/राजस्थान में अब न्याय मांगने वालों को हवालात की सैर करनी होगी..

राजस्थान में अब न्याय मांगने वालों को हवालात की सैर करनी होगी..

इसी सितम्बर की तेईस तारीख को प्रसिद्ध मानवतावादी कार्यकर्ता हिमांशु कुमार ने अपनी फेसबुक वाल पर एक नोट डाला था और उसमे बताया था कि राजस्थान के सीकर जिले में एक खनन माफिया ने पहाड़ी की तलहटी में एक फौजी किसान के खेत को पहले तो नष्ट कर दिया, फिर उस खेत से उसे बेदखल भी कर दिया. यही नहीं स्थानीय पुलिस प्रशासन भी इस मामले में उस खाना माफिया का सरपरस्त बना हुआ है. हिमांशु कुमार के फेसबुक पर ये नोट डालने के बाद स्थानीय पुलिस ने उस किसान परिवार के खिलाफ ही मुकद्दमा दर्ज़ क्र लिया. हिमांशु कुमार का फेसबुक पर डाला गया नोट कुछ इस प्रकार है..

राजस्थान के सीकर जिले के मीरा की नांगल नामक गाँव में सेना का एक जवान रहता था . उसका नाम लाल चन्द्र था . लाल चन्द्र के दो भाई और भी थे . लाल चन्द्र के पिता बूढ़े थे . पिता घर पर रह कर गाय भैंसों की और घर की देखभाल करते थे.

डेमो तस्वीर
डेमो तस्वीर

दोनों भाई अपने छोटे से खेत में काम करते थे . खेत अरावली पर्वत श्रंखला की एक पहाड़ी की तलहटी में बना हुआ था . खेत में एक कुआं भी था . जिसके पानी से खेत में सिंचाई की जाती थी . लाल चन्द्र सेना की राष्ट्रीय राइफल्स की बासठवीं बटालियन में नायक के पद पर था. लाल चन्द्र सेना की नौकरी में कभी कश्मीर के लाल चौक पर तो कभी मणिपुर में सीमा पर अफसरों का हुकुम बजा रहा था .

खेती बाड़ी ,पशुओं का दूध और लाल चन्द्र की तनख्वाह से घर में सब कुछ ठीक चल रहा था . लेकिन तभी इस सुख भरी कहानी में एक दुःख का मोड़ आ गया .
लाल चन्द्र के खेत के पास सुंदर सी पहाड़ी थी . पड़ोसी राज्य हरियाणा से कुछ पैसे वाले लोग इन पहाड़ियों से पत्थर खोदने लगे . पत्थर खोद कर बेचने वाले इन सेठों के पास गुंडों की पूरी फौज भी थी . ये लोग पत्थर निकाल कर दिल्ली में मकान बनाने के लिए बेचते थे . भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अरावली पहाड़ी में पत्थर खोदने पर रोक लगाई हुई थी . लेकिन इन सेठों के पास पैसा था इसलिए पुलिस और सरकारी अफसर इन्हें रोकते नहीं थे .

सेठ ने पहाड़ी में बारूद बिछा कर धमाके करने शुरू कर दिए. पत्थर और धूल से आसमान भर गया . लाल चन्द्र के परिवार के खेतों की फसल पत्थर के टुकडों और धमाके की धूल से पट गयी . परिवार के खाने का अनाज और गाय भैंसों के लिए चारा भी नहीं बचा. घर भर के सामने भूखे मरने की हालत आ गई . बहुओं और बच्चों की भूख बूढ़े पिता से देखी नहीं जा रही थी .

लाल चन्द्र के पिता ने राजधानी में जाकर कलेक्टर के दफ्तर में शिकायत करी . लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई . थक हार कर लाल चन्द्र के पिता ने लाल चन्द्र को चिट्ठी लिख कर इस नयी मुसीबत के बारे में बताया . लाल चन्द्र ने अपने अफसरों को पिता की चिट्ठी दिखाई. लाल चन्द्र के सेना के साहब अच्छे दिल के थे . उन्होंने लाल चन्द्र से सारी जानकारी पूछी और लाल चन्द्र के जिले के पुलिस कप्तान को एक चिट्ठी लिख कर लाल चन्द्र के परिवार को परेशान करने वालों पर कार्यवाही करने के लिए लिखा .
पत्थर खोदने वाला सेठ तो जिले की पुलिस को महीने के महीने टाइम से हफ्ता देता था . इसलिए पुलिस के कप्तान साहब से शिकायत करने के बाद बदमाश सेठ और उसके गुंडों पर कार्यवाही करने की बजाय पुलिस ने शिकायत करने वाले लाल चन्द्र के पिता और भाइयों को ही पीटने के लिए गुंडों को लाल चन्द्र के घर धावा बोलने के लिए बता दिया .

