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अंधविश्वास के चलते भगवान बने ओम बन्ना..

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-जगदीश सैन पनावड़ा||

पाली/रोहिट, जो दिखता नहीं वह भगवान बन जाता है. पर कौन भूत कहलाएगा, कौन भगवान यह अपनी-अपनी किस्मत की बात है. भगवान, आत्मा और साइंस का कमाल मिस्टर इंडिया ये तीनों ही दिखते नहीं. पर भगवान कहलाने का सौभाग्य सिर्फ भगवान को मिला है. हालांकि भगवान को आज तक किसी ने देखा नहीं, उनके किस्से लेकिन सबको पता हैं. कृष्ण, राम आदि इंसान रूपी कई भगवानों को भगवान कहलाने के लिए जाने कितनी लीलाएं करनी पड़ीं तब जाकर वे भगवान कहलाए. इसी तरह भूतों, आत्माओं के होने पर बड़ी बहस होती है, कोई देखने की बात कहता है, कोई कोरी बकवास कहता है. पर मॉडर्न युग में हर चीज मॉडर्नाइज्ड है. मॉडर्न भगवान भी हैं. हमारी यह खबर पढ़कर आप कुछ भी सोचें लेकिन इतना जरूर है कि भूतों, आत्माओं को बड़ी कोफ्त होगी, शायद वे अपनी किस्मत से शिकायत करने लगेंगे क्यों?Om-Singh-Rathore-shrine1 (1)
ओम सिंह राठौर एक ऐसे व्यक्ति हैं जो ज्यादा दिन जी तो नहीं सके लेकिन मर कर भगवान बन गए. भगवान की सत्ता पर आपको यकीन हो या न हो लेकिन जोधपुर के बुलेट बाबा मंदिर में लोगों को ओम बन्ना (ओम सिंह राठौर) भगवान पर जरूर यकीन है. यकीन इतना कि यहां से गुजरते हुए कोई भी यात्री ओम बन्ना के बुलेट बाबा मंदिर में पूजा और प्रसाद चढ़ाए बिना नहीं जाता. अगर जाता है
तो एक्सीडेंट की भेंट चढ़ जाता है.

मौत के बाद भी वह हर पल साथ रहती थी

जोधपुर में ओम बन्ना का मंदिर जहां इसे जानने वालों के लिए श्रद्धा का केंद्र बन गया है वहीं इसके बारे में जानने वाले अन्य किसी के लिए उत्सुकता का विषय. ओम बन्ना मंदिर की विशेषता है इसमें पूजा की जाने वाले भगवान की मूर्ति. दरअसल यहां किसी भगवान की मूर्ति की बजाय मोटरसाइकिल रखी हुई है और उसके साथ ही ओम सिंह राठौर की फोटो. मोटरसाइकिल की पूजा के लिए मंदिर के बाहर फूल, कुमकुम, धूप-अगरबत्ती, कपूर, ओम बन्ना की पूजा के लिए खास तौर पर बनाए गए लोकगीतों के वीसीडी, ऑडियो टेप्स, ओम बन्ना की तस्वीरें आदि की कई दुकाने हैं. मोटरसाइकिल के पहिए पर फूल, अगरबत्ती, कपूर, कुमकुम आदि के साथ विधिवत पूजा के साथ इस पर शराब भी चढ़ाई जाती है.

मंदिर बनने के पीछे की कहानी भी बड़ी अजीब है.

सन् 1991 की बात है. आज जहां मंदिर बना है उसी जगह से अपनी बुलेट 350 से गुजरते हुए ओम सिंह का एक्सिडेंट हो गया. एक्सिडेंट में ओम सिंहOm-Banna-Bullet-350 की तत्काल मौत हो गई. लोकल पुलिस मोटरसाइकिल को पुलिस थाने लेकर चली गई. किवदंती है कि दूसरे दिन मोटरसाइकिल वापस एक्सिडेंट वाली जगह पहुंच गई. पुलिस को यह किसी की शरारत लगी इसलिए मोटरसाइकिल से पूरी पेट्रोल खाली कर वापस पुलिस स्टेशन ले जाकर चेन से बांधकर रख दिया गया. इसके बावजूद मोटरसाइकिल दूसरे दिन अपने एक्सिडेंट स्पॉट पर ही मिली. पुलिस की लाख कोशिशों के बावजूद भी वह इसे एक्सिडेंट स्पॉट से हटा नहीं सकी. यह खबर तेजी से फैली और एक्सिडेंट स्पॉट पर ही मोटरसाइकिल की पूजा की जाने लगी और ओम सिंह राठौर के नाम पर ओम बन्ना के नाम से यह मंदिर प्रसिद्ध हो गया.

एकमात्र जलराजकुमार इंसानी रूप में धरती पर रहता है !!

स्थानीय लोग ओम बन्ना मंदिर की सिद्धि पर बहुत विश्वास करते हैं. उनके अनुसार ओम बन्ना के मंदिर में पूजा करने से शुभ यात्रा का संयोग बनता है, वहीं यहां से गुजरने वाले जो यात्री ओम बन्ना मंदिर में पूजा नहीं करते उनकी दुर्घटना जरूर होती है. लोगों का मानना है कि ओम सिंह राठौर की आत्मा आज भी एक्सिडेंट स्पॉट पर घूमती है और रात में अपनी बुलेट 350 मोटरसाइकिल पर घूमती है. लोगों में फैली किवदंतियों के अनुसार यात्रियों द्वारा मंदिर को अनदेखा कर गुजरने पर एक्सिडेंट के कई मामले प्रकाश में आए हैं. इसके बाद ही ओम बन्ना मंदिर की प्रसिद्धि बढने लगी है. बहरहाल सच जो भी हो लेकिन ओम बन्ना के मंदिर के बाहर पूजा का सामान बेचने वाले जरूर उनकी आत्मा को दुआ देते होंगे. अगर आत्माएं होती हों तो जरूर उन्हें ओम सिंह राठौर की किस्मत से जलन होती होगी.

(नोट: मीडिया दरबार के मॉड स्वयं इस स्थान से कई बार गुजरे हैं और लोगों के इस अन्धविश्वास को देख हँसते हुए चले गए मगर किसी अनहोनी का शिकार नहीं हुए.)

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