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हक के लिए संघर्ष करती विधवा, कैन्सर रोगी से करवा दी थी शादी..

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-चन्दन सिंह भाटी||

रानीवाड़ा.ये बंजर सा शमा, ये बंजर दास्तां, खामोशी बन गयी जीने का बहाना, मेरे ख्वाबों के उजड़े हुए से मंजर में..

हर युवती का एक ख्वाब होता है कि शादी के बाद घर में खुशियां कदम चूमें, भरा पूरा घर संसार हो. परन्तु अगर शादी के ८ माह बाद ही सुहाग उजड़ जाए तो उस पर क्या गुजरती होगी. इतना ही नहीं सामाजिक रीति रिवाजों के चलते जिन्दगी अपने दम पर गुजारना मजबूरी सा हो गया है. औलाद नहीं होने एवं पुश्तैनी जमीन का हक भी नहीं मिलने से कोर्ट कचहरी के चक्कर का काटना उसकी नियति हो गई है. यह दास्तान है विधवा अनिताकंवर पत्नि दीपसिंह सोलंकी निवासी सेवाड़ा की. आज वो हक के लिए अपने पिता के साथ दो माह से पुलिस के आला अफसरों के दफ्तरों में दस्तक दे रही है.16rnv1

अनिता कंवर निवासी भागवा जिला बाड़मेर की शादी ४ सितम्बर २००८ को सेवाड़ा निवासी दीपसिंह सोलंकी के साथ हुई थी. वक्त शादी दीपसिंह को कैन्सर की गम्भीर बिमारी थी परन्तु शादी के वक्त अनिता के परिजनों को नहीं बताया गया. लिहाजा, शादी के मात्र ८ माह के बाद ही दीपसिंह की मौत हो गई. अनिता के ख्वाब व ख्वाहिशों पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा. सामाजिक रीति रिवाजों के अनुसार अब अनिता दुसरा विवाह नहीं कर सकती. औलाद भी नहीं होने से कष्टप्रद जीवन गुजारने के लिए अब ईश्वर का सहारा रह गया है.

अनिता का सुहाग उजडऩे के बाद ससुर, सास व अन्य परिजनों के द्वारा अनिता को ससुराल छोडऩे के लिए प्रताडित करने का दौर शुरू हुआ. दहेज की मांग भी करने लगे. उसी दरम्यिान ससुर ने खेती की जमीन भी बेच दी. अनिता के लिए खेती की जमीन ही जीवन निर्वाह का एक मात्र सहारा था. हक के लिए उसने एसडीएम कोर्ट में दावा भी किया. बाद में ससुराल वालों ने उसको जबरन वाहन में डालकर पीहर भागवा छोड़ दिया. उसके पिता नरपतसिंह ने उसको सहारा देकर न्याय दिलाने के लिए करड़ा थाना में १२ अगस्त को रिपोर्ट दर्ज कराई. दो माह गुजरने के बाद भी दहेज के आरोपियों के विरूद्ध कार्यवाही नहीं होने पर जिला पुलिस अधीक्षक व महानिरीक्षक जोधपुर तक खुद पेश होकर न्याय के लिए गुहार लगाई. अब मामले की जांच के लिए कोर्ट ने रानीवाड़ा पुलिस उपाधीक्षक को निर्देशित किया है. अभी उपाधीक्षक प्यारेलाल मीणा अनिता के इस मामले की जांच कर रहे है. आरोपी बेखौफ घूम रहे है.

हक जरूर मिलेगा
अनिता कंवर ने बताया कि ससुराल वालों ने जानबुझकर कैन्सर की बिमारी छुपाकर मेरी जिन्दगी बरबाद की है. अब जीवन भर मुझे कसक रहेगी. जिन्दगी को गुजारने के लिए मेेरे पास सिर्फ खेत ही सहारा था वो भी ससुरालों ने बेच दिया है. मुझे घरबदर करने वालों के खिलाफ पुलिस ठोस कार्यवाही भी नहीं कर रही है. इतना विश्वास है कि देर सवेर मुझे हकुमत से हक जरूर मिलेगा.

जांच जारी
अनिता का मामला सामाजिक है, आपस में बातचीत चल रही है. दूसरी शादी करने का रिवाज नही है सो लेनदेन व खेती की जमीन नामे करवाने के लिए समाज के लोग आपसी समझाइश कर रहे है. विधवा के साथ न्याय किया जाएगा.
-उपाधीक्षक, रानीवाड़ा.

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