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जाके पाँव न फटी बिवाई वह क्या जाने पीर पराई..

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-चन्द्रशेखर करगेती||
रामनगर जिला- नैनीताल के वीरपुर लच्छी गांव में राज्य आंदोलनकारी, पत्रकार एंव सामाजिक कार्यकर्ता प्रभात ध्यानी तथा मुनीश कुमार अग्रवाल पर हुए जानलेवा हमले व स्टोनक्रेशर के संचालकों द्वारा स्थानीय बुक्सा जनजाति बहुल समुदाय पर किये जा रहें अत्याचार के विरोध में हुई महापंचायत में ग्रामीणों का ठीक माफिया के साम्राज्य के नीचे उसके दमन के विरुद्ध एकजूट होना भी इस बात का सुखद संकेत माना जा सकता है कि जनता अब थोड़ी बहुत जागरूक हो रही है.628
इस महापंचायत में जहाँ राज्य गठन के सरोकारों से वास्ता रखने वाला राज्य के हर कौने से कोई ना कोई व्यक्ति उपस्थित ही नहीं था, बल्कि राज्य में खनन माफिया को दिए जा रहे सरकारी संरक्षण के खिलाफ जबरदस्त गुस्से में भी था, इस महापंचायत में अगर कोई उपस्थित नही थे तो वे थे राज्य की सत्ता और विपक्ष में बारी-बारी से बैठने वाले राजनैतिक दल कांग्रेस-भाजपा का स्थानीय नेतृत्व.
इस महापंचायत में कांग्रेस-भाजपा के किसी भी नेता के न आने से यह तो स्पष्ट हो ही गया है कि इन दोनों सत्ता लोलुप पार्टियों के लिये समाज के दमित वर्ग की महज एक वोट बैंक से ज्यादा और अहमियत नही है, उस वर्ग के सुख-दुःख से उनका कोई वास्ता नहीं है, वे इस वर्ग के द्वार पर तभी आते हैं जब कोई चुनाव सर पर होता हैं l यह वीरपुर लच्छी गांव की ही बात नहीं पुरे राज्य में जहाँ दमित वर्ग के सरोकारों की बात हो, ये दोनों ही राजनैतिक दल वहाँ से हमेशा नदारद रहें हैं, इस बात की पुष्टि बिन्दुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने आन्दोलन से हो सकती है, इस बात की पुष्टि वीर भड माधो सिंह भंडारी की कर्मस्थली रही मलेथा में स्टोन क्रेशर लगाने के विरुद्ध ग्रामीणों के आन्दोलन से हो सकती है,इस बात की पुष्टि पिथोरागढ़ जिले के डूंगरा गाँव में हो रहे स्टोन केशर के विरोध से हो सकती है.
ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या सच में ही उत्तराखण्ड का वोटर इतना बुद्धिहीन हो गया है, जो अपने आने वाले कल को भी नहीं देख पा रहा है, आखिर क्या जवाब दोगे अपनी आने वाली पीढ़ी को ? क्या अब भी सम्भल पायेगा राज्य के ये वोटर, आखिर राज्य की बदहाली का असल गुनाहगार तो वही है, जो राजनैतिक माफिया की पहचान भी नही कर पा रहा है !!

वीरपुर लच्छी गाँव के सरोकारों के सवाल पर जितने लठ प्रभात ध्यानी और मुनीष अग्रवाल पर खनन माफिया के गुर्गों ने बरसाये, काश उतने ही कांग्रेस-भाजपा के किसी नेता पर भी ग्रामीणों ने उनके कुकर्मों के लिये बरसाये होते तो इस राज्य की दशा ही आज कुछ और होती, तब उत्तराखण्ड हमारे तुम्हारे सपनों का उत्तराखण्ड बना होता.

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