/जब रंज दिया बुत्तों ने तो खुदा याद आया..

जब रंज दिया बुत्तों ने तो खुदा याद आया..

-पवन कुमार बंसल||
नई दिल्ली. पुरानी कहावत है कि जब रंज दिया बुत्तों ने तो खुदा याद आया, भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर सही बैठ रही है. जब-जब चुनाव नजदीक आते हैं तो उन्हें किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह याद आ जाते हैं.charan-singh

भूपेद्र सिंह हुड्डा ने केंद्रीय मंत्री वैंकया नायडू को पत्र लिखा है. अपने पत्र में उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी अजीत सिंह से मकान खाली करवाए जाने और आवास के बिजली पानी कनेक्शन काटे जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई दिल्ली के तुगलक रोड़ पर स्थित बंगला नम्बर 12 के साथ देश भर के लाखों किसानों और कामगारों की भावनाएं जुड़ी हैं. अपने पत्र में हुड्डा ने इस बंगले के इतिहास के बारे में बताते हुए लिखा कि यह बंगला वर्श 1978 में भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व0 चौधरी चरण सिंह जी को अलाट हुआ था. वे न केवल लम्बे समय तक यहीं पर रहे बल्कि उन्होंने किसानों की गतिविधियों को भी यहीं से संचालित किया.

उन्होंने कहा कि यह बंगला किसान ट्रस्ट की गतिविधियों का मुख्य केंद्र रहा है. इस ट्रस्ट की स्थापना भारत के किसानों के कल्याण के लिएचौधरी चरण सिंह ने की थी. अब जाटों के वोट बटोरने के लिए हुड्डा को चरण सिंह याद आ गए. चौधरी चरण सिंह का स्टैच्यू भूपेंद्र हुड्डा के दोस्त रोहतक के वकील योगेंद्र दहिया के घर करीब दस वर्ष तक पड़ा रहा लेकिन हुड्डा ने बार-बार कहने पर भी रोहतक में स्टैच्यू लगाने के लिए कोई जगह नहीं दी जबकि अपने पिता रणबीर सिंह के स्टैच्यू कई जगह लगवा दिए. जब चुनाव नजदीक आए तो चरण सिंह का स्टैच्यु रोहतक में स्थित एग्रो माल में लगवा दिया. इससे पहले भी वे चरण सिंह की जयंती पर गए थे. दस साल के शासन में हुड्डा ने कभी चौधरी चरण सिंह को याद तक नहीं किया.

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