कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे [email protected] पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

सादगी है तो साख है..

2
Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

-दीपक शर्मा||
जिन चेहरों पर दाग है वो आपकी स्क्रीन पर खबर का चेहरा कैसे हो सकतें हैं ? वो किस ज़बान से खबर पढते हैं और आप किन आँखों से खबर देखते हैं ? हर शाम ढलते ही जब प्राईम टाईम ख़बरें स्क्रीन पर उतरती हैं तो कुछ चेहरे झूठ को सच में बदलने का छल करते हैं.punya prasoon

ये वही चेहरे हैं जो ताज मान सिंह से लेकर ली मेरीडियन के लाल सोफों पर बैठकर दिन में कारपोरेट की दलाली खाते हैं. और शाम होते ही यही चेहरे आपको छल रहे होते हैं. जी हाँ वही चेहरे जो खबर की ट्रेडिंग करते हैं या ब्लैकमेलिंग.

ravish kumarकुछ लोगों को बात हज़म नही होगी लेकिन सच यह भी है कि जहाँ दाग दार चेहरे हैं वहीँ एक नाम पुण्य प्रसून वाजपई का भी है. एक साज़िश उनके साथ ज़रूर हुई पर उनका फक्कडपन उन्हें बचा ले गया. लेकिन मैं यहाँ कुछ और बात कर रहा हूँ . थोड़ी प्राईवेट, जो खुद प्रसून को रास नही आएगी.

दो दिन से प्रसून दफ्तर नही आ रहे थे. उन्होंने ना आने का कारण किसी को नही बताया. बाद में मुझे मालूम हुआ कि किसी मजबूर के इलाज़ में उन्होंने दो दिन, दो रातें अपने घर से कुछ दूर एक अस्पताल के आई सी यु में गुजारी. मैंने अपने गरीबां झाँक कर देखा और पाया कि शायद मुझे अभी बहुत कुछ सीखना है.

मित्रों, प्रसून का जो ग्लेमर स्क्रीन पर दीखता है वो खुद उस ग्लैमर से मीलों दूर है. वे स्टार हैं लेकिन ज़मीन के. एक ऐसे स्टार जो गाजियाबाद के एक कोने पर एक छोटी सी सोसाइटी के एक सादे से फ्लेट में रहते हैं. एक पुरानी गाडी है और सेन्ट्रल स्कूल में पढ़ रहे बच्चे. सब्जी भी लाते हैं परचून भी. खुद चाय बनाकर मेहमानबाजी का उनका अंदाज़ मेट्रो के दिखावे से परे है. शायद शोहरत प्रसून की सादगी पर हावी नही हुई और अब यही उनकी यूएसपी है.
दलाल चेहरों की इस भीड़ में एक रविश कुमार भी हैं. जीवन समाजवादी और सोच सौ फीसदी हिन्दुस्तानी. मैं इन दोनों एंकरों को अर्नब से ऊपर रखता हूँ. मैं चाहता हूँ कि इनका कद ज़माने में और बड़े. इतना बढ़े कि मीडिया के दागदार चेहरे इनकी परछाई में ढके जा सकें. ये दोनों एंकरों से बढ़ कर कहीं ज्यादा बड़े पत्रकार हैं. एक बड़ा मौका इनको एक साथ दीजिये, ये टेलीविजन बदल सकते हैं.

(टीवी पत्रकार दीपक शर्मा की फेसबुक वाल से)

Facebook Comments
Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं
Share.

About Author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. punya prasoon nke baare mein to mai kuchh nahi kah sakta kyon ki unake programs ko jyada maine dekha nahi hai par raveesh kumar ke baare mein aap ki soch galat hai aap unake dwara kiye gaye programs ko dhyaan se dekhiye aap ko har program mein saaf pata chala chalega ki chabi kahan se ghoom rahi hai aur rahi baat tv media ki to koi bhi chainal saaf aur poori dibate kisi bhi mudde par sahi nahi karta usaka apana agenda hota hao aur usi ke tahat wo programs banate hai aur bolane waale ko waise hi manupulate karna chahte hai is liye kisi se media ke baare mein imaandari ki ummid bekaar hai haan wyaktigat taur par aadhmi achchha ho sakta hai usase kuchh bhi nahi hota

  2. punya prasoon nke baare mein to mai kuchh nahi kah sakta kyon ki unake programs ko jyada maine dekha nahi hai par raveesh kumar ke baare mein aap ki soch galat hai aap unake dwara kiye gaye programs ko dhyaan se dekhiye aap ko har program mein saaf pata chala chalega ki chabi kahan se ghoom rahi hai aur rahi baat tv media ki to koi bhi chainal saaf aur poori dibate kisi bhi mudde par sahi nahi karta usaka apana agenda hota hao aur usi ke tahat wo programs banate hai aur bolane waale ko waise hi manupulate karna chahte hai is liye kisi se media ke baare mein imaandari ki ummid bekaar hai haan wyaktigat taur par aadhmi achchha ho sakta hai usase kuchh bhi nahi hota

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

%d bloggers like this: