कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे [email protected] पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

आम आदमी पार्टी और लोकतंत्र की चुनौतियाँ..

0
Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

 

-जगदीश्वर चतुर्वेदी||

‘आप’ के आंतरिक कलह को लेकर मीडिया में इनदिनों जमकर लिखा गया है. इसमें निश्चित रुप से आनंदकुमार,प्रशांत भूषण,योगेन्द्र यादव आदि के द्वारा उठाए सवाल वाजिब हैं. कुछ महत्वपूर्ण सवाल केजरीवाल एंड कंपनी ने भी उठाए हैं जो अपनी जगह सही हैं. दोनों ओर से जमकर एक-दूसरे के व्यवहार और राजनीतिक आचरण की समीक्षा भी की गयी है. गंदे और भद्दे किस्म के हमले भी हुए हैं. अंततः स्थिति यह है कि ‘आप’ एक राजनीतिक दल के रुप में बरकरार है. जब तक वह राजनीतिक दल के रुप में बरकरार है और केजरीवाल जनता के मुद्दे उठाता है आम जनता में उसकी राजनीतिक साख बनी रहेगी.Arvind-Kejriwal
‘आप’ एक राजनीतिक दल है, वह कोई एनजीओ नहीं है. वह बृहत्तर लोकतांत्रिक राजनीतिक प्रक्रिया का अंग है. राजनीतिक दल होने के नाते और खासकर दिल्ली में सत्ताधारी दल होने के नाते उसकी साख का फैसला उसके सरकारी और गैर-सरकारी कामकाज पर निर्भर है. राजनीतिक प्रक्रिया में दलीय लोकतंत्र के सवाल बहुत छोटे सवाल हैं. राजनीतिक प्रक्रिया के लिए नेता विशेष केनिजी दलीय आचरण के सवाल भी बहुत बड़े सवाल नहीं होते. उल्लेखनीय है लोकतंत्र में निजी आचार-व्यवहार कभी भी निर्णायक राजनीतिक सवाल नहीं बन पाता.
राजनीतिक प्रक्रिया मेंनिजी की हाशिए के सवाल जैसी भूमिका भी नहीं होती. राजनीति में दलीय भूमिका होती है, दलीय सार्वजनिक संघर्ष की भूमिका होती है. राजनीतिक प्रक्रिया बेहद निर्मम होतीहै. वह निजी को निजी नहीं रहने देती. निजी को राजनीतिक बना देती. निजी जब राजनीतिकबनता है वह मूल्य नहीं रह जाता,वह राजनीति का लोंदा बन जाता है. यदि किसी नेता की निजी बातों, चीजों, आदतों यानिजी नजरिए को आप हमले के लिए चुनते हैं तो उससे नेता पर कोई फर्क नहीं पड़ता.हमजान लें राजनीतिक प्रक्रिया ,नेता या नेताओं के निजी व्यवहारों से निर्देशित नहींहोती. वह तो राजनीतिक प्रक्रिया से निर्देशित होती है.
व्यक्तित्व विश्लेषण केलिए निजी का महत्व है लेकिन राजनीतिक प्रक्रिया के लिए निजी बातों और निजी नजरिए का कोई महत्व नहीं है, राजनीतिक प्रक्रिया में तो राजनीतिक एक्शन ही प्रमुख है. इसलिए अरविंद केजरीवाल निजी तौर पर कैसा आदमी है, इसका कोई खास असर राजनीतिक प्रक्रिया पर होने वाला नहीं है. राजनीतिक प्रक्रिया में नेता का निजी आचरण और निजी नजरिया ही यदि महत्वपूर्ण होता तो मोदी पीएम न होते, श्रीमती इंदिरा गांधी दोबारा सत्ता में न आतीं, उसके पहले कांग्रेस को तोड़कर वे पीएम न बन पातीं. कहने का आशय यह कि केजरीवाल को देखने के लिए हमें उसके निजी आचार-व्यवहार के दायरे से बाहर निकलकर देखना होगा.
लोकतंत्र में राजनीतिकप्रक्रिया बहुत ही जटिल और संश्लिष्ट होती है. ‘आप’ का जन्म ऐतिहासिक कारणों से हुआ है और उसके खाते में कुछ ऐतिहासिककाम भी मुकर्रर हैं, हम चाहें या न चाहें , उसे वे काम करने हैं,वह यदि इसमेंचूकती है तो अप्रासंगिक होने को अभिशप्त है. ‘आप’ ने दिल्ली में ऐतिहासिक जीत दर्ज करके बहुत बड़ी जिम्मेदारी अपने ऊपरले ली है. उसने साम्प्रदायिक ताकतों को बुरी तरह परास्त किया है. उसने कांग्रेस कोदिल्ली में कहीं का नहीं छोड़ा. सवाल यह है क्या वह आने वाले समय में अपने राजनीतिक एक्शनके जरिए आम जनता के ज्वलंत सवालों पर नियमित सक्रियता बनाए रख पाती है ?
‘आप’ के सामने पहली चुनौती है दिल्ली सरकार चलाने की और सरकार को पारदर्शी-लोकप्रिय बनाए रखने की. दूसरी बड़ी चुनौती है केन्द्र सरकार की जनविरोधीनीतियों का स्वतंत्र और अन्य दलों के साथ मिलकर विरोध संगठित करने और व्यापक जनांदोलन खड़ा करने की. उल्लेखनीय है व्यापक हित के जनांदोलनों के अभाव के गर्भ से ‘आप’ का जन्म हुआ है, ‘आप’ को यह नहीं भूलना है कि जनांदोलन करना उसकी नियति ही नहीं लोकतंत्र की आज ऐतिहासिक अवस्था की जरुरत भी है. तीसरी बड़ी चुनौती है सत्ता के लोकतांत्रिकीकरण की, सत्ता के लोकतांत्रिकीकरण के जिस मॉडल की उसने वकालत की है उसको वह धैर्य के साथ दिल्ली में लागू करे और जन-समस्याओं के त्वरित और जनशिरकत वाले मॉडल को विकसित करे, इससे उसकी राजनीतिक साख तय होगी.

Facebook Comments
Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं
Share.

About Author

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

%d bloggers like this: