Share this on WhatsApp
Subscribe to RSS
कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे [email protected] पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

IB ने ब्रिटिश इंटेलिजेंस एजेंसी से साझा की थी बोस के परिजनों की जासूसी की जानकारी..

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की सरकार ने न सिर्फ सुभाषचंद्र बोस के परिवार की जासूसी कराई थी, बल्कि इससे मिली जानकारी को ब्रिटिश इंटरनल सीक्रेट सर्विस एमआई5 के साथ साझा भी किया था. हाल ही में गुप्त सूची से हटाए गए नेशनल आर्काइव के दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ है.

subhash-chandra-bose_s_650_041215114901


6 अक्टूबर 1947 को आईबी के सीनियर अधिकारी ने दिल्ली में तैनात एमआई5 के अपने समकक्ष को इस बारे में लिखा था. इंडियन इंटेलिजेंस ब्यूरो ने नेताजी के करीबी एसीएन नांबियार और भतीजे अमिय नाथ बोस के बीच बातचीत के एक खत को MI5 के साथ साझा किया था. नांबियार उस समय स्विट्जरलैंड में थे और अमिया बोस कोलकाता में थे.

नेताजी की मिस्ट्री पर ‘इंडियाज बिगेस्ट कवर-अप’ नाम से किताब लिखने वाले अनुज धर ने इस पर सवाल उठाते कहा, ‘उस समय आईबी का प्रमुख कौन था, जब एजेंसी स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में विदेशी खुफिया एजेंसी को सूचित कर रही थी.’

आईबी ने हाल ही में यह दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं, जिसे नेशनल आर्काइव में रखा गया है और इस तक इंडिया टुडे ने अपनी पहुंच बनाई है.

bose-letter_mos_041215121539

इन दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि नेहरू सरकार ने बोस परिवार पर 1948 से 1968 तक नजर रखी. यह सिंगल पेज उन दस्तावेजों का हिस्सा है, जो सार्वजनिक किए गए हैं.

आईबी के तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर बालकृष्ण ने सिक्योरिटी लायसन ऑफिसर केएम बोर्न को लिखा था. बोर्न उस समय दिल्ली में तैनात थे. शेट्टी सीधे तौर पर पहले आईबी चीफ संजीवी पिल्लई और उनके उत्तराधिकार बीएन मलिक के अधीन काम कर चुके थे. उन्होंने लिखा, ‘सीक्रेट सेंसरशिप के दौरान नांबियार का पत्र देखा गया.’

1924 में बतौर पत्रकार ब्रिटेन जाने वाले नांबियार ने नेताजी के साथ किया और बाद में नेहरू के साथ भी, बोस परिवार को भेजे जाने वाले पत्र लगातार इंटरसेप्ट किए जाते रहे, जब वह स्विट्जरलैंड में भारतीय उच्चायुक्त के तौर पर पोस्टेड थे.

2014 में नेशनल आर्काइव की ओर से सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों के मुताबिक एमआई5 नांबियार को सोवियत जासूस मानती थी.

नेताजी के भतीजे को भेजे गए नांबियार के पत्र पर शेट्टी ने बोर्न को लिखा, ‘इस पत्र पर आपकी राय के लिए हम आभारी रहेंगे.’

रॉ के पूर्व विशेष सचिव, वी. बालचंद्रन ने बोर्न के दस्तावेजों को बेहद महत्वपूर्ण बताया है. उन्होंने कहा, ‘इससे क्रिस्टोफर एंड्रयू के दावों की पुष्टि होती है, जिसने 2009 में एमआई5 की आधिकारिक हिस्ट्री में लिखा था कि प्रधानमंत्री नेहरू ने नई दिल्ली में एक एमआई5 एजेंट को अनुमति दी थी, जिसे सिक्योरिटी लॉयसन अधिकारी बुलाया जाता.’

हालांकि दस्तावेजों से यह साबित हो गया है कि किस तरह आजादी के बाद भी ब्रिटिश इंटेलिजेंस एजेंसी ने बोस परिवार पर नजर रखी. कहा जाता है कि एमआई5 लायसन अधिकारी 1970 तक रहा, बालचंद्रन का मानना है कि ब्रिटिश इंटेलिजेंस एजेंसी आईबी को इस बात के लिए प्रभावित करने कामयाब रही कि कम्युनिस्ट आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा हैं और उस पर फोकस किया जाए.

(आजतक)

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे [email protected] पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

0 comments

Add your comment

Nickname:
E-mail:
Website:
Comment:

Other articlesgo to homepage

कहां हुई थी पहली गणतंत्र दिवस परेड..

कहां हुई थी पहली गणतंत्र दिवस परेड..(0)

Share this on WhatsApp आज अगर टीवी के किसी केबीसी नुमा कार्यक्रम में यह पूछा जाए कि देश की राजधानी में पहली गणतंत्र दिवस परेड कहां हुई थी, तो सबसे पहले घंटी दबाने वालों का उत्तर राजपथ ही होगा और दर्शकों का भी यही मानना होगा कि कितना आसान सवाल है.. पर हक़ीक़त इससे बिल्कुल

हे धनुर्धर अर्जुन, तुम शिखंडी नहीं हो..

हे धनुर्धर अर्जुन, तुम शिखंडी नहीं हो..(0)

Share this on WhatsApp-त्रिभुवन॥ झीलों की इस नगरी उदयपुर में कुछ लालची मुनाफाखोर आए दिन निर्दोष लोगों के जीवन को संकट में डालकर उनके चेहरों पर आंसुओं की झीलें बनाते रहते हैं। पूरा प्रशासनिक अमला असहाय होकर देखता रहता है। थोड़ी कानूनी कार्रवाई होती है और फिर इसे भुलाकर हम सब अगली दुर्घटना का इंतजार

मानव-शृंखला के दौरान बच्चो को पहुंचे नुकसान पर बिहार सरकार दे रिपोर्ट..

मानव-शृंखला के दौरान बच्चो को पहुंचे नुकसान पर बिहार सरकार दे रिपोर्ट..(0)

Share this on WhatsApp-अभिरंजन कुमार॥ बिहार में मानव-शृंखला के दौरान घटी अनेक दुर्घटनाओ में बड़ी संख्या में बच्चे बेहोश हुए और कुछ की मौत की भी ख़बरें हैं। मैंने पहले ही कहा था कि नीतीश कुमार पहले भीड़ को संभालना सीख लें, फिर भीड़ जुटाने की राजनीति करें, क्योंकि जब-जब वे भीड़ जुटाते हैं, बेगुनाह नागरिकों

नर्मदा यात्रा में हर मुद्दे पर बात हो नही तो यह पहल भी अधूरी ही साबित होगी..

नर्मदा यात्रा में हर मुद्दे पर बात हो नही तो यह पहल भी अधूरी ही साबित होगी..(0)

Share this on WhatsApp-संजय रोकड़े॥ हमने विकास के लिए धीरे-धीरे नर्मदा को खतरे में डाल दिया। नर्मदा नदी में मिलने वाले गंदे नालों के पानी को ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए साफ किया जाएगा। नर्मदा के दोनों तरफ फलदार पेड़ लगाए जाएंगे, ताकि नर्मदा का जलस्तर बढ़े और नदी का प्रवाह बना रहे। जिन किसानों के

कटनी के हवालाकाण्ड ने शिवराज को फिर कटघरे में खड़ा किया..

कटनी के हवालाकाण्ड ने शिवराज को फिर कटघरे में खड़ा किया..(0)

Share this on WhatsAppमध्यप्रदेश के कटनी जिले के हवाला कारोबार के खुलासे ने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है. यह ठीक वैसे ही सुर्खियां बन रहा है, जैसा कभी डंपर कांड, व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) कांड बने थे और कई बड़े लोगों पर इन मामलों की आंच आई थी. लेकिन इन सभी मामलों

read more

मीडिया दरबार एंड्राइड एप्प

मीडिया दरबार की एंड्राइड एप्प अपने एंड्राइड फ़ोन पर इंस्टाल करें.. Click Here To Install On Your Phone

Contacts and information

मीडिया दरबार - जहाँ लगता है दरबार. आप ही राजा हैं इस दरबार के और कटघरे में है मीडिया. हम तो मात्र एक मंच हैं और मीडिया पर अपनी निगाह जमायें हैं, जहाँ भी मीडिया में कुछ गलत होता दिखाई देता है उसे हम आपके सामने रख देते हैं और चलाते हैं मुकद्दमा. जिसपर सुनवाई करते हैं आप, जहाँ न्याय करते हैं आप. जी हाँ, यह एक अलग किस्म का दरबार है. मीडिया दरबार...

Social networks

Most popular categories

© 2014 All rights reserved.
%d bloggers like this: