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बाड़मेर ग्लव्ज़ खरीद प्रकरण में एक करोड़ का घोटाला पौने दो लाख की वसूली, मामले पर पर्दा..

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-चंदनसिंह भाटी||

बाड़मेर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग बाड़मेर में पिछले लंबे अरसे से घोटालो का दौर चल रहा है, इसी क्रम में विभाग की आर एच एम  योजना में वर्ष 2011 -2012 में तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी अज़मल हुसैन के समय एक करोड़ के ग्लव्ज़ खरीद में हुए भरष्टाचार की निदेशालय स्तर की जांच पर विभागीय अधिकारियो ने इस काण्ड से जुड़े कार्मिको को बचाने के चक्कर में मामले पर लीपा पोती कर महज एक लाख पंचानवे हज़ार की वसूली कर प्रकरण को खत्म करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भिजवाने के समाचार है. जबकि पूरे मामले में दोषी रहे मुख्य चिकित्सा अधिकारी सहित कई कार्मिको को सीधे सीधे बचाया जा रहा है.med03

19082011(021) (1)लगभग दो वर्ष पूर्व विभाग द्वारा इन आर एच एम योजना के तहत एक करोड़ रुपये के हाथो के  ग्लव्ज़ खरीद की निविदाएं आमंत्रित की गयी थी, जिसमे सफल निविदा करता द्वारा ग्लव्ज़ आपूर्ति करने में असमर्थता जताने के बाद उसकी धरोहर राशि जब्त कर ली गयी. इसके बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी को नियमानुसार दूसरे कम दर वाली फर्म को आपूर्ति के लिए अामंत्रित किया जाना था मगर कार्मिको की मिली भगत से मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने तीसरे नंबर की दर वाली फर्म से अनुबंध कर उसे आपूर्ति का आदेश दे दिया, इधर नियम विरुद्ध तीसरी फर्म को आदेश देने की शिकायत उच्च स्तर पर विभागीय अधिकारियो गयी, जिसकी करीब डेढ़ साल से जांच चल रही थी.

कुछ रोज पर इस प्रकरण की जांच के लिए गठित कमिटी ने ग्लव्ज़ खरीद में अनियमितता व् भ्रष्टाचार को मानते हुए तीसरे क्रम की फर्म से करीब एक लाख पिचनवे हज़ार रुपये की वसूली के आदेश दिए साथ ही तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी को नोटिस जारी करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया.

दोषी कार्मिको का बचाव. .

इस पूरे प्रकरण में शामिल कार्मिको को पूर्ण रूप से बचाया गया. जबकि निविदा में शामिल कार्मिको और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को इस प्रकरण में दोषी माना गया था मगर दूसरे नंबर की फर्म और तीसरे नंबर की फर्म के बीच दरो के अंतर को वसूली योग्य वसूली के आदेश दिए, यह वसूली किससे की जानी थी इसे स्पष्ट नहीं किया गया. तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने प्रकरण से बचने के लिए खुद ने यह राशि जमा करा दी.

प्रश्न यह उठता है कि जांच में जब भ्रष्टाचार होना मान लिया गया और उसकी वसूली निकाल ली गई तो कार्मिको पर दोष तय क्यों नहीं किये. इन कार्मिको की अनियमितता में भागीदारी थी. इसके बावजूद इन कार्मिको के खिलाफ कोई कार्यवाही प्रस्तावित नहीं कर तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी को नोटिस जारी करना प्रस्तावित किया. एक करोड़ का घोटाले में महज एक लाख पिचयानवे हज़ार रुपये की वसूली के प्रस्ताव से एक बार फिर मुख्य चिकित्सा विभाग और इन आर एच एम संदेह के घेरे में आ गया,

उच्च स्तरीय जांच. .

इस प्रकरण की पुनः जांच निदेशालय द्वारा निष्पक्ष प्रशासनिक अधिकारी से कराई जानी चाहिए ताकि पूरे मामले का खुलासा होने के साथ दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही हो सके.

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