कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे [email protected] पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

भगत सिंह के भतीजे ने किया दावा, भगत सिंह की भी हुई थी जासूसी..

0
Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

चंडीगढ़, खुफिया ब्यूरो (आइबी) की ओर से नेताजी सुभाष चंद्र बोस के रिश्तेदारों की जासूसी के मुद्दे पर विवाद के बीच भगत सिंह के भतीजे अभय सिंह संधु ने दावा किया है कि भगत सिंह के परिवार की भी कई सालों तक ‘निगरानी’ की गई.bhagat-singh

उन्होंने मांग करते हुए कहा कि सरकार भगत सिंह से जुड़ी सभी फाइलें सार्वजनिक करे. 57 साल के संधु ने मोहाली में संवाददाताओं को बताया, हमारे परिवार पर कई सालों तक नजर रखी गई. फोन पर होने वाली हमारी बातचीत भी सालों तक निगरानी के दायरे में रही. ब्रिटिश शासन के समय से ही उनके परिवार पर पैनी नजर रखी गई.

उन्होंने दावा किया कि देश की आजादी के बाद भी हम खुफिया एजेंसियों की नजर में थे. संधु ने सरकार के सामने अपनी मांग रखते हुए कहा कि भगत सिंह के चाचा और स्वतंत्रता सेनानी सरदार अजित सिंह से जुडी फाइलें भी सार्वजनिक की जाए. उन्होंने कहा कि हम वह सारी चीज जानना चाहते हैं जो ब्रिटिश सरकार ने सरदार अजित सिंह और शहीद भगत सिंह के बारे में लिखी थी. सारे रिकॉर्ड्स को सार्वजनिक किया जाना चाहिए. सरकार क्यों छुपा रही है?हमें उम्मीद है कि मौजूदा केंद्र सरकार जल्द ही इस बाबत कदम उठाएगी.

संधु भगत सिंह के छोटे भाई सरदार कुलबीर सिंह के बेटे हैं जिनका जन्म 1914 में हुआ था और वह फिरोजपुर से जनसंघ के विधायक थे. संधु ने कहा कि मेरे पिता दिवंगत सरदार कुलबीर सिंह ने दोनों से जुडी वे फाइलें और रिकॉर्ड प्राप्त करने की कोशिश की थी जिन्हें दिल्ली के राष्ट्रीय अभिलेखागार में रखा गया है.

बकौल संधु उन्हें बताया गया कि फाइलें ‘गुप्त’ हैं और 20-30 सालों तक के लिये अहस्तांतरीणय हैं. उन्होंने कहा, ‘मेरे पिता का निधन 1983 में हुआ था, लेकिन उसके बाद भी जब हमने मांग की तो हमें वही जवाब मिला. संधु ने कहा कि कुलबीर सिंह की मौत के बाद भी उनके परिवार ने दस्तावेज हासिल करने की कोशिश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.

 

Facebook Comments
Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं
Share.

About Author

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

%d bloggers like this: