/सऊदी अरब ने यमन में शुरू की सैन्य कार्रवाई..

सऊदी अरब ने यमन में शुरू की सैन्य कार्रवाई..

अमरीका में सऊदी अरब के राजदूत ने कहा है कि उनके देश ने यमन में शिया हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू कर दिया है.
राजदूत अब्देल अल ज़ुबैर ने कहा कि राष्ट्रपतिअब्द्रब्बुह मंसूर हादी की वैध सरकार की रक्षा के लिए सऊदी अरब ने कार्रवाई शुरू की है.
ईरान के समर्थन वाले विद्रोहियों ने हाल के दिनों में अपनी पकड़ मज़बूत की है, इस वजह से हादी को राजधानी सना छोड़नी पड़ी.1200x-1

अमरीकी ख़ुफिया फ़ाइल
वहीं अमरीकी अख़बार ‘लांस एंजिल्स टाइम्स’ की एक ख़बर के मुताबिक़ विद्रोहियों ने अमरीकी खुफिया फ़ाइलें जब्त की हैं. जिनमें यमन में अमरीकी अभियान का वर्णन है.

अब्देल अल ज़ुबैर ने कहा कि वाशिंगटन में सऊदी अरब के अभियान में हवाई हमले भी शामिल हैं. उनके मुताबिक़ हमले रात 11 बजे (जीएमटी) शुरू हुए.
उन्होंने कहा कि खाड़ी के देशों ने अभियान का समर्थन किया है.
राजदूत ने कहा कि अपने पड़ोसी देश के लोगों और यमन की वैध सरकार की रक्षा के लिए जो भी ज़रूरी होगा सऊदी अरब करेगा.

राष्ट्रपति पर इनाम

इसके पहले बुधवार को सऊदी अरब ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा था कि उसकी यमन में सैन्य हस्तक्षेप की कोई योजना नहीं है. सऊदी का कहना था कि यमन से लगती सीमा पर सैन्य बलों का जमावड़ा केवल अपनी रक्षा के लिए है.
बुधवार को आई ख़बरों में कहा गया था कि हूती विद्रोहियों के दक्षिणी बंदरगाह शहर में बढ़ता हुआ देखकर राष्ट्रपति हादी अपना महल छोड़कर अदन चले गए हैं.
सरकारी अधिकारियों ने इस बात का खंडन किया था कि राष्ट्रपति देश छोड़कर चले गए हैं. उनका कहना था कि वो अदन में बने हुए हैं.
हादी ने अभी हाल में संयुक्त राष्ट्र से कहा था कि वो हूती विद्रोहियों के खिलाफ़ सैन्य कार्रवाई के लिए उत्सुक देशों का समर्थन करे.
इस बीच विद्रोहियों के कब्जे वाले यमन के सरकारी टीवी चैनल ने भगोड़े राष्ट्रपति को पकड़ने वालों के लिए इनाम की घोषणा की है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.