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तहलका हिंदी के कार्यकारी संपादक संजय दुबे को हटाया..

By   /  November 9, 2014  /  2 Comments

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तहलका प्रबंधन ने तहलका हिंदी के कार्यकारी संपादक संजय दुबे को बाहर का रास्ता दिखा दिया है.
तहलका हिंदी के हालिया अंक के प्रिंट लाईन से संजय दुबे और विकास बहुगुणा(मुख्य कॉपी संपादक) का नाम हटा दिया गया है.
तहलका प्रबंधन का कहना है कि संजय दुबे पिछले काफी समय से संस्थान विरोधी गतिविधियों में लिप्त थे.old printline

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  • Published: 3 years ago on November 9, 2014
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  • Last Modified: November 10, 2014 @ 4:09 pm
  • Filed Under: मीडिया

2 Comments

  1. Bebak Bharat says:

    नेताओ का बढता भ्रष्टाचार कब रुकेगा

  2. माँ के साथ सब्जी बेचकर गुज़ारा करने वाले पूर्व मंत्री छगन भुजबल कैसे बने अरबो खरबों के मालिक

    बेबाक राशिद सिद्दीकी पुणे

    माँ के साथ सब्जी बेचकर गुज़ारा करने वाले पूर्व उप मुख्यमंत्री छगन भुजबल कैसे तेज़ रफ़्तार से राजनीती में आए और कैसे रातो रात अरबो खरबों के मालिक बन गए यह सच वाकई चोका देने वाला है

    उल्लेखनीय है कि राजनीति में आने के पहले छगन भुजबल मुंबई के भायखला सब्जी मंडी में अपनी मां के साथ सब्जी और फल बेचा करते थे। मेकैनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद बाल ठाकरे के विचारों से प्रभावित होकर भुजबल शिवसेना से जुड़े।1973 में पहली बार जीते चुनाव
    छगन भुजबल पहली बार 1973 में शिवसेना से पार्षद का चुनाव लड़े और जीते। 1973 से 1984 के दरमियान छगन मुंबई के पार्षदों में सबसे तेज तर्रार नेता माने जाते थे। जिसकी बदौलत वे दो बार मुंबई महानगरपालिका के मेयर भी रहे। मेयर रहते हुए छगन ने ‘सुन्दर मुंबई, मराठी मुंबई’ के नाम से अभियान भी चलाया था। इस अभियान के तहत छगन ने मुंबई को सुन्दर बनाने कई कड़े कदम उठाए जो मीडिया की सुर्खियां बने। 1985 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भी बाल ठाकरे ने छगन भुजबल को मुंबई महानगरपालिका के मेयर की ज़िम्मेदारी दी। लेकिन 1991 में बाल ठाकरे के साथ उभरे मतभेद के बाद भुजबल ने शिवसेना छोड़ दी और कांग्रेस के साथ जुड़े। बाद में वे 1999 में कांग्रेस से अलग होकर शरद पवार के नेतृत्व में बनी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से जुड़ गए। कांग्रेस- राकांपा सरकार में वे पहली बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बनाए गए।
    जिस शहर से चुनाव लड़े वहीं बनाई संपत्ति
    छगन भुजबल ने अपने पूरे राजनीतिक करियर में नासिक, येवला, मुंबई, मझगांव शहरों से चुनाव लड़ा था। छापे में मिली संपत्ति के अनुसार जिस शहर में छगन ने चुनाव लड़ा उन शहरों में छगन ने करोड़ों की संपत्ति भी बनाई। कुछ दिनों पहले एंटी करप्शन ब्यूरो ने मुंबई, ठाणे, नासिक और पुणे में छापे मारे थे जहां छगन और उनके परिवार के नाम अरबों की संपत्ति मिली थी।
    नासिक में 100 करोड़ का बंगला
    छापे के दौरान डीजीपी (एसीबी) प्रवीण दीक्षित ने बताया था कि छापे में पंकज के नाम पर नासिक में 100 करोड़ रुपए का बंगला मिला है। 46,500 वर्गफुट में फैले इस बंगले में 25 कमरे, स्विमिंग पूल और जिम भी है। पुणे में भी करोड़ों रुपए की संपत्ति मिली। लोनावला में 2.82 हेक्टेयर में फैले छह बेडरूम वाले बंगले में हेलिपैड, स्विमिंग पूल के साथ विदेशी फर्नीचर और प्राचीन मूर्ति मिली है।
    दर्ज हुआ था मनी लॉन्ड्रिंग का केस
    प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को हाईकोर्ट में दो महीने में अपनी जांच रिपोर्ट पेश करनी है। अंतरिम रिपोर्ट 22 जुलाई को और फाइनल रिपोर्ट 19 अगस्त को देनी है। पिछले सप्ताह ही ईडी ने कुल 900 करोड़ रुपए के वित्तीय अनियमितता के संदेह में भुजबल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के प्रावधानों के तहत दो मामले दर्ज किए थे।
    18 बनाए गए आरोपी
    छगन भुजबल समेत उनके विधायक बेटे पंकज, पूर्व सांसद भतीजे समीर सहित कुल 18 लोगों को आरोपी बनाया गया था। भुजबल परिवार पर हवाला के जरिए करोड़ों रुपए विदेश में भेजने का आरोप है। पहला मामला महाराष्ट्र सदन घोटाले और कालीना भूमि आवंटन से जुड़ा हुआ है, जबकि दूसरा मामला नवी मुंबई में एक आवासीय परियोजना संबंधी है। भाजपा सांसद किरीट सोमैया ने गत सप्ताह प्रर्वतन निदेशालय में शिकायत दर्ज कराई थी और भुजबल की संपत्ति की जांच की मांग की थी।
    एसआईटी 11 आरोपों की करेगी जांच
    हाईकोर्ट के आदेश पर एसआईटी का गठन होगा। इसमें एसीबी और ईडी के अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। एसआईटी भुजबल और उनके रिश्तेदारों के खिलाफ लगे 11 आरोपों की जांच करेगी।

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