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भ्रष्टाचार की हद पार: बाड़मेर में पहले नरेगा में दो बार बनी, अब बी ऐ डी पी में ग्रेवल सड़के

By   /  March 24, 2015  /  No Comments

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-चन्दन सिंह भाटी।।

बाड़मेर, बाड़मेर जिले में संचालित सरकारी योजनाए अधिकारियो के घर भरने के लिए वरदान साबित हो रही हे।बाड़मेर जिले के सरहदी इलाको में हाल ही में सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत 37 ग्रेवल सडको के निर्माण के लिए सार्वजानिक निर्माण विभाग ने निविदाएं आमंत्रित की थी जबकि उक्त सभी योजनाए पूर्व में नरेगा योजना में एक बार नही दो दो बार बन चुकी हैं।मौके पर ग्रेवल सड़के मौजूद हे फिर भी बी ऐ डी पी स्कीम के रहत pwd द्वारा एस्टिमेट बना कर निविदाएं  आमंत्रित की गयी।

डेमो चित्र

डेमो चित्र

एक सड़क की प्रति किलोमीटर रेट लगभग बारह लाख रुपये आती हे।37 सड़के पूर्व में बनी हुई हे।यानी बी ऐ डी पी का मार्का लगेगा जबकि अधिकारी और ठेकेदार मिल कर सरकारी पैसा हड़प जाएंगे। ठेकेदारों और अधिकारियो के बीच कमीशनखोरी का करार हो चुका है।अभी तक चूँकि निविदाएं खोली नही गयी मगर इन कार्यो पर काम पूरा हो चुका हे।सूत्रों के अनुसार एक ही सड़क तीन तीन बार बनेगी बिना काम करोडो रुपये बाँटेंगे।काम नरेगा का  भुगतान फिर BADP से उठेगा।

जिला कलेक्टर बाड़मेर को चाहिए BADP में इन सैंतीस परियोजनाओं के स्वीकृति की जांच कराई जाए साथ ही तत्काल इन सडको को मौका रिपोर्ट मांगी जाए। इसके लिए उच्च स्तरीय अधिकारी से जान कराई जाए।सारा सच सामने आ जाएगा।करोडो रुपयो की हेरा फेरी होने जा रही हैं।

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  • Published: 3 years ago on March 24, 2015
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  • Last Modified: March 24, 2015 @ 9:31 am
  • Filed Under: देश

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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