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IB ने ब्रिटिश इंटेलिजेंस एजेंसी से साझा की थी बोस के परिजनों की जासूसी की जानकारी..

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की सरकार ने न सिर्फ सुभाषचंद्र बोस के परिवार की जासूसी कराई थी, बल्कि इससे मिली जानकारी को ब्रिटिश इंटरनल सीक्रेट सर्विस एमआई5 के साथ साझा भी किया था. हाल ही में गुप्त सूची से हटाए गए नेशनल आर्काइव के दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ है.

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6 अक्टूबर 1947 को आईबी के सीनियर अधिकारी ने दिल्ली में तैनात एमआई5 के अपने समकक्ष को इस बारे में लिखा था. इंडियन इंटेलिजेंस ब्यूरो ने नेताजी के करीबी एसीएन नांबियार और भतीजे अमिय नाथ बोस के बीच बातचीत के एक खत को MI5 के साथ साझा किया था. नांबियार उस समय स्विट्जरलैंड में थे और अमिया बोस कोलकाता में थे.

नेताजी की मिस्ट्री पर ‘इंडियाज बिगेस्ट कवर-अप’ नाम से किताब लिखने वाले अनुज धर ने इस पर सवाल उठाते कहा, ‘उस समय आईबी का प्रमुख कौन था, जब एजेंसी स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में विदेशी खुफिया एजेंसी को सूचित कर रही थी.’

आईबी ने हाल ही में यह दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं, जिसे नेशनल आर्काइव में रखा गया है और इस तक इंडिया टुडे ने अपनी पहुंच बनाई है.

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इन दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि नेहरू सरकार ने बोस परिवार पर 1948 से 1968 तक नजर रखी. यह सिंगल पेज उन दस्तावेजों का हिस्सा है, जो सार्वजनिक किए गए हैं.

आईबी के तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर बालकृष्ण ने सिक्योरिटी लायसन ऑफिसर केएम बोर्न को लिखा था. बोर्न उस समय दिल्ली में तैनात थे. शेट्टी सीधे तौर पर पहले आईबी चीफ संजीवी पिल्लई और उनके उत्तराधिकार बीएन मलिक के अधीन काम कर चुके थे. उन्होंने लिखा, ‘सीक्रेट सेंसरशिप के दौरान नांबियार का पत्र देखा गया.’

1924 में बतौर पत्रकार ब्रिटेन जाने वाले नांबियार ने नेताजी के साथ किया और बाद में नेहरू के साथ भी, बोस परिवार को भेजे जाने वाले पत्र लगातार इंटरसेप्ट किए जाते रहे, जब वह स्विट्जरलैंड में भारतीय उच्चायुक्त के तौर पर पोस्टेड थे.

2014 में नेशनल आर्काइव की ओर से सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों के मुताबिक एमआई5 नांबियार को सोवियत जासूस मानती थी.

नेताजी के भतीजे को भेजे गए नांबियार के पत्र पर शेट्टी ने बोर्न को लिखा, ‘इस पत्र पर आपकी राय के लिए हम आभारी रहेंगे.’

रॉ के पूर्व विशेष सचिव, वी. बालचंद्रन ने बोर्न के दस्तावेजों को बेहद महत्वपूर्ण बताया है. उन्होंने कहा, ‘इससे क्रिस्टोफर एंड्रयू के दावों की पुष्टि होती है, जिसने 2009 में एमआई5 की आधिकारिक हिस्ट्री में लिखा था कि प्रधानमंत्री नेहरू ने नई दिल्ली में एक एमआई5 एजेंट को अनुमति दी थी, जिसे सिक्योरिटी लॉयसन अधिकारी बुलाया जाता.’

हालांकि दस्तावेजों से यह साबित हो गया है कि किस तरह आजादी के बाद भी ब्रिटिश इंटेलिजेंस एजेंसी ने बोस परिवार पर नजर रखी. कहा जाता है कि एमआई5 लायसन अधिकारी 1970 तक रहा, बालचंद्रन का मानना है कि ब्रिटिश इंटेलिजेंस एजेंसी आईबी को इस बात के लिए प्रभावित करने कामयाब रही कि कम्युनिस्ट आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा हैं और उस पर फोकस किया जाए.

(आजतक)

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