Loading...
You are here:  Home  >  राजनीति  >  Current Article

यदि भले लोग राजनीति में आ गए तो ये सब राजनेता बेरोजगार हो जायेंगे..

By   /  December 10, 2014  /  2 Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

यों तो लोग नेताओं और अधिकारियों के भ्रष्टाचार की बड़ी बड़ी बातें करते हैं लेकिन उनके घर समारोहों में बिना बुलाये ही जाना अपना सौभाग्य समझते हैं जबकि किसी व्यक्तिगत या सामाजिक समारोह में भी नेता और बड़े अधिकारी धन भेंट देने पर ही आते हैं – अन्य काम की बात तो छोड़ देनी चाहिए . स्वास्थ्य लाभ के लिए हमारे राजनेता और बड़े अधिकारी एक बार मसाज पर ही 5-7 हजार खर्च कर देते हैं, उससे जुडे मनोरंजन और अन्य आतिथ्य व्यय तो अलग हैं . प्रश्न पूछने तक के लिए धन लिया जाता है .politician-clipart-politician

सता तो वैसे ही लक्ष्मी की चेरी होती है है . एक धर्म पंथ के धर्माचार्य का स्वर्गवास हो गया . उस पंथ के सम्पूर्ण भारत में ही साढ़े चार लाख मात्र अनुयायी हैं किन्तु आचार्य की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति, पूर्व राष्ट्रपति, कई प्रमुख मंत्री, विपक्ष के नेता आदि सभी पधारे क्योंकि वह सम्प्रदाय व्यापारी वर्ग का है और देश की अर्थ व्यवस्था में हस्तक्षेप रखता है और चंदे के नाम पर राजनेताओं को प्रोटेक्शन मनी देता है वरना इतने से लोगों के धर्माचार्य की अंतिम यात्रा में कौन सा नेता आने को तैयार होगा .

देश की क्षुद्र राजनीति में न तो भले लोगों के लिए कोई प्रवेश द्वार हैं और यदि संयोगवश कोई आ भी जाए तो उसके पनपने के अवसर नहीं हैं, उनके पर कतर दिये जाते हैं . इस कला में भाजपा, कांग्रेस और बसपा आदि कोई पीछे नहीं है . वैसे भी भले लोग देश का आखिर भला ही चाहते हैं अत: वे राजनीति में नहीं आना चाहते . उन्हें नेता कहलवाना एक गाली लगता है . आज सफ़ेदपोश अपराधी, गुंडे, बदमाश , माफिया राजनीति में सक्रीय हैं और रिमोट से देश की राजनीति को संचालित कर रहे हैं . यदि भले लोग राजनीति में आ गए तो ये सब राजनेता बेरोजगार हो जायेंगे और अपने पुराने धंधों में लौट आयेंगे जिससे देश में अपराध , अराजकता, अशांति बढ़ जायेगी . यदि भले लोगों को देश की राजनीति कोई महत्व दे तो उनका सक्रीय होना आवश्यक नहीं है अपितु उनके दिये गए जन हितकारी सुझावों पर अमल करना ही अपने आप में पर्याप्त है . अपराधियों और राजनेताओं के अपवित्र गठबंधन के सम्बन्ध में वोरा कमिटी द्वारा 21वर्ष पूर्व दी गयी सलाह पर कार्यवाही की अभी प्रतीक्षा है .सरकारें सुधार की बिलकुल भी इच्छुक नहीं हैं -जब पूर्ण बहुमत में होती हैं तब मनमानी करती हैं और अल्पमत में होने पर रोना रोती हैं कि वे सहयोगियों के अनुसार ही चल सकती हैं . पूर्व में जब समस्त निर्माण कार्य सार्वजनिक विभाग के माध्यम से होते थे तो जन प्रतिनिधि ( विधायक और सांसद) बिलकुल कडाके के दिन गुजारते थे इसलिए वे इन कामों की शिकायतें करते रहते थे . सरकार ने इस शिकायत को दूर करने और जन प्रतिनिधियों को खुश करने के लिए सांसद और विधायक निधि की योजनाएं बना डाली हैं . अब जन प्रतिनिधियों की मंजूरी से ही यह निधि खर्च होती है और मंजूरी के लिए खर्च करना पडना है .

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email
  • Published: 3 years ago on December 10, 2014
  • By:
  • Last Modified: December 10, 2014 @ 10:23 am
  • Filed Under: राजनीति

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. ashok says:

    राजनीति नहीं ये तो व्यापार है

  2. ashok says:

    जनहित मैं अपने सुखद कार्य किया है

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

पाकिस्‍तान ने नहीं किया लेकिन भाजपा ने कर दिखाया..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: