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क्या यूट्यूब पर वाइरल हुआ वीडियो फर्जी था..

NGO चंदा बटोरने की खातिर क्या क्या नहीं करते.. कुछ दिन पहले इसी चक्कर में अमेरिका के एक NGO ने मैनहट्टन की सड़कों पर अकेली घुमती लडकी का वीडियो बनाया.. जिसमें दिखाया गया कि एक लड़की काली जीन्स और टी शर्ट में घंटों सड़कों पर घुमती है और उसे मर्दों के गंदे कमेंट्स झेलने पड़ते हैं..girl

यहाँ यह भी बता दें कि लड़की तो उस NGO की नुमाइंदगी कर ही रही थी और इस बात में भी शक की ज्यादा गुंजाईश नहीं है कि उस लडकी पर फब्तियां कसने वाले मर्द भी उसी NGO के नुमाइंदे थे.. यह वीडियो यूट्यूब पर वाइरल हो गया और उस NGO को भरपूर चंदा मिलना शुरू हो गया.

गौरतलब है कि यह वीडियो अट्ठाईस अक्टूम्बर को यूट्यूब पर अपलोड किया गया था और अब तक इसे 26,744,868 लोग देख चुके हैं. यह वीडियो एक वाइरल वीडियो विशेषज्ञ एजेंसी ने बनाया है और उस एजेंसी का काम यही है.. उसे ऐसे वीडियो बनाने के लिए पूरी तैयारी पहले से करनी होती है और वीडियो में क्या क्या होगा यह भी पहले से ही तय करना होता है..

उसकी शूटिंग तभी शुरू होती है जब सब कुछ तय कार्यक्रम के अनुसार तैयार हो..  जब तक उन्हें इस बात की पूरी तसल्ली नहीं हो जाती कि वही शूट होगा जो उनकी स्क्रिप्ट कहती है तब तक शूटिंग ही शुरू नहीं होती. इंटरनेट कम्युनिटी की मशहूर साईट Reddit पर भी अधिकांश यूजर यह जानने के बाद इस वीडियो में दिखाए गए तथ्यों को प्रायोजित बता रहे हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.