/टीम अन्ना के शांति भूषण को देना होगा 1.33 करोड़ का जवाब, AIG स्टाम्प न्यायालय में 16 को सुनवाई

टीम अन्ना के शांति भूषण को देना होगा 1.33 करोड़ का जवाब, AIG स्टाम्प न्यायालय में 16 को सुनवाई

देरी से दिया असंतोषजनक जवाब

संतुष्ट नहीं है एआईजी न्यायालय

गिर सकती है शांति भूषण पर गाज

 

टीम अन्ना के खास सदस्य शांति भूषण और उनका परिवार एक करोड़ रुपये से ऊपर के स्टाम्प चोरी मामले में घिरता नजर आ रहा है। अभी तक  पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण के पक्ष का हर दांव उल्टा पड़ता दिख रहा है। फिलहाल, स्टाम्प चोरी के उक्त प्रकरण की सुनवाई 16 सितम्बर 2011 को एआईजी स्टाम्प न्यायालय में होनी है। पूर्व कानून मंत्री के अधिवक्ता द्वारा पिछली सुवनाई की तिथि 17 अगस्त 2011 को जो जवाब प्रस्तुत किये गये उससे एआईजी स्टाम्प न्यायालय संतुष्ट नहीं है।

उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक पूर्व कानून मंत्री का पक्ष पढऩे के बाद साफ हो गया है कि उनका जवाब न तो कहीं से संतोषजनक है और न ही इसके आधार पर मामला कहीं से हल्का होता दिख रहा है। कानूनविदों का मानना है कि कोई बाजीगरी नहीं दिखायी गयी तो शांतिभूषण पर गाज गिरनी तय है। इस प्रकरण में अभी तक पूर्व केन्द्रीय कानून मंत्री की ओर से जवाब दाखिल करने में काफी वक्त लगा है और स्टाम्प न्यायालय ने भी उन्हें पूरा मौका दिया है।

कानूनी दाव-पेंच में जल्द किसी कार्रवाई की उम्मीद करना बेमानी होगी फिर भी इतना तो तय है कि बिना स्टाम्प शुल्क के करोड़ों की जिस संपत्ति को पाने की कोशिश की गयी थी उसमें पूर्व कानून मंत्री के पक्ष को बिना मोटी रकम खर्च किये राहत मिलने वाली नहीं है। विदित हो कि जन लोकपाल को लेकर छिड़ी राष्ट्रव्यापी लड़ाई में टीम अन्ना की महत्वपूर्ण कड़ी बने पूर्व केन्द्रीय कानून मंत्री शांति भूषण, जनपद स्तर पर लाखों के स्टाम्प चोरी मामले में सुनवाई से भागते फिर रहे हैं। स्थिति यह है कि आधा दर्जन बार सुनवाई की तिथि में परिवर्तन के बाद भी अभी तक इस प्रकरण का कोई सार्थक परिणाम सामने नहीं आया है।

ज्ञातव्य हो कि 1.33 करोड़ के स्टाम्प चोरी प्रकरण में 20 मई 2011 को एआईजी स्टाम्प केपी पांडेय ने विभागीय टीम के साथ सिविल लाइंस के एल्गिन रोड स्थित शांति भूषण के बंगले का स्थलीय निरीक्षण किया था। कवर्ड एरिया का जायजा लेने के दौरान टीम को मौके पर 662 वर्गमीटर अतिरिक्त क्षेत्रफल मिला था जबकि रजिस्ट्री के लिए जो कागजात स्टाम्प एवं निबंधन महकमे को मुहैया कराये गये हैं उसमें कवर्ड एरिया 970 वर्गमीटर ही दर्शाया गया है। इस तरह अब 1632 वर्गमीटर के हिसाब से स्टाम्प की गणना की गयी है।

इस पर शांति भूषण के अधिवक्ता संगम लाल ने जवाब देने के लिए समय मांगा था, साथ ही स्थलीय निरीक्षण आख्या की एक प्रति भी मांगी थी जिसे एआईजी स्टाम्प द्वारा मुहैया कराया जा चुका है। 17 अगस्त 2011 को हुई सुनवाई पर पूर्व कानून मंत्री की ओर से पूरे मामले में जवाब भी दिया जा चुका है लेकिन एआईजी स्टाम्प न्यायालय जवाब से संतुष्टï नहीं है। इस संबंध में पूछे जाने पर एआईजी स्टाम्प केपी पाण्डेय ने कहा कि उनकी ओर से 16 सितम्बर के बाद ही कोई बयान दिया जाएगा। स्टाम्प एवं निबंधन महकमे के मुताबिक स्टाम्प चोरी के इस मामले में पहली बार 5 फरवरी 2011 को नोटिस जारी की गयी थी। सूत्रों के मुताबिक अगर सबकुछ साफ-सुथरे व नियम मुताबिक चला तो पूर्व कानून मंत्री को मोटी रकम चुकानी पड़ेगी। इस प्रकरण में आरसी भी जारी हो सकती है।

 

(इलाहाबाद से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए मेल पर आधारित)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.