/भूपेंद्र हुड्डा सदमे में, नहीं निकलते घर से बाहर..

भूपेंद्र हुड्डा सदमे में, नहीं निकलते घर से बाहर..

-पवन कुमार बंसल||

भूपेन्द्र  सिंह हुड्डा और उनकी धर्मपत्नी आशा हुड्डा विधानसभा चुनाव में हार का सदमा अभी तक बर्दाश्त नहीं कर पाये हैंं. अपने गृह जिले रोहतक की रोहतक सीट से भूषण बत्रा की हार से वे गहरे सदमे में हैं.Bhupinder-S-Hooda

दीपेंदरसिंह हुड्डा ने पार्टी कार्यकर्तों की बैठक कर हार के कारण जानने चाहे तो आशा हुड्डा अचानक एक पार्क में मॉर्निंग वाक के लिए चली गयी. भूपिंदर हुड्डा तो स रोहतक छोड़कर सोनीपत में बसने की अपनी इच्छा जाहिर कर चुके हैं. दीपेंदर के बैठक में कार्यकरों ने उन्हें खरी खोटी सुनाई तो आशा मैडम ने भी लोगो से कहा कि पूरा परिवार जुंडली से घिरा हुआ था.

दीपेंदर की मीटिंग में तो चापलूस नेताओं ने कहा कि आप चिंता न करे. लोग अपने किये पर अब पछता रहे हैं तथा वे जल्दी ही भूपेन्द्र   हुड्डा को घर से बाहर निकाल कर लायेगे. अपने आप को प्रोफेसर कहने वाले एक नेता का कहना था कि  हमने रोहतक को चमका दिया लेकिन यह समझ नहीं आ रहा की फिर भी रोहतक से हम कयोन हारे. आशा मैडम जिनके दरबार में कभी लम्बी हाजिरी लगती थी तथा लोग उनके दर्शन के लिए बेचैन रहते थे, को भी लोगो ने काफी खरी खरी सुनाई. कहा कि जब कोठी पर मिलने जाते तो बिट्टू साहिब कई घंटे के बाद दर्शन देते थे.

वैसे वे नेता, जिन्होंने हुड्डा से निजी लाभ लिए हैं, ही उनकी चापलूसी कर रहे हैं. जगमोहन मित्तल तथा मनमोहन गोयल द्वारा भाजपा के समर्थन से हुड्डा परिवार दुखी हैं. कह रहे हैं कि पंजाबियों तथा बनियों ने साथ नहीं दिया. असली कारण बताने की हिम्मत या हिमाकत कोई नहीं कर रहा. सुबह मानसरोवर पार्क में में भी मोरिंग वाक कर रहा था.

लोगो ने बताया कि हुड्डा परिवार आम आदमी से दूर हो गया था. इस बात पर भी लोगो में गुस्सा था कि कभी छत्तीस बिरादरी का नेता होने का दावा करने वाले हुड्डा सत्ता में आकर यह लगे कहने लगे कि मैं जाट पहले हूँ और मुख्यमंत्री बाद में.

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