Loading...
You are here:  Home  >  दुनियां  >  देश  >  Current Article

रतलाम नगर निगम के महापौर के सहयोगी और सलाहकारों ने किया एक अरब से ज्यादा का घोटाला..

By   /  October 19, 2014  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

रतलाम नगर निगम बनाम नरक निगम.. अबतक की सर्वाधिक भ्रष्ट नगर निगम,भाजपा की स्थिति होगी दयनीय..

-महेश शर्मा||

नगर निगम का काम नगर के लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का है. रतलाम शहर के लोग नारकीय पीड़ा भोग रहे हैं और नगर निगम नीरो के मानिंद चैन की बंसी बजा रही है. नगर निगम का कार्यकाल समाप्त होने में महज कुछ ही दिन शेष बचे हैं. इस नगर निगम के कार्यकाल में नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाई हैं जो निश्चित तौर पर निंदनीय ही मानी जाएगी.trap

निगम महापौर डागा के कार्यकाल में नगर में साफ पानी ही लोगों को मुहैया नहीं हो पाया है. मच्छरों की फौज के हमले से न जाने कितने बीमार हुए. आवारा मवेशियों से न जाने कितने परेशान हुए. आवारा घूमते सुअरों ने न जाने कितने घरों में उत्पात मचाया है. आवारा कुत्तों ने न जाने कितने लोगों को घायल किया है.

आवारा मवेशियों से टकराकर न जाने कितने वाहन चालक घायल हुए हैं. पर नगर निगम के कानों में जूं भी नहीं रेंगी. ऐसा नहीं कि जिला प्रशासन ने इसकी चिंता नहीं की हो. जिला प्रशासन के द्वारा लगातार इस संबंध में चेतावनियां जारी की जाती रही हैं पर नगर निगम के अडिय़ल रवैए के कारण पता नहीं क्यों नगर निगम द्वारा जिला कलेक्टर की चेतावनियों को भी दरकिनार कर दिया जाता रहा है. शहर की नालियां गंदगी से बजबजा रही हैं. पीने को साफ पानी मुहैया नहीं है. प्रकाश की पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं हैं. लोगों को मकान निर्माण की अनुमतियां नहीं मिल पा रही हैं. नगर पालिका का पूरा ध्यान निर्माण कार्य की ओर है.

निर्माण कार्यों में भी अनियमितताएं बरती जा रही हैं. निगम के पास अभियंताओं का टोटा है. निगम में सारे विभाग प्रमुख प्रभारी उस पद की योग्यता की पात्रता नहीं रखते हैं फिर भी अयोग्य पदस्थ हैं. भाजपा की परिषद है भाजपा के निगम अध्यक्ष हैं परंतु उन्हें अपमानित करने उनके खिलाफ समाचार छपवाने में तीन माहेश्वरीयों की तिकड़ी सदैव लगी रहती है.

मुख्यमंत्री करोड़ों देकर खुश
निगम घोटालों की स्थिति व्यापम की तरह अधिकारी कर्मचारी और सत्ता पक्ष भाजपा अंधे के द्वारा रेवड़ी बांटने की स्थिति में हैं. भूखण्ड रजिस्ट्री घोटाला,माणकचौक सब्जी मंडी में बैठक को पक्की दुकाने बनने के बाद उनका नामांतरण,राजीव गांधी सिव्हिक सेंटर एवं सुभाष कॉम्पलैक्स तथा रैन बसेरा सैलाना बस स्टेण्ड की दुकानों भवनों की आवंटन स्थिति भाजपा अपने कार्यराल में अनिर्णय की स्थिति में रही.

महापौर के सहयोगी और सलाहकारों ने एक अरब से ज्यादा का घोटाला अपने कार्यकाल में किया है जबकि कचरा रखने के कंटेनरों ,हाथ,ठेला गाड़ी उघोगों के खरीदी और स्थिति समूचे शहर में उबड़ खाबड़ डामरीकृत सड़क,पानी का टैंकर घोटाला,सीमेंट कांक्रीटीकरण खुले भ्रष्टाचार का प्रमाण दे रहें हैं. शिवराज के राज में भ्रष्टाचार इतना पनपा है नगर निगम के चुनाव में जनता भाजपा को आईना दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी. स्ट्रीट लाईट के रखरखाव के नाम पर सबसे बड़ा घोटाला निगमायुक्त सोमनाथ झारिया की देखरेख और मार्गदर्शन में हुआ है. प्रदेश शासन को चुनाव से पहले महापौर शैलेंद्र डागा के कार्यकाल की जांचे जो लोकायुक्त में लंबित हैं.

उन्हें गति देना चाहिए और म.प्र.पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा से पूरे कार्यकाल की जांच करानी चाहिए. निगम के अयोग्य आयुक्त जो अपने कक्ष में बैठकर जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के मिलने में कतराते हैं केवल महपौर निवास के गलियारे अथवा कलेक्टोरेट परिसर में कार को खड़ी कर अपने शा ीनगर आवास में आराम करते रहते हैं. जहां तक निगम के गठन के बाद भ्रष्टाचार की बात की जाए तो सर्वाधिक भ्रष्टाचार और घोटाले शैलेंद्र डागा और उनके सहयोगियों ने किए है भूमाफिया,गुमटी माफिया,परिवहन माफिया और बिना सप्लाय के बिलों को भुगतान पाने वाले सप्लायरों की तादाद इस कार्यकाल में ज्यादा देखी गई है

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

जौहर : कब और कैसे..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: