/मानव तस्करी में खोये अपने चार बच्चों के लिए एक पिता का संघर्ष..

मानव तस्करी में खोये अपने चार बच्चों के लिए एक पिता का संघर्ष..

-कमल पन्त||

दिल्ली में एक बच्ची से बलात्कार की वारदात की रिपोर्टिंग के दौरान एक ऐसे व्यक्ति से मुलाकात हुई जिसके चारों बच्चे मानव तस्करी का शिकार हैं. साथ ही उसके हालात ऐसे है कि पुलिस उसकी मदद नहीं कर रही, उसके सभी कागज़ात चोरी हो गए हैं, अपने बच्चों की केवल एक की तस्वीर उसके पास उपलब्ध है और तस्कर उसे लगातार परेशान कर रहे हैं. लेकिन इन तमाम परेशानियों के बाद भी वह एक उम्मीद के सहारे न्याय की आस में बैठा है. मध्य प्रदेश से दिल्ली आए इस व्यक्ति की कहानी किसी फिल्म की स्टोरी सी लगती है जिस कारण शायद इसे सुनने वाला व्यक्ति इसकी कहानी सुनता है और चला जाता है.469014073

दो महीने से जंतर मंतर पर बैठे यह व्यक्ति किसी प्रकार का धरना नहीं दे रहे हैं. यदि उन्हीं के शब्दों में कहूं तो “यहां चारों तरफ सीसीटीवी कैमरे लगे हैं अगर कल के दिन मुझे कुछ हो जाता है तो कम से कम पुलिस के पास सुबूत तो रहेगा.” पांडेय (काल्पनिक नाम) के बच्चों के अगवा होने की कहानी शुरू होती है आज से करीब ढाई साल पहले. विभिन्न शहरों में होने वाले मेलों में जाकर पांडेय चाईनीज खिलौनों की दुकान लगाया करते थे. उसके बच्चे और पत्नी भी दुकानदारी में मदद करने के लिए इन मेलों में उनके साथ जाया करते थे. इसी बीच अजमेर राजस्थान के पास एक मेले के दौरान उनकी मुलाकात कुछ ड्रग डीलरों से हुई जिन्होंने मेले में लगी उनकी दुकान में एक पैकेट रख दिया. पांडेय के अनुसार उन्हें पता ही नहीं था कि उस पैकेट में क्या है और पैकेट रखने वाले प्रशासनिक कर्मी ही लग रहे थे.

अगले दिन जब उन्होंने पैकेट वापस करना चाहा तो उन्हें दो विकल्प दिए गए कि पहला पैकेट में रखी पुड़िया को मेले में बेचो और प्रति पुड़िया 50 रुपये कमाओं या फिर दूसरा तुम्हारी शिकायत पुलिस में कर दी जाएगी और ड्रग्स के आरोप में जेल चले जाओगे. ड्रग डीलर उन्हें तकरीबन अपनी पकड़ में कर चुके थे. उनके लिए एक तरफ कुआं दूसरी तरफ खाई थी लेकिन पांडेय ने ड्रग डीलर के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी. इसके बाद स्थानीय पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और ड्रग डीलर को ड्रग्स के साथ गिरफ्तार कर लिया लेकिन बाद में पुलिस द्वारा उन्हें छोड़ दिया गया.

पुलिस कार्रवाई करने के बदले अगले दिन मेले से पांडेय के तीनों बच्चों को उठा लिया गया. पांडेय के द्वारा गिरफ्तार कराए गए लोगों में से एक ने बताया कि उनके बच्चे अब उन्हें कभी भी नहीं मिलेंगे. इसके बाद पांडेय ने दुबारा पुलिस में शिकायत की लेकिन वहां उनकी एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई.

कुछ समय तक बच्चों की तलाश के लिए पांडेय ने पुलिस की कार्रवाई का इंतज़ार किया पर जब उन्हें लगा कि अब कहीं से कोई मदद नहीं मिलेगी तो उन्होंने खुद ही अपने बच्चों की तलाश शुरू कर दी. मेलों में जाकर उन ड्रग डीलरों की जानकारी एकत्र करते रहें. इस दौरान उन्हें मानव तस्करी के गैंग का पता चला. फिर एक के बाद एक उन्हें नए-नए मानव तस्करों के बारे में पता चलता गया. राजस्थान से दिल्ली के बीच में बच्चों की तस्करी करने वाले लोगों का पता चला फिर वहां से उन्हें अपने बच्चों के मिलने की कुछ उम्मीद नज़र आई. कुछ समय बाद उन्हें अपने बच्चों का तो पता नहीं चल पाया पर रैकेट कैसे काम करता है और किस तरह के सफ़ेदपोश इसमें शामिल हैं उन्हें पता चल गया.

तस्करों की तरफ से पांडेय को ऑफर दिया गया कि दो लाख रुपये नगद और उनके लिए हर महीने एक बच्चा लेकर आए जिसके बाद वे एक-एक करके उनके बच्चों को वापस कर देंगे. अपने बच्चों से मिलने के लिए तरस रहे पांडेय ने कुछ समय के लिए तस्करों की बात मान ली और 50000 रुपये तस्करों को दे दिए पर अपने बच्चों के लिए किसी और के बच्चों को तस्करों के हवाले करना पांडेय को मंजूर नहीं था. अपने तीन बच्चों की तलाश करते हुए पांडेय ने इंदौर से एक 22 साल की लड़की को मानव तस्करों से छुड़वाया भी लेकिन पांडेय अपने बच्चों को नहीं ढूंढ पाएं. अपने बच्चों की तलाश में अजमेर, जयपुर, दिल्ली, इंदौर भोपाल से लेकर अहमदाबाद तक पांडेय ने सभी जगह की ख़ाक छान ली पर उन्हें कोई विशेष जानकारी नहीं मिली. मुम्बई के एक मानव तस्कर के द्वारा उन्हें यह खबर मिली कि उनका बेटा दिल्ली में मौजूद है जिसे पाने के लिए पांडेय दो महीने पहले दिल्ली चले आए.

दिल्ली पहुंचने के बाद पांडेय ने पुलिस से मदद मांगी लेकिन उनकी फरियाद कागज़ात नहीं होने के कारण दबा दी गई. तब से लेकर अब तक पांडेय जंतर मंतर पर ही बैठे हैं. हाल ही में पांडेय ने पुलिस की सहायता करके कई मानव तस्करों को पकड़वाया भी है. पांडेय का कहना है कि एक बच्ची के अपहरण के हाई प्रोफाइल मामले के दौरान दिल्ली पुलिस ने उनके द्वारा बताए गए ठिकानों पर दबिश भी दी लेकिन उस बच्ची के नहीं मिलने तक उन्हें भूखा प्यासा थाने में ही रखा गया. फिलहाल कुछ सामाजिक कार्यकर्ता पांडेय को उनके बच्चों से मिलाने की कोशिश कर रहे हैं.

सौजन्य: iamindna

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