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मैगजीन शार्ली एबदो के दफ्तर पर हमला करने वाले एक संदिग्ध ने किया आत्म समर्पण..

By   /  January 8, 2015  /  No Comments

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पेरिस में मैगजीन के दफ्तर पर हमला करने वाले एक संदिग्ध 18 साल के मौराद ने पुलिस के सामने सरेंडर किया है. तीन संदिग्धों की पहचान की गई थी. तीन में से एक संदिग्ध ने सोशल मीडिया में अपने नाम के चर्चा आने के बाद सरेंडर किया है. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है. हमले की जांच कर रही पुलिस ने तीन संदिग्धों की पहचान की थी. आतंकियों की तलाशी के लिए पेरिस और उसके आसपास के इलाकों में जबरदस्त तलाशी अभियान जारी है.150107-cherif-said-kouachi-912p_8c90d34082205d72b1bbd1187b0a9012.nbcnews-fp-1440-600

न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक फ्रेंच पुलिस ने बुधवार को मैगजीन शार्ली एबदो के दफ्तर पर हमला करने वाले तीन आतंकियों की पहचान की. पुलिस को दो सगे भाईयों और एक 18 साल के युवक पर हमले को अंजाम देने का शक है.

फ्रेंच पुलिस के मुताबिक शार्ली एबदो के दफ्तर पर हमला करने वाले दो संदिग्धों के नाम सैयद क्वाची और शेरीफ क्वाची हैं. ये दोनों सगे भाई हैं और फ्रांस के ही रहने वाले हैं.

फ्रेंच पुलिस के मुताबिक तीसरा हमलावर 18 साल का हैमद मोराद है. लेकिन मोराद कहां का रहनेवाला है ये अभी साफ नहीं है.

बताया जा रहा है कि शार्ली एबदो के दफ्तर पर हमले का संदिग्ध शेरीफ क्वाची 2008 में आंतकवाद के आरोपों में 18 महीने की कैद भी काट चुका है.

एसोसिएडेट प्रेस के मुताबिक शेरीफ क्वाची ने 2008 में केस की सुनवाई के दौरान कहा था कि वो अबु गरेब जेल में इराकी कैदियों पर अमेरिकी सैनिकों के अत्याचार की वजह से अमेरिका और उसके साथी देशों के खिलाफ लड़ाई लड़ना चाहता है.G._Wolinski_dédicaçant_à_la_fête_de_lHuma_2007-02-ALVARO-WIKIMEDIA

शार्ली एबदो के पत्रकारों की हत्या के विरोध में पूरे फ्रांस में एक लाख से भी ज्यादा लोगों ने आई एम शार्ली के नारे के साथ प्रदर्शन किया.

फ्रेंच पत्रिका शार्ली एबदो के पत्रकारों की हत्या के बाद पेरिस में पंद्रह हजार से ज्यादा लोगों ने एकजुट होकर मौन रखा. रेनेस शहर में भी हजारों लोग शोक सभा में हुए शामिल.

बड़े आतंकवादी हमले में 12 लोगों की मौत

हथियारों से लैस बंदूकधारियों ने इस्लाम समर्थक नारे लगाते हुए बुधवार को एक फ्रांसीसी व्यंग्य अखबार के दफ्तर में धावा बोल दिया और 12 लोगों की गोली मार कर हत्या कर दी. यह फ्रांस में पिछले कुछ दशकों का सबसे भयावह हमला था.

पुलिस ने नकाबपोश हमलावरों की धर पकड़ के लिए एक व्यापक अभियान शुरू कर दिया है. हमलावरों ने कथित तौर पर एक कार अगवा कर ली और वे जल्द ही भाग निकले.

पुलिस ने बताया कि प्रत्यक्षदर्शियों ने हमलावरों की आवाजें सुनी, जो एक स्वचालित रायफल कालशनिकोव और रॉकेट लाँचर से लैस थे. हमलावर जोर-जोर से ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगा रहे थे और कह रहे थे, ‘‘हमने पैगंबर का बदला लिया है’’.

पुलिस के मुताबिक हमले के तरीके को देखकर लगता है कि हमलावर अच्छी तरह प्रशिक्षित थे.

