/राहुल ने सलाहकारों से पूछा क्यों हार गई कांग्रेस..

राहुल ने सलाहकारों से पूछा क्यों हार गई कांग्रेस..

कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को 4 घंटे पार्टी के सीनियर नेताओं के साथ वक्त बिताए. इस मुलाकात में राहुल ने पार्टी को फिर से खड़ा करने पर बात की. सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी की मुलाकात गुलाम नबी आजाद, अंबिका सोनी, मणिशंकर अय्यर और जयपाल रेड्डी से हुई. इस बातचीत में टीम राहुल के जयराम रमेश, मीनाक्षी नटराजन और सचिन पायलट भी थे.rahul

महाराष्ट्र और हरियाणा में बीजेपी से करारी हार के बाद कांग्रेस की यह शायद पहली बैठक थी. बैठक में मुख्य मुद्दा यही छाए रहा कि कांग्रेस को कैसे एक बार फिर से राष्ट्रीय स्तर पर केंद्र में लाया जाए और सत्ताधारी बीजेपी से मिलने वाली चुनौतियों से कैसे निपटा जाए. इस बातचीत में कांग्रेस की हार की कुछ दिलचस्प वजहें बताई गईं. ज्यादातर लोगों ने सत्ता विरोधी लहर को सबसे बड़ा कारण बताया. आंतरिक विद्रोह और कुछ सीटों पर घटिया चुनावी कैंपेन को भी जिम्मेदार बताया गया.

यूपीए सरकार के मंत्रियों ने राहुल को यह सलाह भी दी पार्टी की तरफ से मजबूत नेता को आगे करना चाहिए या पार्टी की रणनीति में कम से कम ऐसा प्रतीत होना चाहिए. यूपीए के एक पूर्व मंत्री ने इस बैठक में कहा कि लोग इस वक्त मजबूत नेता चाहते हैं. एक सीनियर नेता ने कहा कि कोई नेता क्या कर सकता है जब बूथ लेवल पर हमारे कार्यकर्ताओं को समर्थक ही नहीं मिले जो आकर वोट करते हैं.

इस बैठक में ज्यादातर लोगों ने माना कि कांग्रेस केवल उन लोगों को आकर्षित करने में सफल रही जो पार्टी की मूल विचारधारा में भरोसा रखते हैं. ऐसे में यह जरूरी है कि लोग न केवल हमारी विचारधारा जानें बल्कि उसका मतलब भी समझें. इस मामले में एक नेता ने उदाहरण देते हुए समझाया कि हमारी पार्टी के लोग सेक्युलरिजम और समावेशी विकास की बात करते हैं लेकिन वे इसे समझाने में नाकाम रहते हैं.

राहुल को नेताओं ने यह सलाह भी दी कि कांग्रेस को कैडर आधारित पार्टी की राह पर बढ़ना चाहिए और अपने सदस्यों को दुरुस्त ट्रेनिंग मिलनी चाहिए. कुछ सीनियर नेताओं ने जवाहर लाल नेहरू के वक्त की कांग्रेस के बारे में बताया कि तब पार्टी किस तरह से सामाजिक गतिविधियों में लगी रहती थी. इसमें मुफ्त में शिक्षा, सामुदायिक सेवा और साफ-सफाई मुख्य थे. पहले 2 अक्टूबर को कांग्रेस हरिजन बस्तियों में साफ-सफाई प्रोग्राम को चलाती थी. इसे एक किस्म का सोशल मेसेज जाता था कि हम छोटे से छोटे काम को भी करने में पीछे नहीं रहते. इस काम को अब बीजेपी ने हाइजैक कर लिया है. कांग्रेस के भीतर सांगठनिक स्तर पर ज्यादा नुमाइंदगी वाला चुनाव कराने की भी बात हुई ताकि संगठन में बिना कोई सगे संबंधी के लोग भी आ सकें.

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