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अपर निदेशक पर रूबी चौधरी ने लगाये नौकरी के नाम पर रिश्वतखोरी के आरोप..

मसूरी के लाल बहादुर अकादमी में जासूसी का मामला- उत्तराखंड पुलिस पर पड़े छींटे.. मसूरी के लाल बहादुर अकादमी में जासूसी की आरोपी महिला को एस पी सिटी अजय सिंह ने विधान सभा के सामने स्थित गेस्ट हाउस में क्यों रुकवाया हुआ था और उसके फरार होने का समाचार उडाया हुआ था..

-चंद्रशेखर जोशी||

जिस महिला के नाम पर मसूरी के लाल बहादुर अकादमी में जासूसी व अवैध तरीके से रहने का आरोप था उसी महिला रूबी चौधरी को एस पी सिटी अजय सिंह पर विधानसभा के सामने गेस्ट हाउस में रुकवाने के आरोप महिला ने लगाये हैं महिला ने आरोप लगते हुए कहा कि संस्थान के अपर निदेशक सौरभ जैन ने नौकरी लगाने के नाम पर उसने 20 लाख रुपयों में सौदा किया था, जिसमे से 5 लाख रुपये वो अग्रिम ले चुका था. महिला रूबी चौधरी पर संस्थान ने छह महीने से अवैध तरीके से रहने और फर्जी आई डी रखने का आरोप लगाया था रूबी चौधरी ने कहा कि वह अवेध तरीके से नहीं रही बल्कि सौरभ जैन के की थी मेरे रुकने की व्यवस्था.

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मामले के खुल जाने पर उत्तराखंड पुलिस पर भी छींटे पड़े हैं कि आखिर जिस महिला रूबी चौधरी पर मसूरी थाने में अपराधिक मामला दर्ज किया गया था उसको एस पी सिटी अजय सिंह ने विधान सभा के सामने स्थित गेस्ट हाउस में क्यों रुकवाया. पत्रकार राजेन्‍द्र जोशी की रिपोर्ट के अनुसार लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) में छह माह तक एक महिला फर्जी एसडीएम बनकर जासूसी करती रही और किसी को खबर तक नहीं हुई. अकादमी के एक आला अधिकारी के मौखिक निर्देशों के बाद अकादमी में दाखिल हुई महिला गार्ड रूम में रहती थी और अकादमी के कैंपस में लाइब्रेरी समेत अन्य जगहों पर आती-जाती थी. पहचान पत्र फर्जी होने के खुलासे के बाद महिला को आसानी से भागने दिया गया. महिला के अकादमी से जाने के आठ दिन बाद सुरक्षा अधिकारी की तहरीर पर उसके खिलाफ धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है.

पत्रकार शिव प्रसाद सती के अनुसार अकादमी के सुपरिंटेंडेंट ट्रेनिंग विक्रम सिंह ने 7 अगस्त 2012 को मसूरी थाने में इलेक्ट्रानिक उपकरणों से अश्लील चित्र और सूचना प्रकाशित करने का मामला आईटी एक्ट में दर्ज कराया था. यह मामला भी तब काफी चर्चा में रहा, लेकिन पुलिस जांच न तो आगे बढ़ी न ही इसका कोई निष्कर्ष निकल पाया. ताजा प्रकरण के भी इसी तरह का हश्र होने की आशंका जताई जा रही है.

मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्‍त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में छह माह से रह रही फर्जी महिला आईएएस गुरुवार को नए खुलासा किया. खुद को आईएएस अधिकारी बताने वाली रूबी चौधरी ने मीडिया को बताया कि उसके किसी रिश्तेदार ने एकेडमी में लाइब्रेरियन की नौकरी दिलाने के लिए 20 लाख रुपए की मांग की थी. जिसमें से वह दस लाख रुपए दे चुकी है. इसलिए ही रूबी एकेडमी में रह रही थी. रूबी ने बताया कि इस बारे में संस्‍थान के डायरेक्ट, डिप्टी डायरेक्टर से लेकर कई अधिकारियों को पता था. डायरेक्टर ने ही उसे एंट्री कार्ड उपलब्‍ध करवाया था. वह कोई जासूस नहीं है और न ही कोई अपराधी है. वह दो दिन से एसपी सिटी के संपर्क में है. रूबी ने कहा कि यदी वह अपराधी होती तो कब की फरार हो गई होती. रूबी ने मीडिया के जरिए मांग की कि इस मामले में जो भी दोषी हैं उन्हें सजा दी जाए. रूबी ने कहा ‌कि अगर मैं दोषी हूं तो मुझे भी दंड मिलना चाहिए.