अधिकारियों के अनुसार मारे गये लोगों में चार जानेमाने कार्टूनिस्ट शामिल हैं. इसमें पत्रिका के मुख्य संपादक भी शामिल हैं. जो हमले के वक्त सुबह की बैठक ले रहे थे, तभी कालाशनिकोव से लैस हमलावरों ने गोलीबारी शुरू कर दी.

गोलीबारी के फौरन बाद मौके पर पहुंचे फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने इसे एक बर्बर आतंकवादी हमला बताया. हमने के बाद शूट किये गये एक वीडियो में देखा जा सकता है कि नकाबपोश दो लोग सिर से पैर तक सेना की वर्दी जैसे काले कपड़े पहने हुए हैं और रास्ते में गिर गये एक घायल पुलिसकर्मी की ओर भाग रहे हैं.

हमलावर को कहते सुना जा सकता है, ‘‘तुम मुझे मारना चाहते थे?’’ बाद में वे अधिकारी को गोली मारकर उसकी जान ले लेते हैं. उसके बाद वे अपने वाहन में सवार होकर फरार हो जाते हैं.

साप्ताहिक अखबार ‘शार्ली एबदो’ पर हुए हमले के बाद राजधानी पेरिस को अलर्ट के उच्चतम स्तर पर रखा गया है. इस अखबार में प्रकाशित पैगंबर मोहम्मद के कार्टूनों से अतीत में भी मुस्लिम समुदाय के लोग नाराज होते रहे हैं. टीवी फुटेज में इलाके में काफी संख्या में पुलिसकर्मियों, गोलियों से छलनी हुई खिड़कियों और स्ट्रेचर पर ले जाए जाते हुए लोगों को देखा जा सकता है.

मारे गये लोगों में दो पुलिसकर्मियों के मारे जाने की पुष्टि हो गयी है. चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गये हैं.

इराक और सीरिया में हुए संघर्ष का असर फ्रांस एवं अन्य यूरोपीय देशों में पड़ने की आशंका बढ़ने के बीच ये हमले हुए हैं. आईएस संगठन की ओर से लड़ने के लिए सैकड़ों की संख्या में यूरोपीय नागरिक इराक और सीरिया गए थे.

गोलीबारी के चश्मदीद रहे एक व्यक्ति ने बताया कि उसने स्थानीय समय के मुताबिक बुधवार सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे दो हमलावरों को ‘शार्ली एबदो’ में गोलीबारी करते हुए निकलते देखा.

इस व्यक्ति ने बताया, ‘‘मैंने उन्हें वहां से जाते और गोलीबारी करते देखा. वे नकाब पहने हुए थे.’’ राष्ट्रपति ओलांद ने राष्ट्रीय एकजुटता की अपील करते हुए कहा है, ‘‘हाल के हफ्तों में कई आतंकवादी हमलांे को नाकाम किया गया है.’’ व्हाइट हाउस (अमेरिका) ने हमले की सख्त शब्दों में निंदा की जबकि ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने इसे घिनौना करार दिया.

यह व्यंग्य अखबार फरवरी 2006 में पैगंबर मुहम्मद का कार्टून छापने को लेकर चर्चा में आया था, जिसे इस्लाम में ईशनिंदा माना जाता है. हालांकि, यह मूल रूप से डेनिश अखबार जेलैंड्स पोस्ट में प्रकाशित हुआ था जिसे ‘शार्ली एबदो’ ने दोबारा प्रकाशित किया था. इस कार्टून को लेकर मुस्लिम जगत में रोष छा गया था.

नस्लवाद रोधी कानूनों को लेकर अदालत में घसीटे जाने के बावजूद साप्ताहिक अखबार ने पैगंबर के कार्टून को प्रकाशित करना जारी रखा.

इससे पहले संपादक स्टीफन को जान से मारने की धमकियां मिली थी और उन्हें पुलिस हिफाजत मुहैया करायी गई थी.

मोहम्मद के अपमान का बदला

फ्रेंच मीडिया का कहना है कि जब हमलावर मैगजीन के दफ्तर में घुसे तब उन्होंने अल्लाहु अकबर का नारा लगाया. हमले को अंजाम देने के बाद हमलावरों ने कहा कि उन्होंने पैगमबर-ए-इस्लाम मोहम्मद साहिब के अपमान का बदला ले लिया है.

ग़ौरतलब है कि मैगजीन ने अपने कवर पर तीन साल पहले मोहम्मद साहिब का कार्टन छापा था. इसे लेकर साल 2011 में भी चार्ली हेबडो पब्लिकेशन हाउस के दफ्तर पर हमला किया था.

शार्ली एबदो एक व्यंग्य मैगजीन है और इसमें मुस्लिम नेताओं के व्यंग्यात्मक कार्टून छपे थे. खबरें ये भी है कि इस मैगजीन ने आईएसआईएस के मुखिया अबु बक्र अल बगदादी के भी कार्टून छापे थे.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अखबार के संपादक को पहले ही से हमले की धमकी दी जाती रही है. 2012 में स्टीफन ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि, “ना मेरे पास बीवी है, ना बच्चे हैं, और ना ही कार हैं घुटनों के बल जीने (डर-डर के जीने) से अच्छा होगा की मैं जान दे दूं .”

फ्रेंच राष्ट्रपति ने बुलाई इमरजेंसी मीटिंग

जैसे ही फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलांद को इस हमले की खबर मिली, वो फौरन घनास्थल पर पहुंचे और उन्होंने कैबिनेट की इमरजेंसी मिटिंग बुलाई.

फ्रांसुआ ओलांद ने कहा है कि ये मीडिया के खिलाफ आतंकवादी हमला है.

घटनास्थल पर पहुंचे ओलांद ने कहा, “ये एक आंतकी हमला है और इसकी निर्दयता की कोई इंतहा नहीं है. पिछले हफ़्तों में कई आतंकी हमलों को नाकाम किया गया था.”

ओलांद ने कहा ने कहा है कि आतंकियों ने पत्रकारों पर हमले किए हैं जिनकी आजादी और स्वतंत्रा फ्रांसीसी गणराज्य ने सुनिश्चित किए हैं.

क्या सूरक्षा में चूक हुई

पेरिस स्थित वरिष्ठ पत्रकार वैजू नरवणे का कहना है कि इसे सुरक्षा की चूक नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि फ्रांस में कभी कोई आतंकी हमला नहीं हुआ. उनका कहना है कि इस तरह की एक घटना को सूरक्षा में चूक नहीं कहा जा सकता. ये बहुत ही प्रोफेशल प्लानिंग के साथ आए थे.

वैजू नरवणे का कहना है कि शार्ली एबदो एक सेकुलर मिजाज का मैगजीन है और इस मैगजीन ने मोहम्मद साहिब का वो कार्टून छापा था और जिसे पहली बार नीदरलैंड के एक अखबार ने छापा था.

वैजू नरवणे का कहना है कि यह मैगजीन सभी एंटी सेकुलर फोर्स पर व्यंग्य करता है.

हमले की चौतरफा कड़ी निंदा

अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा और महारानी एलिजाबेथ ने फ्रांस के लिए शोक संदेश भेजे हैं.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान कि मून ने इस घटना को बर्बर और कायरतापूर्ण करार दिया है.

अरब लीग और मिस्र की जानी मानी इस्लामी अथॉरिटी अल अज़हर ने कहा कि ये ये हत्याएं अपराध की श्रेणी में आती है.

इस हमले के बाद इस्मामिक जानकार मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि इस्लाम किसी के कत्ल की इजाजत नहीं देता और आतंकवादी गतिविधि को मज़हब से नहीं जोड़ा जाना चाहिए.

फिरंगी महली ने कहा कि कुछ लोग भटके हुए हैं और उनकी गतिविधियों को इस्लाम के मुताबिक नहीं कहा जा सकता.

पीएम नरेंद्र मोदी ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की है.

फ्रांस में आतंकी हमले की देश में सभी राजनीतिक दलों ने निंदा की है. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि मीडिया की आवाज आतंक से नहीं दबाई जा सकती.

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