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भोरमदेव खतरे में..

By   /  September 19, 2014  /  1 Comment

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-प्रतीक चौहान||

रायपुर, यह खबर जरुर चौंकाने वाली लेकिन सच है. भोरमदेव मंदिर में भारतीय पुरात्व नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है इसकी वजह से यह कहना गलत नहीं होगा कि छत्तीसगढ़ का खजुराहो मंदिर खतरे में है. इस मंदिर में भौतिक सुख सुविधा के नाम पर ऐतिहासिक धरोहर से छेड़छाड की जा रही है. इसकी शिकायत छत्तीसगढ़ संस्कृति एंव पुरात्व विभाग को मिली है. संस्कृति एवं पुरात्व विभाग ने मामले में कार्रवाई शुरु कर दी है. विभाग ने जिला पुरात्व विभाग और कलेक्टर को इस मामले में कार्रवाई करने को कहा गया है.IMG_1966

भोरमदेव मंदिर कबीरधाम जिले से 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है इसे छत्तीसगढ़ का खजुराहो कहा जाता. क्योंकि मंदिर के बाहरी दिवारों पर बनाई गई मिथुन मुर्तियां और भव्य वास्तुकला मध्यप्रदेश के खजुराहों की तरह है. फणी नांगवंशी शासन काल में ग्यारहवीं शताब्दी में इस मंदिर का निर्माण कराया गया था. लेकिन आज अतभूद मंदिर आज खतरे में है. मंदिर में भौतिक सुविधा बढाने के नाम पर एयर कंडिश्नर लगा दिया गया . वो भी मंदिर के गर्भगृह के अंदर.

मंदिर में एसी लगाने का काम स्थानीय प्रशासन की ओर से किया गया है. खास बात यह कि इसकी जानकारी मंदिर समिति को भी नहीं थी. वहीं संस्कृति और पुरात्व विभाग से भी यह पूछा नहीं गया था. अब सवाल यह उठ रहे है कि गर्भगृह के भीतर एसी की जरुरत किसे है भोलेनाथ को या फिर मंदिर के पुजारी को या फिर यहां आनेवाले वीवीआईपी जैसे खास तबके को. चुंकि भोलेनाथ सुबह-शाम तक कभी जल से, तो कभी दुध से, कभी दही से, कभी घी और शहद से नहाते ही रहते है. और तो और चौबीस घंटे उन पर जल की बूंदे भी गिरते ही रहती है उन्हें गर्मी का एहसास हो ऐसा तो है नहीं. मतलब किसी खास तबके कहने पर नियमों से परे जाकर वहां एसी लगवाई गई है.

स्वाभाविक तौर पर हजारों साल पुराने इस मंदिर की दीवारे आज कमजोर हो चली है . वर्तमान स्थिति अब और खराब हो चुकी है . लाजिमी है कि एसी लगाने के लिए दीवारों में मशीन से सुराख किए गए है. दीवारों में सुराख का असर मंदिर के कमजोर हिस्सों में होना लाजिमी है. मंदिर के बीच के हिस्सा में तो 2 इंच तक गेप आ चुका है . जिसे दरार कहना ज्यादा उचित होगा . वहीं कई हिस्सों से पानी का रिसाव में दीवारों से होने लगा है . ऐसे में बजाए संरक्षण के उससे खिलावड़ उचित नहीं है .IMG_1973

संस्कृति एवं पुरात्व विभाग के संचालक राकेश चतुर्वेदी ने कहा ऐसी शिकायते भोरमदेव मंदिर को लेकर मिली है. वहां पर पुरातत्व नियमों का उल्लंघन हुआ है. इस मामले में वहां के कलेक्टर और जिला पुरातत्व विभाग को कार्रवाई करने को कहा गया है. लेकिन कलेक्टर कोई कार्रवाई नहीं करने वाले क्योंकि उल्लंघन की इजाजत जो उन्हीं के प्रशासन से ही मिली है. वैसे उनका कहना है कि मंदिर में एसी लगाने से मंदिर को कोई खतरा नहीं है. जबकि मंदिर समिति के सदस्य दीपक मिश्रा का कहना है मंदिर में इस तरह की मनमानी चल रही है इसकी जानकारी समिति को भी नहीं थी. समिति को भी तब पता चला जब वहां स्थानीय प्रशासन की ओर से एसी लगवा दिया गया . उन्होंने इसे ऐतिहासिक मंदिर के साथ खिलवाड़ बताया है.

वैसे छत्तीसगढ़ के भीतर में तकरीबन 58 ऐसे ऐतिहासिक धरोहर है. बड़ा सवाल यह भी है कि हजारों साल पुरानी विरासत से इस तरह का छेड़छाड़ क्यों की जा रही है. जहां एक ओर पुरात्विक महत्व की इमारतों के संरक्षण का प्रयास चल रहा है, वहां भौतिक सुविधा के नाम पर खिलवाड़ होना कहां तक सही है इसका जबाव तो प्रशासन के पास ही है. लेकिन यदि अगर मामले में कलेक्टर की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई तो पुरातत्व विभाग आगे क्या कदम उ,ठाता है यह देखने वाली बात होगी.

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  • Published: 3 years ago on September 19, 2014
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  • Last Modified: September 19, 2014 @ 1:46 pm
  • Filed Under: देश, धर्म

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. mahendra gupta says:

    पुरा सम्पदा की कमोबेश सभी राज्यों में यही हाल है ,इन सरकारों को अपने नेताओं के बुत लगाने से ही फुर्सत नहीं मिलती, हालाँकि बाद में वे भी कौए व कबूतरों के विश्राम व शौच निवृति के काम ही आते हैं

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