सेठ के गुंडों ने आकर लाल चन्द्र के भाइयों और पिता को धमकाया कि अपनी ज़मीन और जानवर लेकर इस गाँव से भाग जाओ नहीं तो पूरे परिवार को जान से मार डालेंगे .
परिवार की मुसीबतें बढ़ती जा रही थीं . इधर फौज में लाल चन्द्र की महीने भर छुट्टी भी मंज़ूर हो गयी थी . लाल चन्द्र अपने गाँव आया . लाल चन्द्र ने अपने भाइयों से कहा चलो खेत पर चलते हैं . अपनी गाय भैंसें लेकर तीनों भाई खेत पर पहुंचे

पत्थर खोदने वाले सेठ के गुंडों ने पत्थर पीसने वाली अपनी मशीने लाकर लाल चन्द्र के खेतों में खड़ी कर दीं . इसके बाद सेठ ने चिल्ला कर कहा कि खेत छोड़ कर भाग जाओ हम बारूद में आग लगाने वाले हैं . लाल चन्द्र ने कहा कि हम अपने खेत छोड़ कर नहीं जायेंगे .
सेठ ने कहा अच्छा तो तू हमें फौज का रौब का दिखा रहा है ? तुम सब को अभी मज़ा चखाता हूँ .

सेठ ने अपने कुछ गुंडों को इशारा किया सेठ के गुंडे एक जीप में बैठ कर चले गए . कुछ देर बाद सेठ के गुंडे एक जीप भर कर पुलिस के सिपाही और नज़दीक के पाटन थाने से एक नायब दरोगा को साथ में लेकर वापिस लाल चन्द्र के खेत में पहुँच गए .

पुलिस ने लाल चन्द्र और उसके भाइयों व छोटे भाई की पत्नी को माँ बहन की गालियाँ देनी शुरू कर दीं . सिपाहियों ने लाल चन्द्र और उसके भाइयों और भाभी के बाल पकड़ कर खेत से बाहर घसीटना शुरू कर दिया .

पुलिस ने सेठ के गुंडों से कहा कि इस बदमाश फौज़ी लाल चन्द्र की गाय भैंसों को पकड़ कर आप लोग अपने आफिस में रख लो .

लाल चन्द्र के दोनों भाइयों और उसकी भाभी को पुलिस ने जीप में डाल दिया और सेठ जी से कहा कि अब आप आराम से बारूद में ब्लास्टिंग करिये सेठ साहब .
पुलिस ने लाल चन्द्र को थाने में धमकाया . पुलिस ने लाल चन्द्र की भाभी सुनीता पर सेठ के आफिस में घुस कर एक लाख रूपये फिरौती मांगने का केस बना दिया .
आप सोच रहे होंगे मैं आप सब को कोई पुरानी काल्पनिक कहानी सुना रहा हूँ .

लेकिन यह घटना कल यानी २२ सितम्बर को राजस्थान के सीकर जिले के पाटन थाने के मीरा की नांगल गाँव में घटित हुई है .
मुझे लाल चन्द्र और अवैध माइनिंग माफिया के खिलाफ़ संघर्ष करने वाले हमारे साथी कैलाश मीणा का फोन आया . उन्होंने मुझे इस घटना की सारी जानकारी दी .
लाल चन्द्र को पत्थर खोदने वाले सेठ और उसके गुंडों ने धमकी दी है कि जल्द से जल्द गाँव छोड़ कर भाग जाओ नहीं तो तुझे जान से मार देंगे और तेरे घर से औरतों को उठा कर ले जायेंगे .

लाल चन्द्र ने कहा हिमांशु जी मेरी मदद कीजिये .
मुझे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा कि इस परिवार को भूखे मरने से कैसे बचाया जा सकता है ?
आप ही बताइये लाल चन्द्र की मदद कैसे करी जा सकती है ?

इसके बाद हिमांशु कुमार ने अपनी फेसबुक वाल पर फिर से आज एक नोट लिखा है, जो कि इस प्रकार है…

राजस्थान के सीकर जिले के मीरा की नांगल नाम के गाँव के सेना के जवान के खेतों में पत्थर खोद कर बेचने वाले सेठों के गुंडों की हरकतों के बारे में मैंने परसों लिखा था .
उस पर कई साथियों ने मीडिया तक बात पहुंचाने की सलाह दी .
मेरी मित्र सूची में कई मीडिया के साथी हैं ज़ाहिर है उन्होंने भी इसे पढ़ा होगा .
किसी ने सुप्रीम कोर्ट तक तो किसी ने प्रधानमंत्री तक यह बात पहुंचाने की सलाह दी .
तो जनाब आज की ताज़ा खबर यह है कि अभी कुछ देर पहले सैनिक लाल चन्द्र जी का फोन मेरे पास आया था .
लाल चन्द्र ने बताया है कि पाटन थाने की पूरी पुलिस फ़ोर्स सेठ जी के कहने से लाल चन्द्र और उसके दोनों भाई भाभी और बूढ़े पिता को गिरफ्तार करने के लिए खोज रही है . कल सारी रात पुलिस गाँव में लाल चन्द्र के परिवार की तलाश में घूमती रही है .
लाल चन्द्र ने बताया कि मेरे परिवार के सभी सदस्य फरार हो चुके हैं . घर पर गाय भैंसे भूखी खडी हैं .
आइये आइये और बताइये भारत का लोकतंत्र , भारत का न्यायतंत्र , भारत की सेना , भारत की मीडिया , भारत का शेर प्रधानमंत्री इस सेना के सिपाही के परिवार की जान कैसे बचा सकते हैं ?
आओ भक्तों तुम्हारे अच्छे दिनों के लोकतंत्र की परीक्षा चालू है .

यहाँ देखने की बात ये है कि क्या अब राजस्थान में न्याय की मांग करने वालों को न्याय देने की बजाय हवालात में ठूंस दिया जाएगा?

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