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ग्रीनपीस की प्रकाश जावड़ेकर से मुलाकात ..

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नई दिल्ली,

ग्रीनपीस इंटरनेशल के कार्यकारी निदेशक कुमी नायडू और उनके भारतीय समकक्ष समित आईच ने आज पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावेड़कर से मुलाकात कर लिमा और पेरिस में होने वाले जलवायु वार्ता में सीविल सोसाइटी की भूमिका पर चर्चा की. जून में दो आईबी रिपोर्ट लीक होने के फलस्वरुप ग्रीनपीस के विदेशी धन अवरुद्ध होने के बाद यह पहला मौका था जब ग्रीनपीस और सरकार ने आमने-सामने बातचीत की.1401601_10152471057552844_4241054005663798478_o

कुमी नायडु ने कहा, “मैं ग्रीनपीस कैसे और किस चीज के लिये काम करता है और एक स्वस्थ्य लोकतंत्र के लिये सीविल सोसाइटी की आवश्यकता जैसे मुद्दे पर सरकार के साथ रचनात्मक बातचीत की उम्मीद लेकर भारत आया था. ग्रीनपीस पर्यावरण संरक्षण के लिये काम करता है, जिसपर करोड़ों भारतीय निर्भर हैं और हम आशा करते हैं कि सरकार हमें “राष्ट्रीय हितों के खिलाफ” मानना बंद करेगी”.
गृह मंत्रालय ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक हलफनामा दायर करके गैर सरकारी संगठन को “प्रतिकूल राष्ट्रीय हितों को प्रभावित” करने वाली गतिविधियों में शामिल होने के बहाने अवरुद्ध विदेशी धन के निर्णय को न्यायोचित ठहराया था. नायडू और समित ने ग्रीनपीस इंडिया के अवरुद्ध विदेशी धन पर चर्चा करने के लिये गृह मंत्री राजनाथ सिंह को भी पत्र लिखकर समय मांगा है.

ग्रीनपीस इंडिया के कार्यकारी निदेशक समित आईच ने कहा, “हमने जलवायु जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर भारत की स्थिति को सूचित करने के लिये सीविल सोसाइटी को शामिल करने की जरुरत पर बल दिया. श्री जावेड़कर ने हमारी भूमिका को स्वीकार करते हुए आगामी लिमा (पेरु) में आयोजित होने वाले जलवायु वार्ता से पहले सीविल सोसाइटी के साथ आयोजित विमर्श में हमें आमंत्रित करने का प्रस्ताव दिया है”.

नायडू संयुक्त राष्ट्र के एक कॉन्फ्रेंस में शामिल होने भारत आए हुए हैं. इस यात्रा ने उन्हें ग्रीनपीस सहित सीविल सोसाइटी पर सरकार द्वारा किये जा रहे दमन को समझने का मौका दिया है. शुक्रवार को दूसरे सीविल सोसाइटी के लोगों के साथ संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कुमी और समित ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित भारत सरकार से एक बैठक की सार्वजनिक अपील की थी जिससे ग्रीनपीस इंडिया अपने अभियानों और देश में लगातार प्रतिबंध का सामना कर रहे पर्यावरण प्रहरी के रुप में अपनी चिंताओं को साझा कर सके.

ग्रीनपीस इंडिया ने गृह मंत्रालय के द्वारा धन को अवरुद्ध करने के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में कानूनी केस दर्ज किया है, जिसकी सुनवाई जनवरी 2015 को है.

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