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राजस्थान हाईकोर्ट ने लगाई क्रेडिट कोआॅपरेटिव सोसायटियों के बैंकिंग कारोबार पर रोक..

By   /  November 19, 2014  /  1 Comment

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-दलपतसिंह राठौड़||

राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुनील अम्बवानी एवं न्यायमूर्ति प्रकाश गुप्ता की खण्डपीठ ने बुधवार को एक पीआईएल पर सुनवाई करते हुए क्रेडिट कोआॅपरेटिव सोसायटियों द्वारा बिना रिजर्व बैंक लाइसेन्स के किए जा रहे बैंकिंग कारोबार पर रोक लगा दी हैं. हाईकोर्ट ने क्रेडिट सोसायटियों द्वारा ऋण देने एवं एटीएम लगाने जैसे बैंकिंग व्यवसाय करने वाली गतिविधियों पर भी रोक लगा दी हैं.

adarsh-credit-cooperative-society-long-term-deposit-policy-1-638बाड़मेर निवासी एडवोकेट सज्जनसिंह भाटी ने सहकारी अधिनियम एवं नाबार्ड से पंजीकृत क्रेडिट कोआॅपरेटिव सोसायटियों द्वारा आकर्शक लुभावनी योजनाएं लाॅंच कर ग्राहकों से करोड़ों की जमाएं स्वीकार करने एवं उंची ब्याज दरों पर कर्ज देने के मामले मे पीआईएल दायर की थी. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सत्यप्रकाश शर्मा एवं दलपतसिंह राठौड़ ने पैरवी की.

अधिवक्ता सत्यप्रकाश शर्मा ने बताया कि क्रेडिट कोआॅपरेटिव सोसायटियों द्वारा उंची ब्याज दरों का लालच देकर आम ग्राहकों से जमाएं प्राप्त की जाती थी. ऐसी कईं सोसायटियां बाद मे रफू हो गई और लोगों के करोड़ों डूब गये. मारवाड़ सहित पूरे राजस्थान मे सैकड़ों की संख्या मे ऐसी क्रेडिट कोऔपरटिव सोसायटियां खोल दी गई हैं. याचिका के मुताबिक सहकारी अधिनियम एवं नाबार्ड के तहत पंजीकृत इन सोसायटियों के पास अपने ही सीमित सदस्यों से जमाएं प्राप्त कर उनके आर्थिक स्वावलंबन के काम करने का अधिकार होता हैं. जबकि ये सहकारिता कानून की आड़ मे सरेआम बैंकिंग व्यवसाय कर रहे हैं. इन सोसायटियों द्वारा अखबारों, इलेक्ट्रोनिक मीडिया एवं होर्डिंग्स लगा कर जमाओं के आॅफर आमजन को दिये जा रहे है.

राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुनील अम्बवानी एवं न्यायमूर्ति प्रकाश गुप्ता की खण्डपीठ ने बुधवार को एक पीआईएल पर सुनवाई करते हुए क्रेडिट कोआॅपरेटिव सोसायटियों द्वारा बिना रिजर्व बैंक लाइसेन्स के किए जा रहे बैंकिंग कारोबार पर रोक लगा दी हैं. हाईकोर्ट ने क्रेडिट सोसायटियों द्वारा ऋण देने एवं एटीएम लगाने जैसे बैंकिंग व्यवसाय करने वाली गतिविधियों पर भी रोक लगा दी हैं.

बाड़मेर निवासी एडवोकेट सज्जनसिंह भाटी ने सहकारी अधिनियम एवं नाबार्ड से पंजीकृत क्रेडिट कोआॅपरेटिव सोसायटियों द्वारा आकर्षक लुभावनी योजनाएं लाॅंच कर ग्राहकों से करोड़ों की जमाएं स्वीकार करने एवं उंची ब्याज दरों पर कर्ज देने के मामले मे पीआईएल दायर की थी. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सत्यप्रकाश शर्मा एवं दलपतसिंह राठौड़ ने पैरवी की.

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अधिवक्ता सत्यप्रकाश शर्मा ने बताया कि क्रेडिट कोआॅपरेटिव सोसायटियों द्वारा उंची ब्याज दरों का लालच देकर आम ग्राहकों से जमाएं प्राप्त की जाती थी. ऐसी कईं सोसायटियां बाद मे रफू हो गई और लोगों के करोड़ों डूब गये. मारवाड़ सहित पूरे राजस्थान मे सैकड़ों की संख्या मे ऐसी क्रेडिट कोऔपरटिव सोसायटियां खोल दी गई हैं. याचिका के मुताबिक सहकारी अधिनियम एवं नाबार्ड के तहत पंजीकृत इन सोसायटियों के पास अपने ही सीमित सदस्यों से जमाएं प्राप्त कर उनके आर्थिक स्वावलंबन के काम करने का अधिकार होता हैं. जबकि ये सहकारिता कानून की आड़ मे सरेआम बैंकिंग व्यवसाय कर रहे हैं.

इन सोसायटियों द्वारा अखबारों, इलेक्ट्रोनिक मीडिया एवं होर्डिंग्स लगा कर जमाओं के आॅफर आमजन को दिये जा रहे हैं. जबकि बैंकिंग कारोबार के लिए रिजर्व बैंक से लाइसेन्स लेना अनिवार्य होता हैं. सोसायटियों मे जमाकर्ताओं के निवेश रूपयों की कोई सिक्युरिटी रिजर्व बैंक मे नही रहती. याचिका मे ऐसी कईं सोसायटियों का उल्लेख किया गया था जो जमाएं लेकर बंद कर दी गई और संचालक फरार हो गये.

याचिका मे संजीवन क्रेडिट कोआॅपरेटिव सोसायटी, नवजीवन क्रेडिट कोआॅपरेटिव सोसायटी एवं सांईकृपा क्रेडिट कोआॅपरेटिव सोसायटी, मारवाड़ क्रेडिट कोआॅपरेटिव सोसायटी को भी पक्षकार बनाया गया था. हाईकोर्ट ने केन्द्र सरकार, राज्य सरकार एवं रिजर्व बैंक आॅफ इण्डिया को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया था.

बुधवार को सुनवाई दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सत्यप्रकाश शर्मा एवं दलपतसिंह राठौड़ ने दलील दी कि इस तरह की सोसायटियों द्वारा उंची ब्याज दरों पर कमजोर वर्गो के लोगों को कर्ज दिया जाता हैं तथा उनसे ही जमाएं प्राप्त की जाती हैं. आॅफर दौरान पहुंचने वाले इन लोगों को बैकडोर से सदस्य बना लिया जाता हैं, जबकि सहकारी कानून मे ऐसे सदस्य बनाये जाने का कोई प्रावधान नही हैं. जबकि बैंकिंग कारोबार के लिए रिजर्व बैंक से लाइसेन्स लेना अनिवार्य होता हैं. सोसायटियों मे जमाकर्ताओं के निवेश रूपयों की कोई सिक्युरिटी रिजर्व बैंक मे नही रहती.

याचिका मे ऐसी कईं सोसायटियों का उल्लेख किया गया था जो जमाएं लेकर बंद कर दी गई और संचालक फरार हो गये.

याचिका मे संजीवन क्रेडिट कोआॅपरेटिव सोसायटी, नवजीवन क्रेडिट कोआॅपरेटिव सोसायटी एवं सांईकृपा क्रेडिट कोआॅपरेटिव सोसायटी, मारवाड़ क्रेडिट कोआॅपरेटिव सोसायटी को भी पक्षकार बनाया गया था. हाईकोर्ट ने केन्द्र सरकार, राज्य सरकार एवं रिजर्व बैंक आॅफ इण्डिया को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया था.

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  • Published: 3 years ago on November 19, 2014
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  • Last Modified: November 19, 2014 @ 6:31 pm
  • Filed Under: देश

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. बैंकिंग व्यवसाय पर रोक के खिलाफ अपील करेंगे
    udkprth | May 27, 2015 | उदयपुर
    उदयपुर। सहकार भारती के अखिल भारतीय क्रेडिट प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय कार्यसमिति बैठक दिल्ली के दीन दयाल शोध संस्थान में संपन्न हुई। बैठक में सतीश मराठे राष्ट्रीय अध्यक्ष सहकार भारती मुख्य अतिथि थे। बैठक की अध्यक्षता कांति भाई पटेल अखिल भारतीय अध्यक्ष क्रेडिट प्रकोष्ठ द्वारा की गई। बैठक का संचालन विनय खटाउकार द्वारा किया गया।
    प्रकोष्ठ के अखिल भारतीय संगठन प्रमुख सुनील गुप्ता अधिवक्ता ने बताया की बैठक में राजस्थान प्रांत के क्रेडिट प्रकोष्ठ प्रमुख हरी राम खत्री ने विषय उठाया कि १४ मई को राजस्थान उच्च न्यायालय ने डी. बी. सिविल रिट पेटिशन क्रमांक 26/2013 सज्जन सिंह भाटी बनाम स्टेट ऑफ राजस्थान और अन्य के मामले में दो सदस्यों वाली पीठ के माननीय न्यायाधीश अजित सिंह और सुनील अम्बानी ने अपना अंतिम निर्णय सुना दिया है।
    उक्त मामले में उच्च न्यायलय में मुख्य बिंदु यह था कि राजस्थान कोआपरेटिव सोसाइटी एक्ट 2001 और मल्टी स्टेट कोआपरेटिव सोसाइटी एक्ट 2002 के तहत पंजीकृत सोसाइटी आरबीआई से बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट की धारा 22 के तहत लाइसेंस लिये बिना बैंकिं ग व्यवसाय चला सकती है?
    मामले पर उच्च न्ययालय ने अपने निर्णय के पैराग्राफ 19 के अनुसार दायर मुकदमे के प्रतिवादी संख्या 9 से 12 और अन्य कोई भी कोआपरेटिव सोसाईटी और मल्टी स्टेट कोआपरेटिव सोसाइटी, जो राजस्थान कोआपरेटिव सोसाइटी एक्ट 2001 और मल्टी स्टेट कोआपरेटिव सोसाइटी एक्ट 2002 के तहत पंजीकृत है, वह किसी भी प्रकार की पूंजी, किसी भी योजना के तहत आम जनता से, जिसमें नॉमिनल मेंबर, सामान्य मेंबर और अन्य किसी भी प्रकार की मेम्बरशिप इन सोसाइटी में हो, केवल बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 की धारा 22 के तहत लाइसेंस प्राप्त करने के उपरान्त ही ले सकेंगी। निर्णय के पैराग्राफ 20 के अनुसार उक्त पाबंदी 3 महीने तक जमा राशि की अदायगी पर लागू नहीं होगी।
    यदि बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 की धारा 22 के तहत 3 महीने के अंदर प्रतिवादी 9-12 और अन्य कोआपरेटिव सोसाइटी राजस्थान राज्य की लाइसेंस प्राप्त करती है तो जमा पूंजी स्वीकार कर सकेंगी।
    सहकार भारती की बैठक में इस विषय पर चर्चा के उपरान्त सहकार भारती ने उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर करने का निर्णय लिया तथा इसके लिए सहकार भारती के मुकेश मोदी को अधिकृत किया।
    सहकार भारती की बैठक में यह भी तय हुआ की सहकार भारती उच्च न्यायालय के निर्णय का सम्मान करती है, लेकिन इस निर्णय से सहकारिता क्षेत्र की अन्य सभी हजारों सोसाइटी जो अपने सदस्यों के और देश के आर्थिक उत्थान में तथा रोजगार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण कार्य कर रही है, उनके अस्तित्व को बचाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का सहारा लेगी तथा सहकारिता क्षेत्र पर आने वाले हर संकट का सामना सहकारिता क्षेत्र की सुरक्षा के लिए करेगी।
    सहकार भारती की बैठक में आशंका जाहिर की गई कि उच्च न्यायालय के निर्णय की आड़ में राजस्थान पुलिस और सहकारिता विभाग द्वारा अनावश्यक रूप से कोआपरेटिव सोसाइटियों को परेशान किया जा सकता है इसलिए सहकार भारती पुलिस प्रशासन और सहकारिता विभाग से संपर्क करेगी तथा राजस्थान के सहकारिता मंत्री और गृह मंत्री से भी मिलकर सोसाइटियों की सुरक्षा के लिए ज्ञापन देगी।

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