/कांग्रेस ने मोदी सरकार के ‘यू-टर्न’ पर जारी की बुकलेट..

कांग्रेस ने मोदी सरकार के ‘यू-टर्न’ पर जारी की बुकलेट..

कांग्रेस ने मोदी सरकार के 6 महीने के कार्यकाल के दौरान विभिन्न मुद्दों पर यू-टर्न लेने का आरोप लगाते हुए एक बुकलेट जारी की है. इस बुकलेट में बताया गया है कि सत्ता में आने से पहले बीजेपी ने क्या-क्या वादे किए थे और सत्ता में आने के बाद कैसे वह उनसे पलट गई. ‘6 महीने पार, यू टर्न सरकार’ टाइटल वाली इस बुकलेट में विभिन्न मुद्दों पर बीजेपी सरकार की 22 ‘पलटियों’ का जिक्र किया गया है.U-turn

इस बुक को जारी करने के बाद कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा कि पिछले 6 महीने में बीजेपी सरकार 25 यू-टर्न ले चुकी है. उन्होंने कहा कि किताब में सिर्फ 22 यू-टर्न का जिक्र है, किताब छपने के लिए भेजने के बाद सरकार ने 3 और मुद्दों पर यू-टर्न ले लिया.

माकन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को बांग्लादेश के साथ जमीन की अदला-बदली करने की बात कही, जबकि पिछले साल अरुण जेटली ने हमें चिट्ठी लिखी थी और इस कदम को राष्ट्र विरोधी करार दिया था. उन्होंने पूछा कि सोच में इतना बदलाव कैसे आ गया.

इस बुकलेट में सरकार की अहम नीतियों पर निशाना साधा गया है. रेल किराया, ब्लैक मनी, इंश्योंरेंस सेक्टर में एफडीआई 26 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी करने, पूरे देश में समान वस्तु और सेवा कर लाने, भूमि अधिग्रहण और फूड सिक्यॉरिटी कानून जैसे मुद्दों पर बीजेपी का घेराव किया है.

अजय माकन ने कहा कि बीजेपी ने विपक्ष में रहते हुए इश्योरेंस बिल और गुड्स ऐंड सर्विसेज़ टैक्स का विरोध किया था, मगर अब वह पार्टियों से अपील कर रही है कि राष्ट्रहित में इनका समर्थन करें. इसी तरह से बीजेपी ने पिछली यूपीए सरकार के भूमि अधिग्रहण और फूड सिक्यॉरिटी ऐक्ट का समर्थन किया था, लेकिन अब वह उन्हें दरकिनार करती दिख रही है.

राइट-टु-फूड, मनरेगा और आधार कार्ड पर सरकार के बदले हुए स्टैंड को भी निशाने पर लिया गया है. अजय माकन ने कहा कि बीजेपी सरकार नया कुछ नहीं कर रही, बस पिछली सरकार की नीतियों की नकल कर रही है. माकन ने कहा कि बीजेपी ने इलेक्शन से पहले सिर्फ सपने दिखाए थे और अब वह अपने वादों को भूल चुकी है. उन्होंने कहा कि सत्ता के लालच में बीजेपी अंधी हो गई थी.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.