/योगेन्द्र यादव को AAP की PAC से हटाया..

योगेन्द्र यादव को AAP की PAC से हटाया..

आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने पार्टी के पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी [पीएसी] से आप के संस्थापक सदस्य योगेंद्र यादव को हटा दिया है। बुधवार को तकरीबन 4 घंटे तक चली बैठक के बाद कार्यकारिणी ने यह फैसला लिया। अरविंद राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल नहीं थे। बताया जा रहा है कि केजरीवाल आज ही बेंगलुरु रवाना होने वाले हैं, जहां रहकर वह दस दिनों तक अपना इलाज कराएंगे।63526
बैठक शुरू होने से पहले ही ‘आप’ में बढ़ती अंतर्कलह से आहत अरविंद केजरीवाल ने आज पार्टी के संयोजक पद से इस्तीफा दे दिया था। बैठक में इस पर भी चर्चा होगी, बैठक अभी जारी है। केजरीवाल ने अपनी व्यस्तता को इस्तीफे की वजह बताते हुए कहा था कि ‘वह केवल दिल्ली पर ध्यान देना चाहते हैं, इसलिए ही यह कदम उठाया है, क्योंकि दोनों जिम्मेदारियां निभाना मुश्किल हो गया है। लिहाजा, राष्ट्रीय कार्यकारिणी को यह लिखित इस्तीफा भेज दिया है।’
पार्टी के वरिष्ठ नेता आशुतोष और नवीन जयहिंद ने भी पुख्ता करते हुए कहा कि केजरीवाल ने इस्तीफे की पेशकश की है, जिस पर अब पीएसी की बैठक में निर्णय लिया जाएगा।
आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अरविंद के इस्तीफे पर चर्चा हुई कि नहीं यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी में केजरीवाल के अलावा 20 सदस्य हैं, जो अब इस बाबत वोटिंग के जरिए फैसला करेंगे। साथ ही मीटिंग में प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को पीएसी से बाहर करने तथा नई अनुशासन कमेटी के पुनर्गठन और चयन पर भी निर्णय संभव है। दरअसल, पार्टी नेता दिलीप पांडे ने इस पूरे विवाद पर योगेंद्र और प्रशांत की शिकायत पार्टी से की है।
उधर, इस विवाद की वजह माने जा रहे योगेंद्र यादव ने अरविंद के इस्तीफे की खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इससे पहले भी अरविंद ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी को अपना इस्तीफा भेजा था, लेकिन उसे मंजूर नहीं किया गया था। केजरीवाल सच्ची राजनीति के प्रतीक हैं और उन्हें इस पद पर बने रहना चाहिए।
पार्टी नेता संजय सिंह ने कहा कि अरविंद के इस्तीफे पर बैठक में चर्चा होगी, लेकिन पार्टी में अनुशानहीनता कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हालांकि वे किसी का नाम लेने से बचते हुए दिखाई दिए पर संकेत जरूर दिए कि ज्यादातर वरिष्ठ नेता इस विवाद को जन्म देने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के मूड में हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.