कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे [email protected] पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

सनसनीखेज राजफाश, तिहाड में हुई थी श्रीसंत की हत्‍या की कोशिश

0
Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज एस श्रीसंत को लेकर एक सनसनीखेज खुलासा किया गया है. दावा मशहूर मलयाली गायक मधु बालकृष्णन ने किया है. उन्‍होंने कहा कि क्रिकेटर एस श्रीसंत जब 2013 में आईपीएल स्‍पॉट फिक्सिंग के सिलसिले में तिहाड जेल में बंद था तो उसकी हत्या का प्रयास किया गया था.sreesanth_ipl_tihar

बालकृष्णन ने मलयालम टीवी चैनल को बताया, तिहाड जेल में श्रीसंत की हत्या का प्रयास किया गया था…एक दादा टाइप जो किसी की हत्या का आरोपी था, उसने श्रीसंत को एक हथियार से मारने का प्रयास किया. उस गुंडे ने वह हथियार दरवाजे के बोल्ट को पैना करके बनाया था लेकिन भाग्यवश श्रीसंत को कोई नुकसान नहीं हुआ.

श्रीसंत की बड़ी बहन के पति गायक बालकृष्णन ने चैनल को बताया कि श्रीसंत का तिहाड जेल में अनुभव बहुत ही खराब रहा. वह अभी तक मानसिक रुप से सदमे से उभर नहीं पाया है. उन्‍होंने कहा कि इस मामले की शिकायत श्रीसंत ने इसलिये नहीं की कि यह मामला तिहाड जेल में हुआ था.

सवालों के जवाब में बालकृष्णन ने कहा कि उनका परिवार अभी भी इस बात को मानता है कि श्रीसंत को बलि का बकरा बनाया गया. बालकृष्णन ने आरोप लगाया कि भारतीय क्रिकेट में कई खिलाड़ी आईपीएल फिक्सिंग कांड में अपराधी हैं लेकिन उनके नामों को उजागर नहीं किया गया जबकि श्रीसंत को संदेह के आधार पर दोषी बना दिया गया और गिरफ्तार किया गया.
श्रीसंत को जब दिल्ली पुलिस ने मुंबई में 2013 में गिरफ्तार किया था तो वह आईपीएल में राजस्थान रायल्स टीम के लिये खेल रहा था.
Facebook Comments
Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं
Share.

About Author

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

%d bloggers like this: