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1995 से लेकर अब तक 2 लाख 70 हज़ार 940 किसानों ने आत्महत्या की..

-कृष्णकांत।।

हाल के बारिश और तूफान से फसलें तबाह होने के बाद उत्तर प्रदेश में 30 से 35 किसानों ने आत्महत्या कर ली. सरकार कहती है कि आत्महत्या से कोई नहीं मरा.

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टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, पिछले तीन महीने में महाराष्ट्र के मराठवाड़ा इलाके में 226 किसानों ने आत्महत्या की.
अलग अलग अखबारों के अनुसार, उत्तर भारत में बारिश से फसलें तबाह होने के बाद सिर्फ चार दिनों में ही 30 किसानों ने खुदकुशी की.
मध्य प्रदेश के भिंड जिले में अब तक फसल बर्बादी से नौ किसानों की मौत हो गई है. सोमवार रात यहां के रेंवजा गांव बड़ापुरा निवासी किसान जनवेद ने फांसी लगा ली. मेहरा निवासी बदनसिंह को अपनी बर्बाद फसल देख अटैक आ गया और उनकी मौत हो गई.
हरियाणा से भी किसानों की मौत या फिर आत्महत्या की खबर है.
इन सब घटनाओं में खास बात यह है कि प्रशासन इन्हें आत्महत्या या सदमें से हुई मौत मानने को तैयार नहीं है.
भिंड के कलेक्टर मधुकर आग्नेय एक ऑडियो क्लिप में कहते सुनाई दिए हैं कि ‘हम तो तंग आ गए हैं रोज-रोज की… जो मरेगा इसी की वजह से मरेगा क्या… इतने बच्चे पैदा किए तो टेंशन से प्राण तो निकलेंगे ही…पांच-पांच, छह-छह छोरा-छोरी पैदा कर लेते हैं… और आत्महत्या कर हमको बदनाम करते हैं.’
ताजा आत्महत्याओं के सही आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं क्योंकि सरकारें इन्हें सामान्य मौतें मान रही हैं.
पी साईनाथ कहते हैं कि राज्य सरकारें लगातार किसानों की आत्महत्या को दर्ज नहीं करतीं और वाहवाही लेने के लिए आंकड़ों में ही खेल कर देती हैं. वे किसानों को बचाने का कोई उपाय नहीं करतीं.
बावजूद इसके, राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो कहता है कि 1995 से लेकर अब तक 2 लाख 70 हज़ार 940 किसानों ने आत्महत्या की है.
ताजा खबर यह है कि अगर आप चाहें तो गुजरात सरकार आपको 600 रुपये में परधान सेवक के जन्म स्थल का टूर करा सकती है.
इन मौतों पर हमारे प्रधानमंत्री की इस पर संभावित राय हो सकती है कि यह सब ‘फ़ाइव स्टार एक्टिविस्ट्स’ का खड़ा किया हुआ हौवा है.
इस सबके बीच मोदी जी फ्रांस की यात्रा पर जा रहे हैं और उनकी यात्राओं या उनके सूट पर हो रहे खर्च के भी आंकड़े सामने नहीं आए हैं.

(कृष्णकांत की फेसबुक वाल से)

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