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आप समझ रहें हैं ना, प्रशासनिक अराजकता का राज्य बनता जा रहा है उत्तराखण्ड..

By   /  March 20, 2015  /  No Comments

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-चन्द्रशेखर करगेती||
बीते दिन विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान प्रदेश के राजस्व एवं भू प्रबंधन विभाग की जमकर पोल खुली. इसे उत्तराखण्ड का दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि पिछले चौदह वर्षों में किसी भी मुख्यमंत्री एंव राजस्व मंत्री रहे राजनेताओं में इतनी प्रशासनिक समझ नही थी कि राजस्व महकमे जैसे महत्व महकमे के मर्ज को समझ पाते, अगर सच में ही अगर कोई लायक रहा होता तो पुरे राज्य में नायब तहसीलदारों और तहसीलदारों के करीब 85 फीसदी नियमित पद रिक्त नही होते.Uttarakhand

यह गौरतलब है कि राज्य का नब्बे फीसदी हिस्सा पहाड़ी है और पहाड़ों में अपराध नियंत्रण के साथ-साथ भू प्रबंधन का जिम्मा देख रहे लेखपालों के भी पुरे राज्य में लगभग 50 फीसदी से अधिक पद खाली हैं. यह ताज्जुब की बात है कि बीते आठ वर्षों में इनकी भर्ती के लिए किसी भी सरकार ने कोई गंभीर प्रयास नहीं किये और ना ही वर्तमान सरकार इस दशा में प्रयासरत है.

बुधवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान सत्ता पक्ष के ही विधायक ललित फर्स्वाण की ओर से तहसीलदार और नायब तहसीलदारों के रिक्त पदों और उनकी तैनाती को लेकर पूछे गए प्रश्न पर सरकार से जवाब देते नही बना.

यह राज्य के वर्तमान राजस्व मंत्री यशपाल आर्य और प्रमुख सचिव राजस्व का नकारापन ही है कि वर्तमान में पुरे प्रदेश में नायब तहसीलदारों के 132 सृजित पदों के सापेक्ष केवल मात्र 22 नायब तहसीलदार ही तैनात हैं, तहसीलदारों के 103 सृजित पदों के सापेक्ष केवल मात्र 19 ही तैनात हैं.
यही हाल मुख्यमंत्री हरीश रावत और अपर मुख्य सचिव एस० राजू के नेतृत्व वाले समाज कल्याण विभाग का भी है, पुरे राज्य में जहाँ वर्तमान में 13 पूर्ण कालिक समाज कल्याण अधिकारी होने चाहिए थे, जिनके द्वारा जिला कार्यालयों का सञ्चालन किया जाना था, लेकिन राज्य निर्माण की तिथी से लेकर वर्तमान तक राज्य के किसी भी एक जिले में एक भी नये पूर्णकालीक जिला समाज कल्याण अधिकारी तैनात नहीं हुई है.

आज राज्य की 80 फीसदी जनता को लाभान्वित करने वाले समाज कल्याण विभाग के जिला कार्यालय नेताओं और अफसरों के चहेते नकारा एंव ग्राम पंचायत स्तर क तृतीय श्रेणी के कर्मिकों के कब्जे में हैं,जिन्हें अवैधानिक रूप से आहरण वितरण अधिकार भी अपर मुख्य सचिव एस० राजू द्वारा दिए गये हैं, जिनके चलते विभाग द्वारा राज्य की गरीब जनता को लाभान्वित करने हेतु केन्द्र व राज्य वित्त पोषित योजनाओं में नित नये-नये घोटालों की खबरें सामने आती जा रही है.

समाज कल्याण विभाग में प्रशानिक अराजकता का आलम यह है कि जूनियर अधिकारी नेताओं और अफसरों से मिलीभगत कर विभाग के उच्च पदों पर आसीन है और सीनीयर अधिकारी या तो घर बैठे हैं या फिर निम्न स्तर पर कार्य करने को मजबूर है, और यह सब ‪#‎हरीशरावत‬ की सरकार में हो रहा है जिन्हें हर समय जमीनी राजनेता कह कर प्रचारित किया जाता रहा है !

अब #हरीशरावत सरीखे जमीनी राजनेता के नेतृत्व में प्रदेश की जनता से सीधे रूप से जुड़े विभागों में ऐसी मनमानी और प्रशासनिक अराजकता हो तो समझा जा सकता है ‪#‎उत्तराखण्ड‬ किस गर्त की और जा रहा है, और सीधे-सीधे जनता का गुनहगार कौन है ??

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  • Published: 3 years ago on March 20, 2015
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  • Last Modified: March 20, 2015 @ 11:57 am
  • Filed Under: राजनीति

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