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भूपेंद्र सिंह हुडा ने नेस्ले के गैरकानूनी तरीके से व्यापार को हौंसला बुलंद किया था..

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नेस्ले कंपनी का बच्चों का डिब्बाबंद दूध अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड है कह कर भूपेंद्र सिंह हूडा-ने  किया था नेस्ले का बचाव..  अब  कार्यवाही हो रही है पीएमओ के हस्तक्षेप पर..

– पवन कुमार बंसल ||
नवजात शिशु के लिए माँ का दूध सर्वश्रेष्ठ है. इन्फेंट मिल्क सब्सिटियुट एक्ट के मुताबिक कोई भी कंपनी बच्चो के लिए बेचने वाले अपने उत्पादों पर ऐसे लेबलिंग नहीं कर सकती, जिससे यह आभास हो कि उनका उत्पाद माँ के दूध के बराबर है. हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हूडा के गृह नगर रोहतक में जुलाई 2012 में हैल्थ महकमे के अधिकारीयों डॉ अमरजीत राठी तथा कुलदीप सिंह ने नेस्ले के डिस्ट्रीब्यूटर सतनारायण की दूकान पर छपा मारकर नेस्ले की डिब्बाबंद दूध की तीन सैम्पल लिए. टीम में फ़ूड व ड्रग महकमे की अफसर मनमोहन तनेजा तथा ओ गवाह मंगल से और अंकुर भी थे.fight-the-nestle-monster-logo-from-baby-milk-action-2

bhupinder-singh-hooda-1409753538एक महीने बाद पानीपत की समालखा की पास पट्टी कल्याण में नेस्ले कंपनी के गोदाम पर छापा मारकर सैम्पल लिए . जाँच में पाया गया की नेस्ले की उत्पादों में इस तरह लेबलिंग की है जिस से लगे कि उनका दूध माँ की दूध की समान है . नियमानुसार विभाग को नेस्ले कंपनी के खिलाफ अदालत में इन्फेंट मिल्क सब्सिटियुट एक्ट के तहत केस दायर करना था . इसी बीच कंपनी के आला अधिकारी स्विट्जऱलैंड से चंडीगढ़ आये और हूडा से मदद की गुहार लगाई .

अधिकारियों की सलाह के बावजूद हूडा ने कंपनी की दूसरी यूनिट का न केवल उद्घाटन किया बल्कि सार्वजानिक मंच से हरियाणा में निवेश करने के लिए नेस्ले का धन्यवाद करते हुए कहा कि नेस्ले की उत्पाद विश्व स्टैण्डर्ड के है. जब हुड्डा द्वारा नेस्ले कंपनी की सार्वजनिक प्रशंसा करने के बाद स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों की सिटी पिटी गुम हो गई. उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस मामले में धीमा चलें.

कानून के मुताबिक तीन वर्ष के अंदर केस दर्ज करना आवश्यक होता है. दो वर्ष बीत गए और इसी तरह तीन वर्ष भी बीत जाते. लेकिन इसे कंपनी का दुर्भा’य कहें कि इसी दौरान केंद में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गए. प्रधानमंत्री की न्यूट्रिशन चैलेंजिज कौंसिल के सदस्य डा. अरुण गुप्ता ने एफडीए हरियाणा के तत्कालीन आयुक्त राकेश गुप्ता को चिट्ठी लिखकर पूछा कि इस मामले में अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? इधर हुड्डा की सरकार दोबारा बनने कीउम्मीद भी कम हो गई थी. उन्हीं अधिकारियों ने जो हुड्डा के इशारे पर इस मामले को दबाए बैठे थे, ने आनन फानन में रोहतक के सीजीएम की अदालत में नेस्ले कंपनी के खिलाफ केस दर्ज किया. अदालत ने कंपनी के अधिकारियों को छह जनवरी को पेश होने का आदेश दिया लेकिन पानीपत के मामले में अभी भी अदालत में केस दायर नहीं किया गया है.

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