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करनाल: घोटाले पर घोटाला

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मौज में हैं सरकारी अधिकारी और बाबू .. जांच व एफ आई आर के बावजूद भी नहीं आया कोई काबू ..

-अनिल लाम्बा||

करनाल, किसी भी घोटाले को बिना किसी कार्रवाई के सालों तक दबाये रखना भी खुद में एक घोटाला है चण्डीगढ़ हाईकोर्ट द्वारा एच सी एस भर्ती घोटाले के सन्दर्भ में की गयी यह टिपण्णी यदि कोई पैमाना है तो करनाल के गाँव निगदू-पस्ताना स्थित प्राचीन मैथ से संबंधित सरप्लस भूमि आबंटन घोटाला विगत कांग्रेस सरकार द्वारा मामले को सालों साल तक दबाये रखने के घोटाले का एक प्रत्यक्ष नमूना है.KarnalTowerBig
इस घोटाले की जांच मुख्यमंत्री उडनदस्ते द्वारा मार्च 2007 में ही मुकम्मल कर तत्कालीन हुड्डा सरकार को सौंप दी गयी थी मुख्यमंत्री कार्यालय (सी एम ओ ) ने अरबों रुपये के इस भूमि घोटाले में बेहद ठंडा रुख अख्तियार किये रखा घोटाले से अवगत होने के बावजूद भी सरकार ने कोई भी कार्रवाई दोषी भू-माफिया और उससे साज-बाज रहे सरकारी अमले के खिलाफ शुरू ही नहीं की .
विगत सरकार का यह रुख बेहद संदिग्ध, रहसयपूर्ण एवं अचरजपूर्ण रहा मुख्यमंत्री उडनदस्ते द्वारा सी एम ओ को सौंपी गयी 9 पृष्ठीय जांच, अंतिम जांच रिपोर्ट के रूप में प्रस्तुत की गयी थी सरप्लस भूमि आबंटन घोटाले की यह कोई प्राथमिक जांच नहीं थी बल्कि अंतिम व निर्णायक जांच थी यह व्यापक जांच लगातार कईं साल चली थी
इस जांच में भू-माफिया के इलावा हरियाणा सरकार के राजस्व विभाग से सम्बंधित तत्कालीन अफसरों और कर्मचारियों को साफ़ तौर पर गैरकानूनी तरीके से जमीनों के आबंटन के लिए जिम्मेदार व दोषी ठहराया गया था इस जांच रिपोर्ट में साफ़ तौर पर यह जाहिर किया गया कि भू-माफिया और अधिकारियों द्वारा मिलीभगत कर नियमों की धज्जियां उड़ा दी गयीं और रिश्वत के रूप में भारी भ्रष्टाचार होना पाया गया .
भ्रष्टाचार बंद का नारा बुलंद करने वाली प्रदेश की विगत हुड्डा सरकार ने इस घोटाले में सिद्ध दोषियों के खिलाफ एक्शन लेने में कहीं कोई दृढ़ इच्छाशक्ति नहीं दिखाई उलटा हुड्डा सरकार लगातार 8 सालों तक इस घोटाले को पूरी ताकत के साथ दबाये रखने में जुटी रही.
यह मामला हरियाणा सरकार के राजस्व विभाग और उसके अंतर्गत आने वाले करनाल स्थित अलाटमेंट प्राधिकरण से सम्बंधित था जिसमें सैंकड़ों एकड़ सरप्लस जमीन को घोटाला कर आबंडित कर दिया गया था इस घोटाले में हरियाणा सरकार के कईं एच सी एस अधिकारी, नायब तहसीलदार, कानूनगो और पटवारी शामिल थे
कांग्रेस सरकार ने घोटाले की अंतिम जाँच रिपोर्ट प्राप्त होने के बावजूद तक़रीबन 8 सालों तक भू-माफिया और घोटालेबाज अफसरों के खिलाफ तब तक कोई कार्रवाई नहीं की थी जब तक यह मामला सिर्फ उसके स्तर तक ही सिमित रहा वर्ष 2014 में चण्डीगढ़ हाईकोर्ट द्वारा संज्ञान लेते ही कांग्रेस सरकार तत्काल हरकत में आ गयी क्योंकि हाईकोर्ट ने सरकार को घोटाले के सम्बन्ध में कार्रवाई बाबत नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर डाला था.
हाईकोर्ट के सम्मुख खुद को कार्रवाई के नाम पर खाली हाथ देख विगत सरकार ने आनन-फानन में इस घोटाले की एक एफ आई आर करनाल के थाना बुटाना में दर्ज कर ली लेकिन किसी भी सरकारी अफसर अथवा कर्मचारी को ना तो ससपेंड किया गया और ना ही गिरफ्तार.
स्वयं चण्डीगढ़ स्थित राजस्व मुख्यालय अपने डिठाईपूर्ण रवैये पर इस कदर बाज़िद रहा कि उसने घोटाले की रिपोर्ट और दर्ज एफ आई आर से वाकिफ होते हुए किसी भी अफसर और कर्मचारी को जवाब तलब तक नहीं किया यह नौबत तब रही जबकि कोई भी आरोपी अफसर और कर्मचारी शाशन प्रशाशन और न्यायालय में रिपोर्ट व एफ आई आर के खिलाफ फ़रियाद करने तक नहीं गया.
इस मामले में वर्तमान खट्टर सरकार भी पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार का ही अनुसरण करती नज़र आ रही है मौजूदा सरकार में भी उक्त घोटाले में संलिप्त अधिकारी और कर्मचारी निश्चिंतता की चादर ताने चैन व इत्मीनान से मौज में हैं मौजूदा सरकार भी उनके खिलाफ विभागीय स्तर पर अनुशाशनिक कार्रवाई करने से पूर्णतः परहेज बारात रही है.
यहां यह भी हैरत की बात है कि करनाल में घोटाले पर आगामी कार्रवाई के लिए गठित एस आई टी के बावजूद घोटाले में भू-माफिया से मिलीभगत के आरोपी अभी तक सी एम सिटी में ही तैनात हैं उनका यहां से तबादला तक नहीं किया गया उन पर जांच को प्रभावित करने और सरकारी पद के प्रभाव के दुरूपयोग के आरोप भी डेरे के पैरोकारों की और से लग चुके हैं विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जल्द ही करनाल के ए डी सी से पूछताछ करेगी एस आई टी.

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