कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे [email protected] पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

दिवालिया होने कगार पर मगर निवेशकों का पैसा लुटाने में कोई शर्म नहीं..

0
Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

-कुमार सौवीर।।

पूरे पांच महीने हो गये हैं, मगर ऐयाश सुब्रत राय के सहारा इंडिया के कर्मचारियों को वेतन के नाम पर एक धेला तक नहीं थमाया गया है। मगर सहारा इंडिया के आला अफसरों ने अपनी एेश और कम्‍पनी की रकम को दोनों हाथों से लुटाने में कत्‍तई शर्म नहीं दिखायी है। पिछले तीन दिन पहले सुरेश रैना और प्रियंका की शादी दिल्‍ली में हुई तो सहारा इंडिया ने अपना खजाना खोल दिया। खबर है कि इस शादी का पूरा खर्चा सहारा इंडिया ने ही लुटाया है। यह है सुरेश रैना की शादी का मंजर, जिसमें सुब्रत राय के बेहद करीबी और सहारा मीडिया के प्रमुख अभिजित राय की मौजूदगी आश्‍चर्यजनक रही। खबर है कि यह पूरी सारी शादी ही सुब्रत राय के इशारे पर आयोजित की गयी है।11082568_10204073544423127_2988422239067834095_n

यह हालत तब है जब कंगाली पर खड़े और लगातार दीवालिया होते जा रहे सहारा इंडिया के कर्मचारियों ने अपने परिवार की दुर्दशा से घबरा कर आत्‍महत्‍या तक जैसे कदम उठाने का फैसला उठा लिया है। अकेले लखनऊ में ही पिछले हफ्ते ही तीन कर्मचारियों ने आत्‍महत्‍या कर अपनी इहलीला खत्‍म कर दी। लेकिन सहारा इंडिया प्रबंधन पर इसकी तनिक न तो कोई शर्म है और न ही कोई चिन्‍ता।

उधर सहारा इंडिया मैनेजमेंट के आला अफसर लगातार यही रोना-धोना कर रहे हैं कि सुब्रत राय की जमानत की रकम जुगाड़ करने के लिए कर्मचारियों और उनके परिवारीजनों-बच्‍चों के हिस्‍से की रोटी में कटौती की जा रही है। प्रबंधन ने ऐलान कर दिया है कि हालात बहुत खराब हैं, जिसके चलते एक कर्मचारियों को एक छदाम तक नहीं दिया जा सकता है। जिसे नौकरी करनी हो, वो करें, वरना अपना रास्‍ता नापें। कहा गया है कि कर्मचारीगण अपना पुराना हिसाब-किताब को भूल करके नये सिरे से कम्‍पनी को मजबूत दिलानी देने की कवायद में जुटें।

ताजा खबर है कि लखनऊ में बनी सारी सहाराई इमारतों की हालत बिलकुल धराशायी होने को है। वेतन तो दूर की बात है, अब तो इन इमारतों में बनें इमारतों में बने चाय-नाश्‍ते की दूकान तक बंध बन गयी हैं।

Facebook Comments
Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं
Share.

About Author

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

%d bloggers like this: