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CAG: वाड्रा को अनुचित फायदा दिया था भूपिंदर हूडा ने..

By   /  March 26, 2015  /  No Comments

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कांग्रेस की सरकार के दौरान रॉबर्ट वाड्रा की स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी सहित अन्य बिल्डरों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने पूर्ववर्ती सरकार की खिंचाई की है।robertvadra
हरियाणा विधानसभा में बुधवार को पेश 2013-14 की रिपोर्ट में सरकारी अंकेक्षक ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को आड़े हाथों लिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विभाग ने सैद्धान्तिक मंजूरी देते समय और लाइसेंसों के औपचारिक स्थानांतरण के समय यह सुनिश्चित नहीं किया कि कुल लागत पर 15 प्रतिशत से अधिक का लाभ सरकार के खाते में जाए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे डेवलपर्स को सिर्फ जमीन बेचने से ही भारी मुनाफा हुआ और वहीं सरकार को एक अच्छी खासी राशि का नुकसान उठाना पड़ा। बीजेपी और कांग्रेस के अन्य प्रतिद्वंद्वी दलों ने पूर्ववर्ती भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार के समय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा को रीयल्टी कंपनी डीएलएफ के साथ भूमि सौदे में अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया था।
हालांकि, रिपोर्ट में वाड्रा का नाम नहीं लिया गया है। इसमें उनकी कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी का नाम जरूर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने 2008 में डीएलएफ को गुड़गांव के मानेसर में एक प्रमुख 3.5 एकड़ जमीन 58 करोड़ रपये में बेची थी। इससे पहले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने इस भूमि सौदे को रद्द करते हुए इसे गैरकानूनी बताया था।
हालांकि, पूर्ववर्ती हुड्डा सरकार ने इस भूमि सौदे में वाड्रा को क्लीन चिट दे दी थी। कैग ने आंतरिक सर्कुलेटिंग व अप्रोच में सड़कों के विकास में अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा व्यवहार के तहत वाणिज्यिक स्थल या साइट्स पर आंतरिक सड़कों के जरिये पहुंचने की सुविधा होनी चाहिए। स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लि. के मामले में ऐसा नहीं किया गया।

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  • Published: 3 years ago on March 26, 2015
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  • Last Modified: March 26, 2015 @ 9:39 am
  • Filed Under: अपराध

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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