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मोदी-चिनफिंग की मुलाकात अहमदाबाद में..

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नई दिल्ली,  चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग भारत दौरे पर कल आ रहे हैं, लेकिन उनका ये दौरा कई मायने में खास है. पहली बार कोई विदेशी राष्ट्रपति दिल्ली की बजाय अहमदाबाद में लैंड कर रहा है. यही नहीं पहली बार दिल्ली की जगह अहमदाबाद में समझौतों पर होंगे दस्तखत. चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के स्वागत में अहमदाबाद सज रहा है.chinpm

17 सितंबर को ही नरेंद्र मोदी का जन्मदिन भी है इसलिए इस शहर की खुशी दोगुनी है. चिनफिंग के आने से पहले नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया है कि 17 तारीख को मैं अहमदाबाद में राष्ट्रपति शी चिनफिंग के स्वागत का इंतजार कर रहा हूं. मुझे भरोसा है कि उनकी यात्रा भारत-चीन रिश्तों को और मजबूत करेगी. बौद्ध धर्म दोनों देशों के बीच गहरे संबंधों का आधार है. गुजरात में भी बौद्ध धर्म के प्रतीक मौजूद हैं. वडनगर में, मैं जहां पैदा हुआ वहां भी एक बौद्ध मंदिर था.
जाहिर है, जैसे जापान जाने से पहले नरेंद्र मोदी ने जापानी भाषा में ट्वीट किया. वैसे ही चीन को लेकर अब मोदी अपने अंदाज में माहौल सकारात्मक बनाने की कोशिश कर रहे हैं. इसकी जरूरत इसलिए भी है क्योंकि हाल के दिनों में लद्दाख में चीनी घुसपैठ की खबरें फिर सुर्खियों में हैं. नेटवर्क 18 से बातचीत में खुद लद्दाख के बीजेपी सांसद थुपस्तान छेवांग ने आरोप लगाया कि चीन एक साजिश के तहत बिना गोली चलाए भारतीय जमीन पर कब्जा करता जा रहा है और इस मुद्दे को चीनी राष्ट्रपति के साथ उठाए जाने की जरुरत है.

चीनी घुसपैठ का ये मसला बीजेपी सांसद पिछले दिनों हुई स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में भी उठा चुके हैं. कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं. ऐसे में सरकार की सफाई है कि घुसपैठ की किसी का कड़ाई से मुकाबला किया जा रहा है.

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About Author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. kahin gujraat ko hindustaan se alag karane ki sajis to nahi ho rahi nahi to jo kaam delhi mei hona chahiye tha wo ahemdabad mein kyon ho raha hai ]

  2. चीन व पाकिस्तान दोनों ही विश्वसनीय मित्र नहीं है,इसलिए इनसे जो भी समझोते किये जाएँ उनमें सावधानी की जरुरत है समझोते से पहले सीमा विवादों पर भी दो टूक स्पष्ट बात करनी चाहिए

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