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विदेशी निवेश की सीमा और नया नाम प्रेसटीट्यूट..

-संजय कुमार सिंह।।
एबीपी न्यूज पर व्यक्ति विशेष में सनी लियोन पर कार्यक्रम दिखाए जाने की खबर सुनकर मुझे वो दिन याद आ रहे हैं जब स्टार टीवी आधिकारिक तौर पर भारत नहीं आया था। उस समय इसका विरोध करने वाले कहते थे कि भारतीय संस्कृति खराब करेगा। बाद में स्टार टीवी भारत आया, एक भारतीय कंपनी के साथ रहा – काम किया। कोई खास शिकायत रही हो ऐसा नहीं लगा। फिर स्टार टीवी भारतीय कंपनी से अलग हो गया और भारत में स्टार टीवी भारतीय संस्कृति में रम-रंग गया पर जो भारतीय था उसी ने विलायती रंग ढंग अपना लिए। स्टार टीवी अब खबरों में नहीं है और मनोरंजन परोस कर अपना धंधा चला रहा है। पर भारतीय संस्कार वाले चैनल का पेट है कि भरने का नाम ही नहीं ले रहा है। खबरों और मनोरंजन का ऐसा घालमेल है कि मीडिया के लिए नया नाम प्रेसटीट्यूट चल पड़ा है।

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अभी तक की कहानी यह है कि एबीपी न्यूज एक भारतीय समाचार चैनल है जिसका स्वामित्व एबीपी यानी आनंद बाजार पत्रिका समूह के पास है। पहले यह स्टार न्यूज के नाम से जाना जाता था और इसका स्वामित्व स्टार टीवी / फॉक्स इंटरनेशनल चैनल के स्वामित्व वाले न्यूज कॉरपोरेशन के साथ संयुक्त उपक्रम के पास था। स्टार न्यूज की शुरुआत फरवरी 1998 में हुई थी और 2003 में स्टार न्यूज पूरी तरह हिन्दी समाचार चैनल बन गया। पहले यह अंग्रेजी – हिन्दी दोनों में था और शुरू में स्टार टीवी ने इसे खुद चलाया जबकि 2003 तक प्रोडक्शन का काम एनडीटीवी ने किया। 2003 में जब एनडीटीवी के साथ करार खत्म हुआ तो स्टार न्यूज एक हिन्दी समाचार चैनल में बदल गया – यह स्टार और एबीपी के गठजोड़ का भाग था।
2003 में जब एनडीटीवी से करार खत्म हुआ तो स्टार ने स्वयं चैनल चलाने का निर्णय किया। हालांकि, इन्हीं दिनों सरकार ने समाचार कारोबार में विदेशी इक्विटी की सीमा 26 प्रतिशत तय कर दी। तब स्टार ने आनंद बाजार पत्रिका समूह के साथ एक संयुक्त उपक्रम बनाया जिसने स्टार न्यूज चैनल को चलाया। इस संयुक्त उपक्रम में स्टार का हिस्सा 26% था जबकि आनंद बाजार समूह का 74%। अप्रैल 2012 में आनंद बाजार पत्रिका समूह ने एलान किया कि वह संयुक्त उपक्रम से अलग होगा। स्टार (यानी रूपर्ट मर्डोक नियंत्रित कंपनी) के लिए खबरों के कारोबार में रहना मुश्किल हो गया। और उसने मनोरंजन पर केंद्रित रहने का निर्णय किया। आनंद बाजार ने नए नाम से समाचार चैनल चलाने की घोषणा की और एबीपी न्यूज नाम तय किया। और इसी एबीपी न्यूज ने महेश भट्ट की खोज (खोज तो दरअसल कलर्स के प्रोग्राम बिग बॉस की है) सनी लियोन को खबर बना दिया।
उधर स्टार टीवी ने अपनी स्थिति मजबूत कर ली है और दावा है कि भारत के चार करोड़ केबल और सैटेलाइट कनेक्शन वाले घरों (2004 तक) में से 90 प्रतिशत में इसकी पहुंच है। और भारतीय टेलीविजन बाजार के कुल विज्ञापनों के राजस्व में से इसकी हिस्सेदारी 50 प्रतिशत है। ये आंकड़ें अधिकृत नहीं है और इधर उधर से लिए गए हैं पर सही हैं तो दिलचस्प हैं। ऐसे में मुझे यह भी याद आ रहा है कि इस देश में कंप्यूटरों का भी विरोध किया गया था और मीडिया में विदेशी निवेश पर 26 प्रतिशत की अधिकत्तम सीमा तय है। वैसे में कौन क्या कर रहा है इसपर भी विचार करना बनता है और जैसे कंप्यूटर और स्टार टीवी का विरोध अब हास्यास्पद लगता है कहीं वैसे ही 26 प्रतिशत अधिकत्तम विदेशी निवेश की सीमा भी बाद में हास्यास्पद लग सकती है क्या? या अभी ही लग रही है।

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