-बीएस सिद्धू, डीजीपी यह कह रहे थे कि मामला बेहद संगीन है. जरूरत पड़ी तो पुलिस मुख्यालय की विशेष टीम भी जांच में लगाई जाएगी. फिलहाल, जिला पुलिस इसकी जांच कर रही है. एसएसपी को इस मामले में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने की हिदायत दी गई है.

रूबी चौधरी पुत्री सत्यवीर सिंह निवासी कुतबी गांव मुजफ्फरनगर सितंबर 2014 में अकादमी में आई थी. तब रूबी ने प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान (एटीआई) नैनीताल से जारी पहचान पत्र दिखाया था, जिस पर उसे एसडीएम दर्शाया गया था. बताया जा रहा है कि अकादमी के ही एक आला अधिकारी के कहने पर महिला को सुरक्षा गार्ड देव सिंह के कमरे में ठहराया गया. तब से लेकर मार्च तक महिला वहीं रही. इस दौरान अकादमी में राष्ट्रपति से लेकर अन्य वीवीआईपी के दौरे हुए.

बावजूद इसके सुरक्षा अधिकारियों को महिला पर शक नहीं हुआ. महिला अकादमी की उस लाइब्रेरी में भी बेरोकटोक जाती रही, जिसमें जाने से पहले कई औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं. इस बीच अकादमी में महिला की मौजूदगी पर सवाल उठने लगे तो उसके आईकार्ड सहित अन्य दस्तावेजों की जांच की गई तो उसका पहचान पत्र फर्जी पाया गया. 23 मार्च को जब मालूम हुआ कि महिला का पहचान पत्र फर्जी है तो उसे आनन-फानन में हटा दिया गया.

बताया जा रहा है कि उसके भगाने में सुरक्षा गार्ड देव सिंह की अहम भूमिका रही. यही वजह है कि देव सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है. मंगलवार को सुरक्षा अधिकारी प्रशासन सत्यवीर सिंह की तहरीर पर पुलिस ने महिला के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. एसआई पवन भारद्वाज को मामले का जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है. महिला के पहचान पत्र फर्जी होने के खुलासे के आठ दिन बाद उसके खिलाफ तहरीर देना भी सवाल खड़े कर रहा है. आखिर सुरक्षा अधिकारियों ने उसी दिन पुलिस को क्यों जानकारी नहीं दी? महिला को आसानी से अकादमी से कैसे जाने दिया गया? जब महिला मसूरी छोड़ चुकी है तब तहरीर क्यों दी गई? यदि मामले का खुलासा होते ही पुलिस को तहरीर दी जाती तो उसे तुरंत गिरफ्तार किया जा सकता था.
राष्ट्रीय अकादमी में फर्जी पहचान पत्र पर महिला का रहना वहां के सुरक्षा तंत्र पर सवाल उठा रहा है. महिला गार्ड रूम में रही, बावजूद इसके जांच पड़ताल नहीं की गई. इसके अलावा वह आला अधिकारी कौन था, जिसकी शह पर महिला अकादमी में दाखिल हुई? अकादमी की सुरक्षा ऐसी है कि बाहरी व्यक्ति भीतर प्रवेश ही नहीं कर सकता. रोज अंदर जाने वाले कर्मचारियों को भी सुरक्षा के मानकों से गुजरना पड़ता है. संदिग्ध युवती रूबी को किसने अंदर प्रवेश दिलाया और कौन उसे संरक्षण दे रहा था, –

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