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ताले में बंद है जैसलमेर एयरपोर्ट..

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 पर्यटन व्यवसायी दुखी.. 80 करोड़ की लागत से बना था एयरपोर्ट..  केन्द्रीय पर्यटन सचिव ललित के पंवार ने शुरू करवाने का दिया भरोसा..

-सिकंदर शैख़||

पर्यटकों और उद्योगपतियों को आकर्षित करने के लिए जैसलमेर में 80 करोड़ की लागत से बनाया गया एयरपोर्ट पिछले 2 सालों से ताले में बंद है. यहां से न तो किसी फ्लाइट का संचालन हो रहा है, न ही इस दिशा में सरकार गंभीर दिख रही है. जिसको लेकर यहाँ के पर्यटन व्यवसायी काफी खफा एवं दुखी है और पर्यटन को हो रहे नुकसान को लेकर काफी चिंतित भी है , हर तरफ से निराश जनता को आखिर केन्द्रीय पर्यटन सचिव ललित के पंवार ने दिया जल्द शुरू करने का आश्वासन, लेकिन सवाल यही है की आखिर अब तक क्यों नहीं शुरू हुआ जैसलमेर का एयर पोर्ट ?air port

जैसलमेर, राजस्थान का सबसे ख़ूबसूरत शहर है और जैसलमेर पर्यटन का सबसे आकर्षक स्थल माना जाता है. जैसलमेर शहर के निकट एक पहाड़ी पर बने हुए इस सोनार दुर्ग में राजमहल, कई प्राचीन जैन मंदिर और ज्ञान भंडार नामक एक पुस्तकालय है, जिसमें प्राचीन संस्कृत तथा प्राकृत पांडुलिपियाँ रखी हुई हैं. इसके आसपास का क्षेत्र, जो पहले एक रियासत था, लगभग पूरी तरह रेतीला बंजर इलाक़ा है और थार मरुस्थल का एक हिस्सा है. जैसलमेर, ज़िले का प्रमुख नगर हैं जो नक़्क़ाशीदार हवेलियों, गलियों, प्राचीन जैन मंदिरों, मेलों और उत्सवों के लिये प्रसिद्ध हैं. निकट ही ‘सम’ गाँव में रेत के टीलों का पर्यटन की दृष्टि से विशेष महत्त्व हैं.

यहाँ का सोनार दुर्ग भी यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल हो चुका है , जैसलमेर हर साल लाखों की संख्या में देसी विदेशी सैलानी आते हैं और इसकी खूबसूरती को निहारते हैं , मगर विगत कुछ सालों से यहाँ पर्यटकों का ग्राफ कम हुआ है ,इसकी दो वजह है एक तो यहाँ आने के लिए जोधपुर से सड़क मार्ग के द्वारा आया जा सकता है जो की लगभग 300 किलोमीटर है और 6 घंटे का उबाऊ सफ़र है , दूसरा यहाँ पर कई पैसे वाले लोग भी आना चाहते हैं मगर वो सडकों पर हो रही दुर्घटनाओं से बचना चाहते है और इसके लिए वो केवल हवाई सेवा का ही उपयोग करते हैं , मगर ये जैसलमेर का दुर्भाग्य है की विगत करीब 80 करोड़ की लागत से और दो वर्षों से तैयार खड़े सिविल एयरपोर्ट पर अभी तक हवाई सेवा की शुरुआत नहीं की गयी है , पर्यटन व्यवसाई इससे खासे नाराज़ हैं और पर्यटन को हो रहे लगातार नुक्सान से आहात भी है , हर तरफ किये प्रयासों के बावजूद भी जैसलमेर में हवाई सेवा अभी तक शुरू नहीं हो पायी है जबकि एअरपोर्ट बनकार तैयार खडा है और धुल फांक रहा है , जैसलमेर में पिछले साल यहां सितंबर से विमान संचालन होना था . यह हाल तो तब है, जब राज्य सरकार के आग्रह पर ही एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इसका निर्माण किया है.lalit k panwar

एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के मुताबिक जैसलमेर एयरपोर्ट का निर्माण कर दिया है. यह निर्माण केंद्रीय मंत्रालय और राज्य सरकार के बीच हुई कई बैठकों के बाद हुआ है, लेकिन राज्य सरकार ने वहां फ्लाइटों के संचालन के लिए कोई पहल नहीं की है. और सूना पड़ा है जैसलमेर एयरपोर्ट. गौरतलब है कि यदि जैसलमेर का एअरपोर्ट शुरू हो जाता है और मुंबई से आने वाले पर्यटकों को सीधी विमान सेवा मिले तो यहाँ पर पर्यटकों की संख्या में भारी इजाफा होने की संभावना है जिससे यहाँ के पर्यटन को बढ़ावा भी मिलेगा साथ ही साथ पर्यटन से जुड़ें लोगों को भी रोजगार में काफी फायदा भी होगा. प्रदेश में अभी इंटर स्टेट फ्लाइट कनेक्टिविटी नहीं है. इसके लिए नई उड़ानें शुरू कराने का काम राज्य सरकार का है, क्योंकि विमानन कंपनियां घाटे की आशंका के कारण नई जगह से ऐसा नहीं करती. सरकार उड़ानों की कुछ सीटें रिजर्व करती है ताकि कंपनियां फ्लाइटें संचालित कर सकें. सरकार ने यह पहल नहीं की. अगर प्रदेश सरकार इस तरफ ध्यान देंगी तो बड़े निवेशक भी प्रदेश में निवेश के लिए आगे आयेंगे और विमान सेवा बढ़ने से यहाँ पर पर्यटकों का भी इजाफा होगा जिसे रेवन्यू भी बढेगा. पर्यटन व्यवसाइयों ने यहाँ करोड़ों की लागत से पांच सितारा होटलों का निर्माण तो कर लिया है मगर वहाँ विदेशी पर्यटक बिना हवाई सेवा के आने को तैयार नहीं है जिससे हर साल इन होटल व्यवसाइयों को लाखों का नुक्सान भी उठाना पड़ रहा है मगर सरकार के कानों में जूँ तक नहीं रेंग रही है.
अभी हाल ही मैं जैसलमेर आये केन्द्रीय पर्यटन सचिव से जब इस मुड़े पर बात की तो उन्होंने माना है की वाकई मैं यहाँ के पर्यटन व्यवसाइयों के साथ ना इंसाफी हो रही है और मैं खुद उड्डयन सचिव से बात करके यहाँ पर किसी भी विमानन कम्पनी को जैसलमेर में हवाई सेवा शुरू करने के लिए बात करूंगा ताकि यहाँ का पर्यटन और विकसित हो और ज्यादा पर्यटक यहाँ आये!

चूँकि विगत कई वर्षों से पर्यटन नगरी जैसलमेर उपेक्षा का शिकार रही है और हर आने वाली सरकारों ने उसकी अनदेखी ही की है , अब चूँकि केन्द्रीय पर्यटन सचिव ने भरोसा दिलाया है की वो जल्द ही हवाई सेवा पर बात करेंगे तो जैसलमेर मे एक बार फिर खुशियाँ शुरू हुई है मगर क्या ये वाकई मैं खुशियों की सौगात लाएगी या एक बार फिर सपना रह जायेगी ये आने वाला वक़्त बताएगा.

इनका कहना है —
1- “मेरी दृष्टि में पर्यटन को काफी नुकसान हो रहा है क्योंकि कई पर्यटक उच्च आय वाले हैं और वो लोग सड़क मार्ग से परिवहन नहीं करना चाहते हैं ,और अगर हवाई सेवा शुरू होती है तो करीब 30 से 35 प्रतिशत तक व्यापार में इजाफा होगा – जीतेन्द्र सिंह राठौर – अध्यक्ष पर्यटन महासंघ जैसलमेर
2 – ” जैसलमेर सड़क मार्ग से काफी दूर है करीब पांच से छ घंटे की उबाऊ यात्रा करके कोई यहाँ नहीं आना चाहता है , अगर हवाई सेवा आरम्भ होती है तो जैसलमेर पूरी दुनिया से जुड़ जाएगा , और कितना सारा पैसा लगने के बाद भी ये क्यों नहीं शुरू हो पा रहा है ये एक बड़ा सवाल है ,मैं सरकार से गुजारिश करूंगा की वो जल्द से जल्द इसको शुरू करावे ताकि यहाँ के परयातन व्यवसाइयों को लाभ हो – मनोज पोलजी – व्यवसायी
3 – ” आज कल लोग शाही शादियाँ बाहर आकर करते हैं जिसमे जैसलमेर उनकी प्रमुख पसंद बनता जा रहा है लेकिन जब भी हवाई सेवा नहीं होने की बात आती है तब सब लोग यहाँ से मुंह मोड़ लेते हैं , और हर बार हमारी होटल में हवाई सेवा नहीं होने की बात कहने पर बुकिंग भी कैंसिल होती जाती है – पंकज शर्मा – जनरल मेनेजर होटल डेजर्ट ट्यूलिप

4 -” एयर पोर्ट बनने के बाद भी शुरू नहीं हो पाया ये जैसलमेर का दुर्भाग्य है , मैं एक हेंडीक्राफ्ट व्यापारी हूँ और मैं जानता हूँ कि जो लोग जैसलमेर से खरीददारी करना चाहते हैं वो लोग जोधपुर में ही रुक जाते हैं तथा बिना हवाई सेवा के वे यहाँ नहीं आते है जिससे जैसलमेर में हम जैसे कई व्यापारियों को भारी नुक्सान हो रहा है अगर यही हवाई सेवा शुरू हो जाती है तो सभीको बहुत फायदा होगा – अर्जुन दास चांडक – हेंडीक्राफ्ट व्यवसायी

5- ” वाकई मैं यहाँ के पर्यटन व्यवसाइयों के साथ ना इंसाफी हो रही है और मैं खुद उड्डयन सचिव से बात करके यहाँ पर किसी भी विमानन कम्पनी को जैसलमेर में हवाई सेवा शुरू करने के लिए बात करूंगा ताकि यहाँ का पर्यटन और विकसित हो और ज्यादा पर्यटक यहाँ आये – ललित के पंवार – केन्द्रीय सचिव पर्यटन

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About Author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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