur ye to budhdhi ke diwaaliye pan ki hud hai ki ab use brahman sidhdha karane par aa gaye hai doob maro ye post dalane waale

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

%d bloggers like this: